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पडोसी चाचाने दीदी के मजे लिए

मुझे यकीन है आप सब के घर में कई चुदाई के राज छुपे हे, परिवार के सदस्यों के बीच या कोई और सेक्स सीक्रेट, ठीक वैसी ही एक कहानी मैं आज आप लोगों को अपनी प्यारी खुशबू दीदी की सुनाऊंगी.

हम दोनों बहने एक ही स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई किये थे. मैं तब एम.ए. की पढ़ाई कर रही थी, तब खुशबू दीदी की शादी हुई, जीजू एक इंजीनियर हे दिल्ली में.

दिखने में हीरो और काफी सीधे पर शादी के बाद अकेले दिल्ली चले जाते, दीदी ससुराल में उसके मां बाप का ध्यान रखती थी यहां कानपुर में, हमारा घर दीदी के घर से १० किलोमीटर दूर है जलनगर में.

हमारे पड़ोसी शिरीष चाचा जिन्हें मैं और दीदी बचपन से जानते थे पापा के दोस्त थे. उनके घर में उनकी बीवी और एक १२ साल का बेटा जिसके साथ हम दो बहनें बचपन में खेला करती थी. मैं अब २२ साल की हो चुकी थी और दीदी २५ साल की, हमारी माँ की केंसर से मौत हुए ५ साल हो गए थे.

उन दिनों दिसंबर का महीना था और सर्दी तेज थी, दीदी अपने ससुराल से हमारे घर आई थी कुछ दिनों के लिए. शिरीष चाचा और उनके परिवार का और हमारे एक दूसरे के घर आना जाना था. खुशबू दीदी और मैं दोनों ही गोर हैं, दीदी थोड़ी हेल्दी टाइप है और ३६ की ब्रा पहनती है जबकि मैं ३४ की पहनती हु.

एक दिन जब मैं कॉलेज में थी तो तबीयत खराब लगी, मैं आधे कॉलेज में हीं वापस घर आ गई, आ कर दीदी को बताया तो दीदी ने मेरे सर पर हाथ रख कर कहा कि मुझे तो बुखार है, तो हम दोनों ने खाना खाया. फिर दीदी ने पापा को फोन लगाया ऑफिस में, पापा ने कहा कि शिरीष चाचा या चाची होगी तो उनसे बुखार की दवाई लाकर मुझे खिला दे.

तो दीदी सीधी उनके घर गई उन्होंने ही दरवाजा खोला, तो दीदी ने जैसे ही उन्हें बताया तो वह दवाई लाकर खुद मुझे देखने आये. उन दोनों को देखकर मैं बिस्तर में उठ बैठी, चाचा के दिए हुई दवाई खाकर में कंबल ओढ़ कर सोने लगी तो वह दोनों कमरे का दरवाजा बंद करके बाहर गए. हमारे घर में दो कमरे हैं, एक में मैं और दीदी सोती हूं जिसमें मैं लेटी थी और एक में मेरे पापा रहते हैं.

में कुछ देर तक सोने की कोशिश करती रही लेकिन पसीने से भीग कर मेरी हालत खराब हो गई थी, ऊपर से प्यास लगी थी, पहले तो सोचा चिल्ला कर दीदी को बुलाऊं पर फिर सोचा दीदी भी पापा के कमरे में सो रही होगी, चलो खुद ही उठ कर ले लेती हूं.

में किचन की ओर जाने लगी तो देखा दरवाजे के पास शिरीष चाचा के चप्पल अभी भी रखे हैं, अंदर देखा तो वह दूसरा कमरा पूरी तरह बंद था और कोई आवाज नहीं आ रही थी, मुझे लगा कही चाचा अपनी चप्पल भूल कर अपने घर तो नहीं चले गए.

