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भाभी ने अचारवाले का लंड लिया

दोस्तों मेरा नाम अभिमन्यू शर्मा है और मैं लखनउ का रहने वाला हु. मुझे छोटी उम्र से ही लंड हिलाने की आदत लग गई थी. इसलिए मेरा लंड 4 इंच का ही रह गया हे. इसलिए मैं चोदने के सपने तो बहुत देखता हूँ लेकिन किसी के साथ चुदाई करने की हिम्मत नहीं हुई अब तक. वैसे मेरे घर में मेरे बड़े भाई की वाइफ यानी की मेरी भाभी रूपा है जिसे देख के मेरा बहुत खड़ा होता है. भाभी है भी बिंदास्त लेकिन मैं अपनी जिल्लत नही करवाना चाहता. इसलिए उसे देख के हिला लेता हूँ बस.

मुझे पता है की भाभी सामने से मुझे फुदक फुदक के चूत देना चाहती हैं. पर अपनी भी मज़बूरी हैं इसलिए क्या करें. मैं खुद को कोसता हूँ पर कुछ कर नहीं सकता. भाभी ने फिर मुझसे कम बात करना शरु किया और वो ताने भी देती रहती हैं.

और उन्ही दिनों में भाभी का एक अफेयर ऐसा हुआ की जिसका किसी को अंदाजा भी नहीं था क्यूंकि मैं 12वी में फेल हुआ था और घर पर ही रहता था पढ़ाई के लिए इसलिए मुझे पता चल गया. और वो अफेयर भाभी का किसी और के साथ नहीं लेकिन एक अचार की फेरीवाले के साथ था.

जी हाँ यहाँ हमारे उधर अक्सर दोपहर को अचारवाले, पापड़ वाले, फ्रूट वाले, सब्जी वाले आते रहते हैं. ऐसा ही एक अचारवाला पिछले कुछ महीनो से आता था. मैंने देखा की वो साला बिहारी भैया कुछ ज्यादा ही आने लगा था सोसायटी में. और भाभी भी अक्सर कटोरी ले के निकल पड़ती थी अचार लेने के लिए.

मुझे पक्का डाउट था अपनी रंडी भाभी के ऊपर. मेरे आगे चूत नहीं गली इसलिए शायद वो उसका लंड लेती थी. मैं अपनी भाभी को उस भैये का लंड लेता देखना चाहता था. मैंने उसके ऊपर वाच रखी. लेकिन मुझे लगा की शायद वो मेरे घर होने की वजह से घर में नहीं घुसता था. हां भाभी अपने डीप कट के ब्लाउज के साथ उसे अपनी गली खूब दिखाती थी. और वो भी काफी बातें करता था भाभी के साथ.

मैंने सोचा की साला उन्हें देखना हैं तो घर से दूर निकलना पड़ेगा. और अगली बार जब मैंने ऊपर की खिड़की से उस अचार वाले की आवाज सुनी, “अचार ले लो, मसालेदार” तो मैं निचे आया. भाभी और मैं ही थे घर में. मुझे देख के भाभी ने कहा, कहाँ जा रहे हो?

मैंने कहा मैं दोस्त विनोद के घर जा रहा हूँ.

वो बोली ठीक हैं.

लेकिन मैं विनोद के घर नहीं गया था. मेन गेट के पास ऊपर के कमरे में जाने का एक और रास्ता था. भाभी की नजरें बचा के मैं ऊपर चढ़ गया. वहां एक खिड़की के पास मैं छिप के देखने लगा. अचार वाला घर के पास आया. भाभी कटोरी ले के आ गई. और उसने आज फिर से अपनी गली अचारवाले भैये को दिखाई. वो साला एकदम नजरें चिपका के भाभी के बूब्स को ही देख रहा था. भाभी ने अचार लिया और उसने पूछा, क्या हुआ?

भाभी ने कहा, क्या होना था?

वो इधर उधर देख के बोला, अकेली हो क्या?

भाभी ने कहा, हां अकेली तो हूँ पर काम क्या हैं?

वो बोला, अरे यार अब इतनी भी क्या बेरुखी.

भाभी बोली, चाटोगे तो बोलो?

वो बोला, हां चाटूंगा, बस!

भाभी ने इशारे से उसे अन्दर बुला लिया.

