भाभी ने चुदाई का ज्ञान दिया

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दोस्तों मेरा नाम रचित सोनी हे और मैं अहमदाबाद में रहता हूँ. मैं आज आप को अपनी लाईफ की एक आपबीती बताने जा रहा हूँ, जिसकी शरुआत आज से दो साल पहले हुई. तब मैं 12वी में पढ़ता था. और हमारी बगल के घर में एक नया मेरिड कपल रहने के लिए आया था. उनकी नयी नयी शादी हुई थी और शादी के 2-3 महीने के बाद ही वो यहाँ रहने के लिए आ गए थे. जब मैंने इस नवेली भाभी जी को देखा तो मेरे होश ही उड़ गए. वो एक सुंदर परी ही थी! और उसका रंग दूध के जैसा गोरा था. फुटबाल के जैसे बूब्स को जब वो हिला के चलती थी तो लंड अपनेआप खड़ा हो जाता था!

मैं पहले दिन जब उसे देखा तभी से उसे चोदने के लिए मेरा मन कर रहा था. और मैं उसके साथ बातचीत करने के मौके तलाश रहा था. जब कुछ दिनों में थोड़ी सी मेल जोल हुई मेरी उसके साथ तो पता चला की उसके पति की नाईट ड्यूटी रहती हे. और वो रात को अपने घर में अकेली ही रहती थी. मैंने सोचा की इसको रात में मिला जाए तो काम हो सकता हे. और सब से सरल रास्ता था कुछ चीज मांगने के बहाने उसके घर का दरवाजा ठोका जाए!

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मैंने बहुत सोचा और फिर एक आइडिया आया मेरे दिमाग में. मैं भाभी के दरवाजे को मार के खड़ा हुआ. वो आई और उसने दरवाजा खोला और बोली, क्या हुआ रचित?

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मैंने कहा, भाभी एक काम करो ना आप के लेंडलाइन से एक कॉल करनी हे मुझे. मेरे मोबाइल की बेलेंस हे लेकिन वो 1800 सीरिज का नम्बर हे और कॉल लग नहीं रही हे मेरी. भाभी ने कहा आ जाओ.

उसने मुझे अपने फोन दिखाया और उसके ऊपर रुमाल ढंका था वो लेते हुए वो बोली, तुम कॉल करो मैं चाय ले के आई.

भाभी जी ने वो टाइम पर एक कोफ़ी रंग की नाईटी पहनी थी और उसके अन्दर उसके बूब्स जैसे मारने की हद तक सेक्सी लग रहे थे. मेरी आँखे उसको देख के खुली की खुली रह गई थी. मैं कॉल के ऊपर बात ही कर रहा था और वो मेरे लिए चाय ले के आई. मैंने पेपाल इंडिया में कॉल किया था और दिमाग खपा रहा था उनका! भाभी ने जब चाय को रखने के लिए अपन बॉडी को मोड़ा तो उसके सेक्सी बूब्स मुझे दिखे. और उन्हें देख कर मेरी बेचेनी और भी बढ़ सी गई. वो मेरे सामने ही सोफे के ऊपर आ बैठी. मैं मन ही मन सोच रहा था की कहाँ से बात चालू करूँ भाभी के साथ!

वो बोली, मैं बिस्किट ले के आती हूँ. ये कह के वो उठी और नाइटी के अन्दर फंसी हुई उसकी गांड को देख के मन में ना जाने कैसे कैसे विचार आने लगे थे. मेरा लंड अब एकदम बेकाबू हो चूका था!

वो गई तभी से मैं अपने लंड को सहला रहा था. और जब वो वापस आती लगी तो मैंने बंद कर दिया. मेरा लंड पूरा तन के सलामी दे रहा था! भाभी ने जब बिस्किट की प्लेट को रखी तो उसकी नजर मेरे लोड़े के अन्दर आये हुए उभार के ऊपर पड़ी. और वो खुद को हंसने से रोक नहीं सकी. मेरी सांस भी एकदम तेज थी तो भाभी को अंदेशा हो गया था!

मैंने बात चालु की उसका ध्यान हटाने के लिए और उस से कहा भाभी आप इस कोफ़ी नाइटी में बिलकुल ही अलग दिखती हो. उसने कहा कैसी अलग?