लेकिन फिर अगले ही पल जो खयाल आया उससे मेरी धड़कन थोड़ी तेज हो गई और मैं दबे पांव उस दूसरे कमरे के पास गई तो अंदर से जो फुसफुसाती आवाज आ रही थी, पहले समझना मुश्किल था पर इतना पता चल गया कि कुछ खिचड़ी पक रही हे अंदर, दरवाजे पर कोई कीहोल नहीं था तो मैंने कान पुरी तरह दरवाजे पर टिका दिया तो जो सुना उससे मेरे रोंगटे खड़े हो गए, चाचा जी छोड़िए, चुटकी जाग जाएगी तो..

दीदी मेरा नाम लेकर चाचा को सतर्क कर रही थी, फिर कुछ देर दोनों चुप हो गए. इतने में मेरा सब्र का बांध टूटने लगा तो मैंने आहिस्ते से दरवाजा खोला तो वह भी ना आवाज किए थोड़ा खुल गया. मैंने अंदर देखा तो दीदी सिर्फ सया और ब्लाउज में दीवार से सटकर खड़ी है और उनकी साडी जमीन पर पड़ी है, ठीक उनके सामने शिरीष चाचा दीदी के दोनों कंधो को पकड़ कर खड़े हैं.

दीदी एक मूर्ति की तरह खड़ी है, लंबी लंबी सांसो के साथ खुशबू दीदी की बड़ी चूचियां ब्लाउज को उठा पटक रही है. उन दोनों का ध्यान मेरी ओर या खुले दरवाजे पर गया नहीं था.

पल भर में चाचा दीदी की गर्दन को चूमने लगे पर दीदी ना तो चिल्लाई और ना उन्हें रोकने की कोशिश करी, वह दीदी की गर्दन को चूमने लगे, चुमते हुए ब्लाउज को कंधे से खींचकर साइड कर के बाजू तक  लाकर पागलों की तरह कंधों पर मुह  रगडने लगे, देखते देखते वह दीदी की छातियों पर हाथ फेरते हुए बीच में आ कर उनकी हुक्स खोलने लगे.

में यह सब देख कर बड़ी हैरान थी की शिरीष चाचा जो हमारे पापा की उम्र के हैं और बचपन से जिसे दीदी चाचा बुलाती है यह दोनों आखिर यहां तक पहुंचे कैसे और क्या बेवकूफी कर रहे हैं?

ब्लाउज के सारे हुक खोल कर सफेद ब्रा दिखाई पड़ गई, चाचा फिर दीदी की छाती चूमने लगे, तभी दीदी के हाथ पीछे को गए और जट से उनकी ब्रा खुल कर लटक गया, मैं समझ गई दीदी जानबूझकर चाचा के साथ में गंदे काम कर रही है.

चाचाजी ने धीरे से ब्रा को सामने से ऊपर कर दिया और दीदी की नंगी चुचियों को अपने हाथों से आटे की तरह गूंदने लगे, दीदी बस आंखें बंद करके खड़ी थी, तभी चाचा बोल पड़े.

चाचा ने कहा वाह क्या चुचिया है आह्हह्म्म्म.

चाचा का मुह दीदी की दाई चूची की चुसाई करने लगा.

दीदी आवाज आ हहो अहह औऔ ओह हां हम मह्ह अमम्म करने लगी.

दीदी ने चाचा के कंधो को पकड़ लिया और सिसकियां भरती रही. चाचा ने बाई चूसने के बाद दाई पर मुह लगाया, दीदी अपनी उस चूची को अपने हाथों से उठाकर चाचा के मुह में घुसाने लगी. चाचा ने दीदी की दोनों चूचीयो से मन भर के रस पिया.

फिर दीदी के हाथ पकड़ कर अपने साथ बिस्तर पर ले गए, दीदी जाकर चित लेट गई, मानो चुदने को बेकरार हो, चाचा ने अपनी टी शर्ट और लुंगी उतार फेंकी और दीदी के ऊपर आ गए, दीदी की सया को कमर तक उठाने लगे. दीदी ने भी अच्छे बच्चे की तरह कमर उठा कर करने दिया.

फिर चाचा ने दीदी की लाल चड्डी खींच कर पैर से होते हुए निकाला, तभी मैंने देखा चाचा का काला लंड बहुत मोटा था, पर ज्यादा बड़ा नहीं था. दीदी की चूचियां चाचा के थूक से गीली होकर चमक रहे थे.

