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आंटी की वासना का शिकार बना

मई के महीने की बेबाक गर्मी थी. वासु वैसे तो अपनी गर्लफ्रेंड तान्या को दोपहरी में चोदने के लिए ही आया था. वो अक्सर शेरिंग में पढाई के बहाने इस लड़की के घर पर उसे चोदने ही आता था. आज तान्या अपने कुछ दोस्तों के साथ वाटर पार्क गई हुई थी इसलिए वो घर पर नहीं थी.

वासु ने डोरबेल बजाई तो तान्या की माँ स्वीटी आंटी ने दरवाजा खोला. वो पतली कोटन की नाइटी पहने हुए थे. वासु ने एक नजर उन्हें देखा.

वासु: आंटी तान्या हे?

आंटी: नहीं वो तो रेखा औ र पिंकी के साथ पार्क गई हे!

वासु: ओह, चलो मैं एक घंटे में आता हूँ.

आंटी: वो शाम को आएगी.

वासु: ठीक हे फिर मैं चलता हूँ.

आंटी: आ जाओ कुछ देर मैं शिकंजी बना देती हूँ.

वासु: थेंक्स आंटी.

ये कह के वो घर में आ गया. आंटी अपनी गांड हिलाती हुई कमरे से निकल के किचन में गई. और 2 मिनिट के भीतर वो दो ग्लास ले के आई शिकंजी बड़ी सही बनाती हे स्वीटी आंटी. पिने के बाद आंटी ने कहा.

आंटी: तो पढाई कैसी चल रही हे तुम दोनों को, रोज बड़ी महनत से पढ़ते हो.

वासु: बस सही चल रही हे आंटी, तान्या बड़ी स्मार्ट हे वो बहुत सब सिखाती हे मुझे.

आंटी: वो पहले से ही स्मार्ट हे बेटा.

ये कह के आंटी ग्लास लेने के लिए निचे झुकी तो वासु का लंड कडक हो गया. क्यूंकि आंटी ने उसे अपनी आधी चूचियां जो दिखा दी थी! स्वीटी आंटी उतनी भी उम्र वाली नहीं थी. मुश्किल से 45 की होंगी. वो तो देहात में जल्दी शादी हो जाती हे न. जल्दी शादी तो फिर बचे भी जल्दी! आंटी ने भी देखा की वासु ने उसकी उभरी हुई चूचियां देख ली थी. वो ग्लास रख के फटाक से वापस आई.

अब की वो वासु के एकदम बगल में बैठ गई. उसकी जांघ जब वासु की जांघ से लड़ी तो वासु के लंड ने एक आह निकाल दी. वासु ने आंटी को देखा. वो थोडा डरा हुआ सा था. उसने कभी किसी मच्योर आंटी को चोदा नहीं था. इसलिए उसके मन में डर था. उसे लगा की शायद उसके मन में ही उलटे ख्याल चल रहे थे और आंटी का इरादा ऐसा नहीं था. वो नहीं चाहता था की खड़ा लंड उस से कुछ ऐसा करवा दे की आंटी के घर आना ही बंद हो जाए.

वासु: चलो आंटी मैं चलता हूँ, कल आऊंगा.

आंटी ने उसका हाथ पकड़ लिया, वासु जैसे ही सोफे के ऊपर से उठा.

आंटी: अब इतनी भी क्या जल्दी हे, वैसे तो 2-3 घंटे तान्या के कमरे में बैठते हो.

वासु: आंटी वो तो हम पढाई करते हे.

आंटी: तुम अभी जवान हुए हो और हम जवानी देख चुके हे बेटा. तान्या मेरी ही बेटी हे और मुझे सब पता हे. पढ़ाइ के परदे के पीछे जो खेल खेले जाते हे वो मैं सब जानती हूँ.

वासु: मैं समझा नहीं आंटी.

आंटी: बैठ साले हरामी, रंडी की औलाद. मेरी बेटी को दोपहरी में चोदने आया था और वो नहीं हे तो भाग रहा हे.

