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दीप्ती भाभी ने डिनर पर बुला के लंड लिया

फ्रेंड्स मैं आप का दोस्त प्रवीन आज आप के लिए अपने दोस्त की बीवी को चोदने की कहानी शेयर करने के लिए आया हूँ. मैं राजस्थान के जयपुर में रहता हूँ. और दिखने में मैं बड़ा सेक्सी और आकर्षक हूँ. और मैं लड़कियों के साथ जल्दी ही घुल मिल भी जाता हूँ.

ये कहानी में जो कपल हे उनके नाम संदीप और दीप्ती हैं. दीप्ती एक सेक्सी लुक्स वाली और एकदम कुल दिखने वाली गृहिणी हैं. लेकिन वो चुदाई में अपने पति से संतुष्ट नहीं हो पाती थी. संदीप एक वर्काहोलिक आदमी था जो दिनभर अपने काम में डूबा रहता था. और शाम को भी उसके पास बीवी के लिए कम ही वक्त होता था. और जब दीप्ती मेरे से मिली तो उसे मेरे अन्दर इंटरेस्ट हुआ. वो जानती थी की मैं घुमने फिरने का और मौज मस्ती करने का आदि हूँ.

बात तब से स्टार्ट हुई जब एक बार दीप्ती भाभी और संदीप ने मुझे खाने के लिए अपने घर इनवाईट किया. करीब 8 बज के 20 मिनिट पट मैं उनके घर पहुंचा. ऐसे डिनर के समय मैं संदीप के साथ शराब का सेवन करता था. और संदीप ने आज भी पिने का बंदोबस्त किया हुआ था हम दोनों के लिए.

शाम में मैं उनके घर पहुँच गया और डोरबेल बजाई. दीप्ती भाभी ने ही दरवाजा खोला जो जाली वाली साडी पहन के खड़ी थी. उसकी 36 इंच की चूचियां मेरे मन में हलचल सी मचा गई. भाभी की वेस्ट करीब 33 इंच की थी और चूतड़ 37 इंच के थे.

भाभी की जाली वाली साडी के अन्दर का पल्लू का ब्लाउज एकदम डीप नेक का था और उसके बूब्स की लाइन एकदम साफ़ दिख रही थी. मेरी नजर बार बार वही पर जा रही थी और मेरा ध्यान वहां से हटा भी नहीं. और भाभी भी ये सब देख के मन ही मन मुस्का रही थी.

भाभी ने कहा की आप के दोस्त को तो बॉस ने ऑफिस में रोक लिया हैं और क्ल्जिंग का डाटा फिनिश कर के वो आ जायेंगे. मैंने फोन किया तो संदीप ने कहा यार प्रॉब्लम हो गई हैं, बॉस ने डंडा दिया हुआ हैं, तू अगर नहीं आया हैं तो रुक जाना, कल पर छोड़ते हैं प्रोग्राम. मैंने कहा की मैं आलरेडी तेरे घर पर हूँ. तभी उसका बॉस आ गया और उसने कॉल काट दिया.

दीप्ती भाभी ने कहा मुझे भी संदीप का मेसेज आया था और वो बोल रहे थे की मैं नहीं आ पाऊंगा. मैंने दीप्ती भाभी को उपर से निचे तक देखा. और उसके चहरे के ऊपर एक नोटी सी स्माइल आ गई थी.

मैंने कहा, ठीक हैं भाभी चलो मैं बाद में आऊंगा, संदीप बीजी हैं और अब कल ही मिलेंगे.

दीप्ती भाभी ने कहा, अरे संदीप नहीं आ रहे तो क्या हुआ, मैंने खाना आलरेडी पका के रखा हैं, अब आप आ गए हो तो खाना खा के ही जाओ ना.

मैंने कहा: नहीं भाभी मूड मर गया अब तो, संदीप के साथ बैठ के ड्रिंक करने का प्लान बनाया था, मैं उसके लिए मेंटली रेडी था.

दीप्ती: अरे तो क्या हुआ, आज आप पिला दो और मैं आप के साथ बैठ के पी लुंगी. आज आप ही ममुझे पिला दो.

और ये कहते हुए दीप्ती भाभी ने अपनी जांघो को क्रोस कर के अपने बड़े बूब्स मुझे दिखा दिए. उसकी सेक्सी जांघो को देख के मेरे लंड में जैसे एक नया जोश आ चूका था. मैंने सोचा की भाभी को कैसे बताऊँ की मेरा भी मन हैं. लेकिन ये डर भी था की कहीं वो मेरे कुछ करने का बुरा मान के चिल्लम चिल्ली ना करे.

मैंने कहा: दीप्ती भाभी आप कहा पीती हो? आप रहने दीजिये.

दीप्ती: अरे मेरी पिने की इच्छा तो बहुत होती हैं. पर संदीप ने कभी ऑफर ही नहीं किया.

दीप्ती भाभी को ऐसे देख के मेरा मन भी अब डगमगाने लगा था. मैंने कहा: चलो ठीक हैं भाभी, आज आप के लिए स्पेशियल ड्रिंक बना के आप को पिलाता हूँ.

दीप्ती भाभी एकदम उत्तेजित लग रही थी और वो बोली: चलिए, अभी तो काफी समय हैं, हम थोडा रेस्ट कर के फिर ड्रिंक करेंगे.