चाचा ने दीदी की चूत में हात फेरने लगे, दीदी तड़पने लगी थी, चाचा ने थोड़ा थूक अपने मुह से निकाल कर फिर चूत पर रगडने लगे, और एक उंगली अंदर डाल दी.

दीदी चिल्ला उठी औई मा ऐई अहह ओह अह्ह्ह ओह्ह हां.

चाचा ने अपनी पूरी उंगली निकाली और जुक कर दीदी की चूत के पास मुह ले गये.

अरे क्या खुशबू है तेरी फुद्दी की खुशबू बेटि मेरा लौड़ा तनक गया.

चाचा ने हड बड़ी से दो चार बार दीदी की चूत चाट कर वहा से हटे और अपने लंड पर फिर बहुत थूक लगाया, इस बार अपने लोड़े को दीदी की चूत में लगाकर ऊपर नीचे रगड़ने लगे.

दीदी : आह हो अहह हुऔउ हो अहह अम्म्म येस्स अहह ओह अह्ह्ह अब घुसा भी दो ना चाचा. अब दीदी को कुछ भी सहन करना मुश्किल लग रहा था और वह चाचा को अपनी चूत में लंड डालने की प्रार्थना कर रही थी.

चाचा दीदी की तडप देख कर अपना लंड धीरे से अपने हाथ में पकड़ा और दीदी की चूत के पास लेकर अंदर सरका दिया, दीदी फिर सिसकियां लेने लगी आऊ ह अहह हो अहह अम्म ओह अहह आयी एय्स्स्स अहह ओह अहह अम्म्म अहह इह अहह पर अपने दोनों पैर पूरी तरह खोल दिए और हवा में फैला कर चाचा को अंदर तक गुसने  दिया. चाचा कमर की कारीगरी करते हुए अपने लंड को जड़ तक दीदी के अंदर डाल दिया, फिर दीदी के ऊपर लेट गए. दीदी अब और सेक्सी अवजे निकाल रही थी और आऊ ह अहह हो अहह अम्म ओह अहह आयी एय्स्स्स अहह ओह अहह अम्म्म अहह इह अहह आऊ ह अहह हो अहह अम्म ओह अहह आयी एय्स्स्स अहह ओह अहह अम्म्म अहह इह अहह कर रही थी.

दीदी के फैले पैरों के बीच चाचा को जन्नत नसीब होने लगा था और वह भी अब सिसकियां छोड़ने लगे थे, पर फिर क्या हुआ पता नहीं? चाचा थोड़ा रुके और पास के चादर को खींचकर अपने और दीदी के ऊपर डाल दिया, इसलिए मुझे उनकी चुदाई ठीक से देखने में तकलीफ हुई.

दो नंगे बदन एक दूसरे की आग बुझाने में खो गए थे. चाचा दीदी को कसकर पकडे चादर के अंदर चोद रहे थे. दीदी बस आंखें बंद करके चाचा के कंधों को पकड़ कर आऊ ह अहह हो अहह अम्म ओह अहह आयी एय्स्स्स अहह ओह अहह अम्म्म अहह इह अहह कर रही थी.

करीबन १० मिनट तक वहां चादर समंदर की लहर की तरह ऊपर नीचे होने के बाद रुक गया. मैं समझ गई की उन दोनों का काम हो गया, थोड़ी देर में दोनों अलग हुए, दीदी दूसरी और मुड कर सो गई और चाचा उठ कर अपने कपड़े पहनने लगे, मौका देख कर मैं वहां से भाग कर वापिस अपने कमरे में लेट गई, चाचा चुप चाप अपने घर चले गए.

2 Comments

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  1. Didi ko uncle ne choda apko hum chod dete hai my no 8557974910

  2. Padose Chacha NE Jo Maza tere Didi Ko Deya use Se Kai Guna Zada Tume Ko mein Dunga My phone number 9435049911

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