मैंने कहा एकदम खुबसुरत!

वो हंस पड़ी और बोली, थेंक्स.

और फी हम दोनों के बिच में बातचीत चालू हुई. बात करते हुए मैं घडी की तरफ देखा तो पौने 11 हो चुके थे. मैंने कहा, चलिए भाभी बहुत लेट हो गया अब मैं निकलता हूँ.

भाभी बोली, अरे रुक जाओ कुछ देर और, मैं अकेली बोर हो रही हूँ वैसे ही.

मैंने कहा, भाभी कल मेरी इंटरनल एग्जाम हे इसलिए पढना हे. फिजिकल एजुकेशन की एग्जाम हे.

भाभी ने कहा, अरे मैं पढ़ा देती हूँ तुझे.

वो बोली, बोल कौन कौन से प्रश्न होते हे उसके अन्दर.

मैंने कहा, ओके, पहले ये बताओ की औरतों को माहवारी यानी की मासिक कितने अंतराल के बाद आती हे.

भाभी बोली: 20 से ले के 30 दिन के बिच में कभी भी आती हे. ये हर औरत के लिए अलग अलग होता हे, किसी को 20 दिन में तो किसी को पुरे 30 दिन के बाद आती हे.

भाभी फटाफट बोल गई और मुझे थोड़ी शर्म सी आ गई.

भाभी ने मुझे देखा और बोली, अरे शरमाओ नहीं और घबराओ भी नहीं, जो मन में हे वो पूछ लो.

मैं बोला, औरतों को योनी के ऊपर के बाल कितनी उम्र में आते हे? और संभोग के अन्दर क्या करने से औरत सब से ज्यादा आनंद पाती हे?

भाभी ने हंस के कहा, भला हमारे वक्त में तो ऐसे प्रश्न कभी नहीं आते थे एक्साम्स में? लेकिन मैं पीछे नहीं हटनेवाली.

मैं समझ गया की भाभी जान गई थी की मेरे मन में क्या हे. और फिर भाभी ने कहा, चलो मैं तुम्हे अपने कमरे में अच्छी तरह से सब पढ़ाती हूँ. और वो मेरे हाथ को अपने हाथ में ले के मुझे बेडरूम में ले गई अपने.

फिर वो बोली: लड़की की योनी के ऊपर बाल 12 से 14 साल की उम्र में आते हे.

फिर मैंने कहा: और उसके अंदर एक और प्रश्न भी था.

भाभी बोली: वो तो मैं प्रेक्टिकल कर के दे सकतीं हूँ जवाब.

मैंने कहा, कैसा प्रेक्टिकल भाभी?

भाभी बोली: इस सवाल के जवाब के लिए मैं तुम्हे कुछ दिखाना चाहती हूँ.

मैंने कहा, दिखा दीजिये फिर.

भाभी हंस के बोली: डर तो नहीं लगेंगा ना तुम को?

मैंने कहा: अब पढाई कितनी भी हार्ड हो उस से डरते थोड़ी हे!

भाभी ने अपने दोनों हाथ से नाइटी को ऊपर कर दिया. अंदर उसने ट्रांसपेरेंट ब्रा और पेंटी पहनी हुई थी. मैंने कहा भाभी ये क्या रही हे आप? भाभी ने कहा, सवाल का जवाब दे रही हूँ!

मेरा लंड एकदम कडक हो गया था भाभी को ऐसे देख के. भाभी ने मुझे अपने पास बुलाया और अपनी ब्रा और पेंटी खोलने के लिए कहा. मैंने एक ही मिनिट में दोनों को उसके बदन से दूर कर दिया. भाभी की सेक्सी चूत को देख के मेरे लंड के अन्दर आग के शोले भड़क उठे थे. भाभी ने भी पेंट में कडक हुए मेरे लोडे को देख लिया था. मैं एकदम सपने में था जैसे!

भाभी ने कहा, अब क्यूँ सांप सूंघ गया भाई. कुछ देर पहले तो मेरे कूल्हों को देख के अपने लंड को मसल रहे थे! अब लंड में जंग लग गया क्या?

