भैया के दोस्त मनोज ने फाड़ी मेरी नादान चूत

मेरा नाम अपर्णा शुक्ला है। मेरा घर मुम्बई में हीरा नगर में है। मैं देखने में बहुत ही खूबसूरत और लाजबाब माल लगती हूँ। मेरे को बहुत कमेंट मिलती है। मैं जब भी स्कूटी लेकर घर से बाहर की तरफ निकलती हूँ। सारे लड़के मेरे को देखकर कोई रंडी तो कोई आवारा और भी बहुत सारे नामो से पुकारते हैं। मेरे को ये सुनकर बड़ा मजा आता है। मै भी अपनी चूत बांटती फिरती हूँ। मेरे को सेक्स करने में बहुत मजा आता है। मै आपको अपनी पहली बार की चुदाई की पूरी कहानी सुनाने जा रही हूँ। ये मेरी चुदाई की सच्ची घटना है। मेरे दिल में बहोत लिखने की चाहत थी। हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम  बात 3 साल पुरानी है। उस समय मेरी उम्र 23 साल की थी। मेरा 34 28 36 का बहोत ही बॉम्ब फिगर था। मैं बचपन से ही काफी हेल्थी थी। उस चढ़ती जवानी में मुझे चुदने की बहुत तड़प हो रही थी। मेरे को पहली बार चुदवाने में बहुत डर लग रहा था। मेरी सारी फ्रेंड्स बताती थी की पहली बार में बहोत दर्द होता है। चूत से खून निकलता था। इसी डर से मै 23 साल की होने के बाद भी अभी तक पूरी तरह से कुवारी थी। मेरी तड़प बढ़ती ही जा रही थी। मैं सम्भोग करने के लिए किसी मर्द की तलाश करने लगी। मेरे को एक लड़का मिल ही गया। वो देखने में कुछ खास अच्छा नहीं था। शरीर से एक दम ढीला ढाला था। कोई लड़की उसे लाइन ही नहीं देती थी। उसका नाम मनोज था। वो मेरे भाई का फ्रेंड था। अक्सर मेरे घर आता जाता रहता था। मेरी भी फ्रेंडशिप हो गयी। मनोज भी किसी लड़की की चूत के लिए तडप रहा था।

मेरे से उसने कई बार किसी लड़की को पटवाने के लिए कह चुका था। मै भी सोचने लगी। क्यूँ ना इस लड़के से ही आराम से अपने ही घर में चुदवा लू। मेरे को उसका शरीर देख कर लगा की इसका लंड भी छोटा सा होगा। मैंने उसे लाइन देना शुरू कर दिया। उसके पास जाकर उसके जांघ पर अपना हाथ रख देती थी। मनोज को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरे को दीदी कहता था। वो मेरे साथ कुछ करने से डरता था। कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा। उसे मैं अपनी स्कर्ट उठा कर कभी कभी अपनी जांघो का दर्शन करा देती थी। मैंने उसे अपनी तरफ आकर्षित कर लिया।

जब भी मैं कहती थी वो तुरंत हाजिर हो जाता था। मेरे चुदने का समय आ गया। जब मेरे मामा के लड़के की शादी थी। नवम्बर का महीना था। हल्की हल्की ठंडी हो रही थी। मम्मी और मेरा भाई मामा के यहां गए हुए थे। वो लोग 4 दिन पहले ही चले गए। पापा ने मेरे को अपने साथ चलने को कहा था। इसीलिए मै घर पर ही थी। मेरे को अकेले में रहना बिल्कुल ही पसन्द नहीं था। घर के सब लोग मनोज को जानते ही थे। मेरे दिमाग में आईडिया आया। क्यों न मनोज को ही बुला लू।
मैंने मनोज को फ़ोन करके अपने घर पर बुला लिया।