आंटी की इस एक लाइन ने सब पिक्चर साफ़ कर दिया था. वासु सोचने लगा की साला मैं इसकी बेटी को चोदता हु ये आंटी को कैसे पता चला!

आंटी: तुम लोग जो करते हो वो सब देखा हे मैंने खिड़की से 2-3 बार. और अब तुम सती सावित्री बन रहे हो मेरे सामने.

वासु कुछ नहीं बोल सका. पर उसके मन में काफी सवाल थे की आखिर इस आंटी को चाहिए क्या. लेकिन आंटी ने सामने से उसे वो बता दिया इसलिए उसे पूछने की कोई जरूरत नहीं रही.

आंटी: अब चुपचाप मैं कहती हूँ वो करते रहो वरना कल से घर आना बंद करवा दूंगी तान्या के पापा को बता के.

वासु कुछ बोला नहीं. आंटी ने अपनी नाइटी को ऊपर उठाई और वासु ने देखा की अन्दर उसने कुछ नहीं पहना था. ना कोई सलवार न कोई पेंटी. आंटी की गहरी बाल वाली चूत उसके सामने थी. चूत थोड़ी डार्क थी बाकी की बॉडी से. आंटी ने कहा: चल चाट इसे!

वासु के सामने वो सोफे के ऊपर ही अपनी टाँगे फैला के बैठ गई एक लेग को उसने साइड में किया और दुसरे लेग को उसने सोफे की आर्म-रेस्ट के ऊपर रख दिया. वासु सोफे से निचे उतर गया. और वो आंटी की मखमली बालोंवाली चूत को अपने होंठो से प्यार देने लगा. आंटी की वासना चरम पर ही थी. उसने वासु के माथे को दबा दिया अपनी चूत के ऊपर. वासु ने एक हाथ से आंटी की कमर को पकड़ ली. और वो अपनी जबान को चूत के दाने के ऊपर घिसने लगा. आंटी के मुहं से अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह निकल रहा था. और उसके होंठो के ऊपर जबान घुमाते हुए वो इस मजे को लुट रही थी.

वासु के अन्दर का सेक्स का कीड़ा भी जाग गया था. वैसे तो वो तान्या को चोदने के इरादे से ही आया था यहाँ. और अब तान्या की जगह उसकी माँ की चूत को चाटने में लगा हुआ था. स्वीटी आंटी ने इस जवान लड़के से अपनी चूत मस्त चटवाई. वासु ने ना सिर्फ चूत को चाट दिया बल्कि अपनी जबान अन्दर डाल के उसे फक भी किया. स्वीटी आंटी की चूत किसी ने बहुत सालों के बाद चाटी थी. और वो इस मजे को जरा भी दूर नहीं होना चाहती थी. वो झड़ने तक अपने इस नन्हे शिकार से चूत चटवाती गई. जब उसका हो गया तो उसने वासु को दूर हटा दिया चूत से. वासु ने आंटी की चूत के पानी को चाट लिया था.

अब आंटी ने वासु की पेंट की क्लिप खोली और पेंट को निचे कर दी. फिर वासु को सोफे पर बिठा के वो खुद निचे बैठ गई. पहले उसने अपनी मुठी में इस देसी लंड को पकड के हिलाया. और फिर वो लौड़े को को अपने होंठो से लगा के उसे छोटे छोटे किस करने लगी. ऐसे में वासु को बड़ी गुदगुदी सी हो रही थी. एआंटी की रेड लिपस्टिक भी उसके होंठो के ऊपर से उतर के लंड पर चिपक सी रही थी. वासु बड़ी उत्तेजना में डूबा हुआ था. तान्या के साथ भी कभी ऐसी उत्तेजना उसे नहीं मिली थी जो आज उसकी माँ के लंड को चूसने से उसे मिल रही थी.

और वैसे तो आंटी ने अभी लंड चूसा भी नहीं था. बस होंठो को लगा के प्यार ही कर रही थी. आंटी ने लंड की नाली को एकदम कस के पकड़ी हुई थी. और फिर धीरे से अपने मुहं को खोल के लंड को अंदर ले लिया. वो जिस ढंग से लंड चूस रही थी वासु को लगा की एक ही मिनिट में उसका वीर्य स्खलित हो जाएगा. इसलिए उसने आंटी का मुहं पकड़ लिया और बोला, आंटी आराम से चुसो ना!