मैं समझ गया की मैं लंड को सहला रहा था वो उसने देखा था. और फिर भाभी ने अपने हाथ को मेरे पेंट के ऊपर लंड वाले हिस्से में रख दिया और उसके साथ खेलने लगी वो. मेरे बदन के अंदर अन्तर्वासना का एक असीम तूफ़ान उमड़ पड़ा था. भाभी ने मेरी पेंट की चेन को खोली और लंड को बहार निकाला. मुठ्ठी में लंड को पकड के वो बोली, बड़ा हे!

फिर उसने लंड के सुपाडे के ऊपर पहले धीरे से चुम्मा दिया. मेरी आह निकल पड़ी. और फिर तो इस चुदासी भाभी ने अपने मुहं को खोल के लंड को पूरा अन्दर ले लिया और सक करने लगी. मेरे हाथ को उसने अपने बूब्स के ऊपर रखवा दिए और बोली, दबाओ इन्हें.

मैंने भाभी के दोनों बूब्स को दबाने चालू कर दिए. वो भी एकदम चुदासी आवाजें निकाल के मेरे लंड को गले तक भर के चूस रही थी. फिर भाभी ने मेरे लोडे को मुहं से निकाला और वो बिस्तर में लेट गई. भाभी ने कहा मेरी योनी को खोलो.

मैंने अपने दोनों हाथ को भाभी की चूत की फांको के ऊपर रख दिए. और उन्हें खोल दिया. भाभी ने कहा अब तुम्हारे सवाल का जवाब देती हूँ.

उसने कहा: जब आदमी का पेनिस इस योनी की इस दाने के ऊपर घर्षण होता हे तो औरत को चरम सुख प्राप्त होता हे.

मैंने कहा, भाभी क्या आप को अभी उस चरम सुख का अनुभव करना हे?

भाभी ने कहा, तुझे क्या लगता हे तुझे पढ़ाने के लिए मैं अपनी चूत को खोला हे? चल जल्दी से अपने लंड को उसके अंदर डाल के चोद ले मुझे.

ये कह के भाभी ने अपनी दोनों टांगो को पूरा खोला और बोली, चल आ जा चढ़ जा मेरे ऊपर.

भाभी ये कहते हुए अपनी चूत के दाने को अपनी उँगलियों से मसल रही थी. और मुझे इशारे से उसने अपने ऊपर चढ़ा दिया. मेरे लिए ये चोदने का पहला मौका था. भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ में ले के अपनी चूत के दाने पर रखा और फिर बोली, मार दे धक्का अंदर.

मैंने जैसे ही एक धक्का दिया तो मेरा लंड उसकी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया. भाभी की आह निकल पड़ी. और वो बोली, अरे हरामी साले आराम से चोद ना, वो चमड़ी हे लोहा नहीं. चूत को फाड़ डालनी हे क्या!

मैंने कहा, हां साली छिनाल आज तो तेरी चूत को फाड़ ही देनी हे मुझे, कितने दिनों से लंड खड़ा कर रखा हे तूने!

भाभी मेरे से लिपट पड़ी और बोली, चोद ले फिर.

मैं जोर जोर से अपने लंड के धक्के देने लगा भाभी की चूत के अन्दर. और वो भी अपनी गांड को हिला हिला के चुदने लगी थी. मेरा लंड पूरा अन्दर घुस के बहार आता था और उसके मुहं से जोर से आह निकल पड़ती थी. फिर वो मेरे लोडे को कस कस के अपनी चूत में दबा देती थी चूत के मसल टाईट कर के.

कुछ देर में मैंने भाभी को कहा, चलो अब डौगी स्टाइल में करते हे.

भाभी खड़ी हो के कुतिया बन गई मेरे सामने. मैंने उसके बूब्स को दबाये और पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाला.

10 मिनिट और चोदने के बाद मेरा पानी उसकी चूत में खाली ओह गया. वो भी झड़ गई मेरे साथ में ही. वो चूत को दबा के सब पानी को अंदर ले बैठी.

फिर मैं खड़े हो के कपडे पहनने लगा तो वो बोली, शाम को 7 बजे के बाद मैं अकेली होती हूँ. जब मर्जी हो चले आना.

मैंने कहा, अब तो मैं आप के पास रोज पढने के लिए आऊंगा. आप प्रेक्टिकल कर के सही ज्ञान देती हे!

 

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