मनोज मेरे से पहले जैसी बातें करता रहा। मेरे को आज कुछ सेक्सी बाते करनी थी। मैंने पोर्न स्टारों के बारे में चर्चा छेड़ दी। अब जाकर कुछ माहौल गरमाने लगा। वो भी बहुत कुछ बाते बोलने लगा। मैं उसके सामने बैठी हुई थी। उस दिन घाँघरा और टी शर्ट पहना हुआ था। मैं पेटीकोट की तरह अपना घाँघरा धीरे धीरे ऊपर उठाने लगी। मनोज अपना सर नीचे झुकाये बैठा रहा। मेरे से शरमा रहा था।

मै: मनोज तुम मेरे से शरमा क्यो रहे हो?? मै तो तुम्हारी फ्रेंड हूँ।
मनोज: क्या बताऊँ दीदी मेरी कोई गर्लफ्रेंड ही नहीं है। आपसे कितनी बार कहा है। लेकिन आप ने कभी मेरे लिए कोई लड़की ढूंढी ही नहीं।
मै: लडकिया कोई बाजार में बिकती थोड़ी नही हैं जो मैं तुम्हारे लिए ले आऊं!
मनोज: कोई बात नहीं। मेरी ही गलती है। मै किसी लड़की को ज्यादा देर तक देख ही नहीं पाता हूँ। मेरे को डर लगने लगता है।

मैं: चलो आज मैं तुम्हारा सारा डर दूर कर देती हूँ। बस तेरे को मेरी तरफ देखना है। मै कुछ भी करूँ तू मेरे को देखते रहना।
मै उसके करीब जाकर तीन शीट वाली सोफे पर बैठ गयी। मैंने उसे छूते हुए चुदाई का माहौल बनाना शुरू किया। मेरे को वो एकटक देख रहा था। मैं अपना हाथ उसके ऊपर रख कर फेरने लगी। वो जोश में आने लगा। मेरे को फॉर्मूला सक्सेस होता दिखाई दे रहा था। मैंने एक एक करके उसके शर्ट के बटन खोलनी शुरू कर दी। वो मेरे को हवस की नजरों देखते हुए कहने लगा।

मनोज: दीदी मेरे को बड़ी अजीब अजीब फीलिंग आ रही है।
मै: मनोज तुम आज मेरे को दीदी न कहो। मेरे को अपनी गर्लफ्रेंड समझकर सब कुछ करो।
मनोज: दीदी! डर लग रहा है। आपके साथ ऐसा करते हुए
मै: शर्म की क्या बात है। तुम मेरे बॉयफ़्रेंड हो मै तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूँ। तुम जो अपने गर्लफ्रेंड के साथ करना चाहो करो। नहीं तो तुम्हारा डर ऐसे ही बना रहेगा।

वो मेरी बात को मान गया। उसने मेरे को अपने करीब लाकर खुद से चिपका लिया। मेरे पीठ पर हाथ घुमाते हुए मेरी आँखों में आँखे डालकर बात करने लगा। उसकी आँखों में मेरे को हवस की झलक नजर आ रही थी। मनोज मेरे होंठो पर अपनी अंगुलियों को घुमाते हुए मेरे गले तक अपनी अंगुलियां ले जा रहा था। रोमांटिक माहौल बन चुका था। मेरे होंठ से अपने होठ को सटा कर किस से शुरुवात की। मेरे होंठ को चूसने में लीन हो गया। दोनों होंठो को एक साथ चूसते हुए मेरे को गर्म कर रहा था। मैं इसे कस कर अपनी बूब्स से दबा रही थी। हम दोनो ने एक दुसरे को कस कर जकड लिया था। मेरे मुह के अंदर अपनी जीभ डालकर मेरी जीभ तक को वो चूसने लगा।