आंटी: ओके!

और फिर वो आराम से लंड को चूसने लगी. पुरे 5 मिनिट लंड को चूसने के बाद आंटी ने उसे बहार निकाला. वासु का रंग साफ़ था और उसके गोरे लंड को आंटी ने चूस चूस के एकदम लाल कर दिया था. और उसके ऊपर बहुत सब थूंक और सलाइवा भी लगा दी थी उसने. आंटी ने अपनी चूत को ऊँगली से हिलाया और बोली, ऊपर ही आ जाऊं तुम्हारे?

वासु: हां जल्दी से चढ़ जाओ मेरी रानी.

स्वीटी आंटी ही ही कर एक हंस पड़ी. उसे अच्छा लगा जब वासु ने उसे रानी कहा. वो चूत को अपने राईट हेंड से पसर के वासु के लंड पर चढ़ गई. सेंटर मिला के वो जैसे बैठी वासु का लंड उसके छेद में घुस गया. आंटी ने अह्ह्ह्हह्ह कहा और वासु ने भी लम्बी सांस ले ली!

आंटी की चूत में लंड सांप जैसे बिल में घुसता हे वैसे घुस गया. आंटी ने सोफे के ऊपर अपना वेट बनाया हुआ था. और वो चूत मात्र के भाग को लंड के ऊपर मारने लगी. वासु ने आंटी के बड़े बूब्स अपने हाथ में पकड़ लिए. और वो भी निचे से धक्के लगाने लगा. स्वीटी आंटी की बड़ी चूचियां चूसते हुए उसे चोदने का मजा ही कुछ और था. आंटी भले ही बॉडी में मोटी हो लेकिन उसकी चूत का अभी भोसड़ा नहीं बना था. वासु के लंड के ऊपर अच्छी ग्रिप बनी हुई थी चूत की.

आंटी ने दो मिनिट के अन्दर तो अपने झटके और तीव्र कर दिए और बोली, चोदो मुझे वासु डार्लिंग, आज मेरी सब अन्तर्वासना को अपने लौड़े की गर्मी से मिटा दो.

वासु ने आंटी की गांड पर चांटा लगाया और बोला, उछल मेरी रंडी, तेरी बेटी से भी अच्छा चुद्वाती हे तू तो मेरी रंडी. गांड हिला अपनी मेरी रानी, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह ओह.

आंटी बोली, मेरी बेटी को बहुत चोदा हे तूने हरामी कहीं के. मैं अपनी बेटी के साथ भी तेरे साथ थ्रीसम करना चाहती हूँ, तू उसकी गांड मारना और मैं तब उसकी चूत चाटूंगी.

वासु: ले मादरचोद पहले इस लंड को तो संभाल छिनाल.

आंटी उछल उछल के लंड पर अपना वेट देने लगी थी अब. 2 मिनिट और उछलने के बाद आंटी की चूत का पानी चूत गया. वासु ने अब उसे सोफे पकडवा के खड़ा कर दिया. और पीछे से उसे चोदने लगा कुतिया के जैसे. इस पोस में लंड और भी अन्दर घुस रहा था. आंटी जोर जोर से अपनी गांड हिला रही थी. वासु ने करीब 2 मिनिट चोदने के बाद अपना पानी अन्दर ही छोड़ दिया. दोनों थक के चूर हो चुके थे. और नंगे ही सोफे के ऊपर लेट गए. आंटी के बूब्स मसलते हुए वासु बोला, सच में आंटी आप तान्या से भी सेक्सी हो.

आंटी बोली: वो मुझे पता हे डार्लिंग.

वासु: अब मैं तान्या को कहूँगा थ्रीसम के लिए.

आंटी: अरे बूध्धू ऐसे नहीं करते हे. कल जब तुम उसे चोद रहे होंगे तब मैं अन्दर आ जाउंगी. फिर तुम हम दोनों को साथ में चोद लेना!

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