अचार वाले ने अपना झोला सीडियों के पास रखा और वो भाभी के पीछे पीछे आ गया. भाभी ने कटोरी को साइड में रख दी. और उसने अपनी पेटीकोट को उसके सामने उठा दिया. भाभी ने अन्दर पेंटी नहीं पहनी थी सीधे ही भाभी की हेयरी यानी की बालवाली चूत सामने आ गई. अचारवाले ने अपना मुहं भाभी के बुर के ऊपर लगा दिया. और वो अपनी जबान को भाभी के बुर पर घिस के चाटने लगा.

मेरी भाभी की झांट को वो अपने हाथ से फैला के अंदर बुर की लाली को देख के उसे चाटने लगा था. और पतलून के ऊपर से ही वो अपने लौड़े को भी दबा रहा था. भाभी ने अपने ब्लाउज के बटन खोले और वो अपने बूब्स को खुद मर्दन करने लगी थी. भाभी ने अपनी चूचियां बहार निकाल दी और वो निपल्स को पिंच करते हुए कराह रही थी. भाभी की चूत को अचारवाला कुत्ते के जैसे चाट रहा था. भाभी की इस अवस्था को देख क मेरे छोटे से लंड में भी पूरी ताकत आ गई थी. मैंने वही खड़े हुए लंड को पकड़ा और उसे हिलाने लगा.

अचारवाले ने कुछ देर तक भाभी की झांटदार बुर को चाटी. और फीर वो बोला, चलो अब पेलता हूँ.

मेरी भाभी नीलम उसके सामने लेट गई. वो बोला ऐसे नहीं उलटी हो जाओ. भाभी उलटी हुई तो उसने साडी को और बाकी के कपड़ो को हटा दिया. भाभी की गोरी गांड उसके सामने थी. उसने अपने लंड को थूंक लगा के हिलाया. और फिर भाभी की गांड को साइड में कर के पीछे से चूत में डाल दिया. और वो खुद पूरा के पूरा भाभी के ऊपर चढ़ गया और अपनी गांड को हिलाने लगा.

भाभी इ एक आह निकाली जिस से पुष्टि हुई की उसके अन्दर लंड घुसा था. अचारवाला भैया अब भाभी के कंधो को पकड के उसे चोदने लगा था. भाभी के मुहं से अह्ह्ह अह्ह्ह उह अह्ह्ह जल्दी करो, जल्दी चोदो कोई आ ना जाए.

अरे अभी तो घुसाया हे मैंने, भाभी की जल्दबाजी से वो थोडा गुस्सा होने लगा था.

एक मिनिट उसने हौले हौले से भाभी को चोदा, और फिर उसने गति पकड ली. भाभी भी जोर जोर से अह्ह्ह अहह कर रही थी. और वो खुद भी आगे पीछे करने में लगी थी अपनी गांड को. अब अचारवाले ने भाभी को गांड के पास से ऊपर कर दिया. और वो डौगी वाले पोस में भाभी की चूत ले रहा था. भाभी को कूल्हों से पकड के वो आगे पीछे कर रहा था. और इस गति से उसका पेनिस भाभी की चूत में अन्दर बहार हो रहा था.

और फिर वो एकदम से ऊपर आ गया जैसे, कुछ देर पहले वो आगे पीछे की डौगी कर रहा था. लेकिन अब वो इतना ऊपर था की निचे ऊपर हो के भाभी को ले रहा था.

भाभी की साँसे और भी तेज हो गई. साडी वगेरह उतारा नहीं था सिर्फ हटाया था इसलिए इस पोस में मुझे उतना दिख नहीं रहा था. लेकिन मैं देख सकता था की भाभी जबरदस्त हिल रही थी लंड लेने के लिए!

अचारवाला भी जबरदस्त चोदु लग रहा था. मेरा तो पानी कब से चूत गया था. लेकिन वो अभी भी भाभी को जोर जोर से पेल रहा था.

भाभी ने और पांच मिनिट चुदवाया और बोली, देखो अन्दर मत निकालना ठीक हैं.

वो बोला, कभी तो अन्दर निकालने दो.

भाभी बोली, छी, मुझे अपने बच्चे तुम्हारे जैसे नहीं चाहिए.

ये सुन के अचारवाले को गुस्सा तो बहुत आया लेकिन वो कुछ बोला नहीं. लेकिन उसके चोदने की स्पीड बहुत बढ़ गई थी. और फिर उसने अंदर ही माल छोड़ा तो भाभी झटके से उठ गई.

वो बोली, साले हरामी बोला था न की अन्दर मत छोड़ना.

अचारवाले ने लौड़े को साफ़ करते हुए कहा, एकदम से निकल गया इसलिए पता नही चला.

लेकिन उसके होंठो के ऊपर की शैतानी हंसी कुछ और ही कह रही थी!

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