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आंटी के साथ सेक्स की होली

दोस्तों आप सभी को होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं! आप की होली रंगीन और आप की सेक्स लाइफ होली के जैसी गीली हो ऐसी मेरी प्रार्थना हे. चलिए अब एक होली वाली सेक्स कहानी पर आते हे. मेरा नाम मजोब हे और मैं 25 साल का हु. मैं मेरिड हूँ और मैं पतला हूँ लेकिन मेरा लंड बड़ा और चौड़ा हे. मैं जबलपुर की एक प्राइवेट फर्म में काम करता हु लेकिन मेरा नेटिव प्लेस वैसे कोटा हे. मैं यहाँ जबलपुर में एक किराए के मकान में किरायेदार के तौर पर रहता हूँ.

चलिए आप मैं आप को इस कहानी की हिरोइन से मिलवाऊ. वो 39 साल की एक सेक्सी आंटी हे. वो एक बच्चे की माँ हे लेकिन अभी भी उसे देख के लगता ही नहीं हे की ऐसा हो. उसका पति जबलपुर से बहार काम करता हे और वो महीने में एकाद दो बार ही घर पर आता हे. और शायद यही वजह थी की आंटी जी मुझे पहले से ही फुल लाइन दे रही थी. आंटी की चूत पक्का प्यासी थी ये मुझे पता था!

होली के दिन मैंने देखा की आज भी अंकल घर नहीं आये थे. मैं भी एक ही दिन की छुट्टी मिलने की वजह से कोटा नहीं गया था.. मुझे होली खेलने का मुड़ नहीं बना तो मैं अपने कमरे में बैठ के टीवी देख रहा था. आंटी का लड़का बहार अपने यार दोस्तों के साथ रंग खेलने के लिए गया था. आंटी भी अपनी उम्र की औरतों और जवान लड़कियों और भाभियों के साथ होली खेल के वापस आ गई थी.

हम लोग सुबह से मिले नहीं थे क्यूंकि मैं थोडा लेट जगा था. आंटी मेरे पास आई और उसने मुझे हेप्पी होली कहा. मैंने भी होली की बधाई दी. आंटी ने थोडा और नोटीनेस दिखा के मेरे गालों के ऊपर गुलाल लगा दिया. और फिर वो अपने कमरे की तरफ बढ़ गई. और फिर तुरंत वो बाथरूम में नहाने के लिए भी चली गई. कुछ देर में आंटी ने मुझे बुलाया.

मैं जा के बाथरूम के पास रुका. मैंने देखा की आंटी ने बाथरूम का डोर खुला रखा था. मैंने पूछा क्या हुआ तो उसने कहा अन्दर आओ मनोज देखो न ये नल मेरे से खुल ही नहीं रहा हे.

मैं अन्दर घुसा और अन्दर का सिन देख के मेरे लंड और दिमाग एक एक न्यूरोन यानी नर्व तन्तु की माँ बहन एक हो गई. आंटी एकदम ओपन यानी की नंगी खड़ी हुई थी.

मैंने कहा लेकिन आप तो…!

आंटी ने हंस के कहा, अरे इसमें क्या हुआ, तुम घर के ही तो हो, क्या अपनी बीवी के साथ नंगा नहाये नहीं क्या! शर्माना छोडो और मेरे लिए जल्दी से नल खोलो. आंटी एकदम सेक्सी लग रही थी अपने इस न्यूड अवतार में. उसका सेक्सी बदन देख के कोई नहीं कह सकता हे की वो एक बच्चे की माँ थी. मैंने नल खोला, और वो एकदम आसानी से खुल गया. मैं आंटी को कहने के लिए मुड़ा की ये तो एकदम फ्री खुल रहा हे.

लेकिन तभी आंटी ने मेरे ऊपर आधी बाल्टी पानी फेंक के मुझे भिगो दिया! उसने मुझे भिगोने के लिए ही बुलाया था. और उस पानी के अन्दर रंग भी डाला हुआ थे उसने. मैंने अपने बाल को और आँखों के ऊपर से पानी को हटा के बोला, अब मैं कैसे निचे जाऊँगा इस हाल में?

तो उसने कहा चलो हम दोनों साथ में रंग छुड़ा लेते हे.

मैं नहीं करना चाहता था इसलिए एक कदम पीछे हटा. लेकिन आंटी शायद आज मुझे छोड़ने के मुड़ में नहीं थी. उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ सा लिया. और वो बोली, मेरिड हो और अनुभव वाले हो फिर इतने क्यूँ शर्माते हो भला! और ये कह के उन्होंने मेरा लोवर और चड्डी दोनों खिंच लिया. आंटी की इस हरकत ने मेरे लौड़े को भी हिला के रख दिया. बहुत दिनों से मैंने भी अपनी बीवी को नहीं चोदा था इसलिए फटाक से लंड कड़क हो गया.