मै भी उसका साथ दे रही थी। मेरी गरमी बढ़ती ही जा रही थी। मेरी साँसे गर्म होकर निकलने लगी। दिल की धड़कन बढ़ती ही जा रही थी। होंठ चुसाई का सिलसिला लगभग 15 मिनट तक चला। मेरी सांसे फूलने लगी। मैंने मनोज को अलग किया। पहली बार मैं ये सब कर रही थी। वो भी अभी इस खेल में अनाड़ी था। मेरे को भी इस बारे में ज्यादा कुछ नॉलेज नही था। मैंने अपनी टी शर्ट निकाल कर उस अपने बड़े बड़े बूब्स का दर्शन कराया।

मनोज: दीदी आपका बूब्स तो आंटी से भी बड़ा है।
मै: पीकर तो देखो और भी मजा आएगा।

मनोज मेरी ब्रा को खोलकर निकाल दिया। मेरे काले रंग के निप्पल पर उसने अपने काले रंग का उसका होंठ लगा दिया। बहोत ही जबरदस्त कंम्बिनेशन लग रहा था। मेरे दूध को दबा दबा कर पी रहा था। मेरी निप्पल को दांतों से काट काट कर पीते हुए मेरी सिसकारियां निकलवा रहा था। वो जोर जोर से “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की सिसकारियां भर रही थी। मेरे दूध को वो नींबुओं की तरह निचोड़ते हुए पी रहा था। मेरे को बहोत मजा आ रहा था। लगभग 10 मिनट तक उसने दूध पीकर आनंद लिया।

अब उसकी बारी थी। मैंने उसका पैंट खोला और उसका 4 इंच का सिकुड़ा छोटा लंड निकाला। काला काला उसका लंड बहोत ही भद्दा लग रहा था। उसने मेरे को चूसने को कहा। मैंने हिचकिचाते हुए उसके लंड पर धीरे से अपना जीभ लगा थी। थोड़ा सा पानी जैसा कुछ उसके लंड पर लगा हुआ था। मैंने उसे अपनी ब्रा में पोछकर चूसने लगी। मनोज ने अपना पूरा लंड मेरी मुह में रख दिया। उसका छोटा सा लंड मेरी मुह में आसानी से फिट हो गया। 2 मिनट में मेरे को लगा की मेरा मुह फटने वाला है। उसके लंड ने अपना आकार बढ़ा लिया था। मेरा पूरा मुह उसके लंड से भरा हुआ था। मेरे गले तक उसका लंड घुस गया। मेरा दम घुटने लगा। आँखे जैसे बाहर निकलने वाली हो गयी। हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम 

मैंने मनोज के गांड पर मार मार कर किसी तरह उसके लंड से छुटकारा पाया। उसके बाद उसका लंड हिला हिला कर चूसने लगी। कुछ देर बाद उसने मेरा घाँघरा नीचे सरकाते हुए निकाल दिया। मै अब सिर्फ पैंटी में थी। मेरे को उसने सोफे पर बिठाकर खुद नीचे बैठ गया। मेरी चूत के दर्शन के लिये उसने मेरी पैंटी निकाल दी। मेरी टांगो को फैलाकर मेरी चूत के दर्शन किया। उसने अपना मुह लगाकर मेरी चूत की चटाई शुरू कर दी। मेरी चूत से निकला थोड़ा बहोत माल उसने चाट चाट कर साफ़ कर दिया। मै जोर जोर से “……अई… अई….अई……अई….इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की चीख निकालने लगीं। मनोज अपनी जीभ मेरी चूत में घुसाने लगा। मै बहोत ही उत्तेजित हो गयी। हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम 
मै: सी.. सी…और न तड़पाओ मेरे राजा अब तुम अपना लंड मेरी चूत में डाल दो!!
मनोज: तू मेरी गर्लफ्रेंड बनी है आज। तेरे को तो मैं बहुत पहले से ही चोदना चाहता था। तुझे तो मैं खूब तड़पा कर ही चोदूंगा।

