माँ के साथ सेक्स की शरुआत

आज की ये कहानी मेरे और मेरी माँ के एक अनोखे रिश्ते की हे. जैसे ही मैं 18 का हुआ तो तो माँ ने अपनेआप को जैसे मेरे लिए खोल सा दिया था. शायद इसलिए की अब मैं लीगल एज का हो चूका था. मुझे भी उसे नंगा देख के अच्छा लगता था. अक्सर वो बाथरूम से नाहा के निकलती थी तो अपने बदन के ऊपर एक भी कपडा नहीं रखती थी. और वो मेरे आसपास एकदम फ्री माइंड में रहती थी. जब पापा काम पर होते थे, तब वो मेरे आगे ऐसे कपड़ो में घुमती थी जिस से उसके बदन का भरपूर नजारा मिले मुझे.

और कभी कभी तो मेरी हॉट माँ बिना कोई कारण के ही घर में न्यूड घुमने लगती थी. मुझे ये सब देख के बहुत ही मजा आता था. लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा था अपनी माँ के इरादों को.

कुछ हफ्तों के बाद मेरी माँ मेरे साथ और भी खुल गई. अब वो मेरे साथ सेक्स के रिलेटेड बातें भी करने लगी थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था की वो मुझे पूछ रही थी की मैं सेक्स करता हूँ या फिर वो मुझे सेक्स से बचाना और दूर रखना चाहती थी.

माँ ने मुझे पूछा की तुम हस्तमैथुन कितनी बार करते हो. और उसने अपना भी बताया की वो कितना करती हे. और पापा के साथ उसके कैसे सेक्सुअल रिलेशन थे उसके बारे में भी वो खुल के बताने लगी थी. माँ का बदन एकदम सेक्सी हे. मैं भी उसकी चूत को लेने के लिए जैसे उतावला सा हो रहा था. पता नहीं अपनी माँ के तरफ ही सेक्स के लिए आकर्षित होना सही था या गलत? लेकिन मैं माँ के बदन का दीवाना होता जा रहा था दिन बदिन.

वो घर में नंगी घुमती थी और अपने बॉडी के पार्ट्स को जानबूझ के मेरे साथ घिस देती थी. उसे ऐसे करने में मजा आता था जैसे. लेकिन मैं डरता था आगे बढ़ने में. कभी कभी हलके से ग्रोप कर लेता था लेकिन उस से ख़ास कुछ ज्यादा नहीं.

वैसे मैं दिखने में कोई हेंडसम सलमान नहीं हूँ. लेकिन मेरा लंड काफी बड़ा हे और मुझे उसके ऊपर नाज हे. वो एकदम सीधा और काफी मोटा हे. उसका सुपाड़ा चौड़ा और बड़ा हे. उसकी साइज़ भी कम से कम 7 इंच होती. और मैं चाहता था की माँ मेरे इस सेक्सी लोडे को देखे!

एक दिन पापा के ऑफिस के जाने के बाद मैं शावर लेने के लिए गया. और उस दिन मैं बाथरूम से पूरा न्यूस बहार आया मम्मी के जैसे ही. मैंने किचन में झाँका, वहां पर मेरी माँ भी नंगी ही बैठी हुई थी. मैं एकदम कुल बन के उसके सामने जाना चाहता था. लेकिन एक्साइटमेंट की वजह से मेरा लंड आधा खड़ा हो चूका था. माँ ने मुझे देख के कुछ नहीं कहा तो मुझे हिम्मत मिली.

माँ ने मेरे लंड को देखा और वो सरप्राइज हो गई. लेकिन उसने अपने चहरे के भाव को छिपाना चाहां. वो कुछ नहीं बोली. लेकिन उसकी आँखे मेरे लंड के ऊपर चिपक चुकी थी. मैंने अपने लिए एक ग्लास में ज्यूस निकाला. और माँ उठ के मेरे पास आ गई. वो मेरे बदन से घिस के चली और मेरा लंड माँ की हॉट गांड से घिस गया जो टच में एकदम सॉफ्ट थी.

माँ रुक गई और उसने एक लम्बी सांस ले के अपनी गांड के ऊपर मेरे लंड को दबा दिया. मेरा लंड एकदम कडक हो गया था. और वो उसकी गांड में जैसे घुस रहा था. वो हिली नहीं और मैंने माँ के दोनों बूब्स को अपने हाथ से नापने वाले अंदाज में दबाया.

मम्मी हलके से बोली: करना हे?

मैं: अब इतने हफ्तों से तो आप परेशान कर रही हो फिर पूछना कैसा. मैं जानता हूँ की तुम को ये चाहिए. तो चलो कर ही लेते हे.

मम्मी ने  मेरी तरफ घूम के मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया और हिलाने लगी. वो हाथ को ऊपर निचे कर के मेरे लंड को फिल कर रही थी. और फिर वो निचे बैठ गई और लंड को अपने मुहं में ले लिया. मैं तब वर्जिन था और किसी भी औरत के साथ मेरा कोई सेक्सुअल कांटेक्ट नहीं हुआ था उसके पहले. माँ एकदम सेक्सी ढंग से पुरे लंड को अपने मुहं में डाल के चूस रही थी.

मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मैंने माँ के माथे को पकड़ा और उसको लंड चूसने में मदद करने लगा. वो मोअन करने लगा और मैं उसके बूब्स को हिलाने लगा. मेरे लिए भी ये बहुत हो रहा था और मैं भी मोअन करने लगा था. माँ जानती थी की मेरा वीर्य निकलने को हे. लेकिन उसने लंड को अपने मुहं से नहीं निकाला. मुझे तो जैसे सुख की वजह से दिन में भी तारे दिख रहे थे. और मेरे लंड से ढेर सारा वीर्य निकल के माँ के मुहं को भरने लगा. मैंने आखरी पम्पिंग की और मम्मी के गले में अपने गर्म गर्म वीर्य की एक एक बूंद को निचोड़ दिया. मम्मी सब देख रही थी. लेकिन उसने लंड को मुहं से निकाला ही नहीं. वो मुझे तब तक चुस्ती रही जब तक मेरा लंड फिर से खड़ा नहीं हुआ!

फिर मम्मी ने लंड निकाल और बोली, अब मैं चाहती हूँ की तुम मुझे चोदो!

मम्मी ने खड़े हो के डाइनिंग टेबल के पास पोज बना लिया. उसकी गांड पीछे से उठी हुई थी. मैंने उसकी ट्रिम की हुई चूत को देखा. माँ ने मेरे लंड को पकड़ा और अपने कूल्हों के ऊपर घिसा भी. फिर मैंने लंड को माँ की चूत के छेद पर लगा दिया. उसकी चूत काफी गर्म थी. मैंने हलके से धक्का दिया और मेरे लंड का माथा उसके अन्दर घुसा. मम्मी ने अपने मुहं को पीछे किया और एकदम चुदासी आवाज में आह निकाली. मैंने उसकी चूत को खोला और अपने लंड को अंदर डाल दिया. मेरे लंड से माँ की चूत भर चुकी थी.

मेरे लंड को गाड़ने के बाद माँ ने मेरे चेस्ट के ऊपर हाथ रखा और मोअन किया. मैंने उसके बूब्स पकड लिए और उसकी चूत में लंड को हिलाने लगा. वो एकदम चुदासी आवाजें निकाल रही थी. और उसके सेक्सी आवाजों से मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था. और फिर से एक बार मेरे लंड की नाली में वीर्य भर गया. मुझे खराब लग रहा था की मैं फिर से उतनी जल्दी खाली होने को था. लेकिन माँ के होंठो पर स्माइल थी.

वो बोली, निकल जाने दे.

और ये कह के उसने मेरे बॉल्स को धीरे से पकड़ लिए.

मेरे मुहं से आह निकली और मेरी आँखे बंद हो गई. मेरे बच्चे माँ की चूत में प्रवाही स्वरूप में घुसे. मैंने माँ को पीछे से जकड लिया और उसके होंठो के ऊपर किस दे दी. माँ ने भी मेरे बालों में एकदम प्यार से हाथ फेरा और अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर एकदम जोर से जकड़ लिया. मैं एग्जॉस्ट हो चूका था और मैंने अपने लंड को धीरे से माँ की चूत में से बहार कर दिया. माँ ने मुझे लेटने के लिए कहा.

माँ मेरा हाथ पाकड़ के मुझे बिस्तर पर ले गई. मैं जैसे ही लेटा वो मेरे ऊपर आ गई. मेरा लंड पता नहीं अभी भी कैसे हार्ड था. और फिर अगली पांच मिनिट तक हम फिर से एक दुसरे को सेक्स का सुख देते रहे. माँ तिन बार झड़ चुकी थी. और एक बार फिर से मेरे लंड में वीर्य आ गया.

इस बार माँ ने अन्दर नहीं निकलवाया मेरे वीर्य को. उसने फट से चूत से लोडा निकाला और मेरे लंड को जोर जोर से मुठ मारने लगी. मेरा सब वीर्य मेरे पेट के ऊपर निकल गया.

माँ को मेरे वीर्य का फव्वारा देख के बहुत अच्छा लगा. हम दोनों ही थक चुके थे. माँ मेरे शोल्डर पर ही सो गई और हम दोनों ने कुछ देर रिलेसक्स किया. मैंने माँ के पुरे बदन को अपने हाथ से छुआ और उसकी चूत को भी. माँ की चूत एकदम गीली और गर्म थी.

अगले कुछ घंटो तक मैंने और मेरी माँ ने 3 बार और सेक्स किया. पापा के आने से पहले पहले हम दोनों ने खड़े खड़े, लेटे हुए और किचन के प्लेटफोर के ऊपर चढ़ के भी सेक्स किया. माँ के साथ सेक्स करने का जो मजा पहली बार आया था वो मजा फिर कभी नहीं आया. आज भी माँ और मेरे बिच में सेक्सुअल रिलेशन हे. एक बार तो वो मेरा बच्चा भी गिरवा चुकी हे!