मैंने आंटी के बूब्स को अपने हाथ में ले के दबाये और उन्हें चूमने लगा. आंटी ने अपने हाथ मेरी गांड पर दबाये और अपनी तरफ खींचने लगी.

मैंने आंटी को कहा, बहुत दिन से मेरा लंड लेने की ट्राय में थी तुम.

वो बोली, हां मेरा बेटा घर पर होता था जब तुम होते थे. आज जा के चांस मिला हे इस लेने के. और ये कहते हुए उसने मेरे लंड को दबा दिया. मैंने कहा, तो क्या हर किरायेदार से चुदी हो तुम?

वो बोली, ऐसी मेरी किस्मत कहा! तुम इस मकान के पहले किरायेदार हो. पहले तो उस कमरे में मेरा देवर रहता था.

मैंने कहा, फिर आप ने उसका लिया होगा ना.

छी, वो खुद एक गांडू था और अपनी मरवाने के लिए लोगो को लाता था. तभी तो उसे बहार निकाल के तुम्हे भाड़े पर दे दिया.

मैंने हाथ को आंटी की चूत पर लगा के दबाया. उसकी चूत अन्दर से गीली हुई पड़ी थी. वो कस के मुझे किस करने लगी.

और उसने भी मेरे लौड़े को अपनी मुठी में बंध कर के हिला दिया. मैंने उसके निपल्स को काटा और उसके मुहं से आह निकल पड़ी.  आंटी ने कहा, चलो जल्दी से डाल दो मेरे अंदर.

मैंने कहा एकदम डालना हे?

वो बोली, अरे मैं आज तो जल्दी से अंदर ही लेना चाहती हूँ. फिर प्यार रोमांस सब करेंगे.

मैंने आंटी को बाथरूम की दिवार पकड के खड़ा करवा दिया. फिर पीछे से उसकी गांड के चिक्स यानी की कूल्हों को खोला.

उसकी चूत का छेद देखा तो उसके ऊपर भी होली के रंग लगे हुए थे. मैंने अपना लंड वहाँ रखा तो आंटी की आह्ह निकल गई. मैंने आंटी की कमर को पकड के हौले से धक्का दिया और लंड अन्दर आधा घुस गया. मुझे लंड के ऊपर चिपचिपाहट सी फिल हुई. आंटी बोली, इतने बेदर्दी न बनो, थोडा धीरे से करो!

मैंने कहा, रुक जाओ डार्लिंग. अभी मजा आएगा!

और फिर मैं धीरे धीरे से आंटी की चूत में लंड को हिलाना चालू कर दिया. और एक मिनिट के अन्दर मैंने लंड को पूरा उसकी चूत में घुसेड दिया. आंटी की चूत का रंग निकल के मेरे लंड पर भी आ गया. आंटी भी अपनी गांड को जोर जोर से घिस के मुझे मजे दे रही थी.

मैंने अब उसकी गांड को पकड के जोर जोर से चोदना चालू कर दिया. वो भी हांफती हुई कुतिया की तरह चुदवा रही थी.

और 10 मिनिट की मस्त चुदाई के बाद मैंने कहा, चलो आगे घुमो. वो आगे को हुई तो मैंने उसकी एक टांग को उठा के उसकी चूत में लंड भर दिया.

अब की वो हिल नहीं प् रही थी. लेकिन चुदवाने में अभी भी वो वैसी ही हॉट थी. मैंने कस के उसे 10 मिनिट और चोदा और उसके अन्दर वो 2 बार झड़ गई.

मेरा भी लंड का पानी निकलने को था. मैंने कहा, आंटी मेरा वीर्य कहा निकालू?

तो वो बोली, अन्दर नाह क्यूंकि पति कम ही चोदते हे मुझे.

मैंने कहा, फिर अपने मुहं में ले लो.

वो बोली ठीक हे.

मैंने लंड को चूत से निकाला. आंटी घुटनों के ऊपर बैठ के लंड को चूसने लगी. केले को खा रही हो वैसे वो मस्त ब्लोव्जोब दे रही थी.

एक मिनिट में मेरे लंड की मलाई उसके मुहं में चूत गई. और वो सब पी भी गई.

दोस्तों हमारी ये चुदाई उस दिन चालु हुई थी पूरी नहीं. आज भी मैं इस सेक्सी मकानमालिकिन आंटी को अपने लौड़े का मजा दे रहा हु.

दोस्तों जाने से पहले आप सब को एक बार फिर से हेप्पी होली!

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