इतना कहकर वो और जोर जोर से मेरी चूत चाटने लगा। उसके जीभ की रगड़ से मेरी चूत ने अपना पानी निकाल दिया। उसने सारा माल पीकर मेरी गीली चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा। मेरे को उसके लंड की रगड़ बर्दाश्त नहीं हो रही थी। मैंने अपने हाथों से उसका लंड पकड़कर अपनी चूत के छेद पर लगा दिया। उसने जोर का घक्का मारा। उसका टोपा ही अंदर घुसवा था। मेरी “……मम् मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ …. ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की चीख निकल गयी। मेरी चूत अंदर से काफी गीली थी। उसने अपना लंड धीरे धीरे करके पूरा अंदर घुसा दिया। मेरी चूत का बहुत बुरा हाल हो गया।

मेरी सील पहले से ही टूटी थी। दर्द तो बहोत हुआ लेकिन खून नहीं निकला। मेरे चूत में अपना लंड घुसाये ऊपर नीचे होकर चुदाई कर रहा था। मेरी चूत में उसका लंड पूरा घुसकर चुदाई कर रहा था। मैं भी मजे ले ले कर चुदवा रही थी। वो जोर जोर से अपना लंड मेरी चूत फाडने लगा। मै अपनी अंगुलियों से चूत को मसलते हुए मसाज के साथ चुदवा रही थी। मेरी चूत बहुत ही गर्म हो चुकी थी। उसका टाइट लंड मेरे को बहुत दर्द दे रहा था। मै भी “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज के साथ चुद रही थी। चुदाई में इतना आनंद मिलता है। मेरे को आज पता चल रहा था। मनोज भी अपनी कमर मटका मटका कर हिलाते हुए मेरी चूत चुदाई कर रहा था। एक ही पोजीशन में मेरे को उसने 20 मिनट तक चोदा। वो थक कर धीरे धीरे चोदने लगा।

मनोज कुछ देर तक मेरे को किस किया। उसने थोड़ा रिलैक्स करके फिर से चोदने का मूड बना लिया। मेरे को सोफे पर ही कुतिया बना कर खड़ा होकर चोदने की पोजीशन बना दी। कुत्ते की तरह अपना लंड हिलाते हुए मेरी चूत में अपना लंड रगड़ कर घुसाने लगा। पूरा लंड घुसाकर मेरी चूत चोदने लगा। इस बार की चुदाई बहोत तेजी से करने लगा। पूरा कमरा मेरी चीख से भरा हुआ था। मैं भी जोर जोर से “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की आवाज निकाल कर चुदने लगी। मेरी चूत का उसने भरता बना डाला। मेरी टाइट चूत ढीली हो गयी। मेरे उसका मोटा लंड खाने में बहुत मजा आने लगा हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम 

हच… हच करके मेरी चूत को उसने मेरी चूत का कचरा कर दिया। मेरी चूत उसके लंड की रगड़ ज्यादा देर तक बर्दाश्त न कर सकी। बार बार झड़ कर मेरी चूत गीली हो गयी। वो भी अपनी गाड़ी उस गीली चूत में ही चलाये रहा। मै बहुत ही थक गयी थी। मै “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की आवाज के साथ चुद रही थी। मनोज भी ज्यादा देर नहीं टिक सका। वो भी झड़ने वाला हो गया। मेरी चूत से अपना लंड निकाल कर चूत के ऊपर सारा माल गिरा दिया। मेरी चूत सफेद हो गयी। सारा माल नीचे गिरने लगा। मैंने साफ़ कपडे से सब साफ़ करके बॉथ रूम में जाकर नहाया। उसके बाद चार पांच दिन तो हमने रोज चुदाई की। बाद में भी मौक़ा मिलते ही कई बार चुदाई की। अब तो मैं किसी से चुदवा लेती हूँ। मेरी चुदाई की डर ख़त्म हो गयी। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज Hindipornstories.com पर पढ़ते रहना. आप स्टोरी को शेयर भी करना.