दीप्ती भाभी ने खड़े हो के प्लेयर के ऊपर लाईट म्यूजिक ओन कर दिया. और कमरे के अन्दर उन्होंने ट्यूबलाईट को बंद कर के कम रौशनी वाली नाईट बल्ब जला दी.  हम दोनों सोफे के उपर अगल बगल में बैठे हुए थे. पिने का काम चालु हो चूका था. दो पेग के बाद भाभी को हल्का सा नशा चढ़ा हुआ लग रहा था. मैंने कहा: आप को चढ़ी हैं तो लेट जाओ आप.

दीप्ती: अरे नहीं प्रवीन ऐसा नहीं हैं. मैं आज थोडा खुल गई हूँ तुम्हारे साथ और ऐसा मौका मैं कब से खोज रही थी.

और इतना कह के भाभी ने मेरे कंधे के ऊपर और फीर वहां से मेरी गोदी में अपना हाथ रक्खा. मैंने कुछ नहीं कहा तो उसने अपना सर मेरी गोदी में रख दिया और बोली: आप को बुरा तो नहीं लगा न मैं ऐसे लेटी तो?

मैंने कहा: नहीं भाभी आप आराम से लेटो, नो टेंशन!

और फिर ये कह के मैंने अपने हाथ से भाभी के बाल खोले और उनके साथ खेलना चालू कर दिया. दीप्ती भाभी: सच में तुम्हारे साथ में बड़ा अच्छा लग रहा हैं.

मैं: आप भी बड़ी क्यूट हो भाभी और सच कहूँ तो संदीप बड़ा लकी हैं.

ऐसे बाते चालु ही थी की मेरा ध्यान भाभी के पल्लू पर गया जो निचे गिरा हुआ था. भाभी की आँखे बंद थी और उसके बूब्स जैसे बहार आने के लिए बेताब लग रहे थे. उसके गोरे दूध से भरे हुए सेक्सी बूब्स एकदम भरे हुए थे.

और उसके ऐसे रूप को देख के मेरे लंड से प्रिकम निकलना चालू हो गया था. मैं पल्लू की खाई को ही देख रहा था और दीप्ती ने अपने पल्लू को ऊपर कर के सही कर लिया. भाभी ने मुझे देखा तो मेरी निगाहें वही पर थी. मेरे लंड के अंदर जैसे सैलाब सा आ गया था. और दीप्ती भाभी के ऊपर भी मस्ती सही तरह से चढ़ी हुई थी.

मैंने कहा, पल्लू को निचे रहने दो ना!

वो बोली: मुझे पता हैं की तुम कहा देख रहे हो.

मैंने कहा, मुझे लगा की पल्लू निचे ऐसे ही गिर गया था गलती से.

वो मस्ती से बोली: नहीं मैंने जानबूझ के निचे कर दिया था. ताकि तुम उन्हें देख सको. क्या तुम्हे मेरे बड़े बूब्स अच्छे लगे?

मैंने कहा: हां.

वो बोली: आज मौका वैसे एकदम सही हैं. हम दोनों यहाँ हैं और संदीप काम पर. अगर तुम चाहो तो हम दोनों अपने बदन की आग को शांत कर सकते हैं.

बस इतना सुनते ही मैंने अपने हाथ को भाभी के चूचो के ऊपर रख दिया. वो टच करने पर एकदम सॉफ्ट सॉफ्ट से थे.

दीप्ती भाभी के मुहं से आह निकल पड़ी और वो मेरे हाथ के ऊपर अपने हाथ को दबा के बोली, अह्ह्ह दबाते रहो इन्हें और जोर जोर से, जरा भी स्टॉप मत करना प्लीज़. आज तुम मुझे इतना प्यार करो की मैं तुम्हारी ही हो के रह जाऊं; अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. और फिर दीप्ती भाभी ने अपने ब्लाउज के बटन को खोल के अपने दोनों बूब्स को मेरे लिए बहार निकाल दिया.

अंदर भाभी ने पेड़वाली ब्रा पहनी थी. लेकिन पेड़ के हटने पर भी वो बूब्स की मोटाई कतई कम नहीं हुई थी. दीप्ती भाभी के ह्यूज टिट्स को देख के मेरे अन्दर की वासना और भी भड़क गई. अब मैं एकदम जोर से भाभी के मम्मो को दबाने लगा और उन्हें मुहं में ले के चूसने भी लगा. दीप्ती भाभी के मुहं से अह्ह्ह अह्ह्ह ओह ओह निकल रहा था. वो बोली: आई लव यु प्रवीन! अह्ह्ह अह्ह्ह सक माय टिट्स आह्ह्ह आह्ह्ह्ह!

मैंने दीप्ती भाभी को उठा लिया अपनी गोद के अन्दर और उसे अन्दर ले गायक. और फिर मैंने उसके बदन के ऊपर से पेंटी के सिवा सब कपडे खोल दिए. भाभी की पेंटी ब्लेक रंग की थी और मैंने उसके अन्दर अपने एक हाथ को डाल के उसकी गर्मी चेक की. और पेंटी को ऊँगली से टटोलते हुए मैंने दीप्ती भाभी के बूब्स को चुसे. मैंने देखा की भाभी की चूत एकदम गीली हो चुकी थी.

दीप्ती भाभी बोली: प्लीज़ प्रवीन और मत परेशान करो मेरे को. जल्दी से अपना लंड मेरे अन्दर डाल के फक कर दो मुझे.

और फिर भाभी ने अपने हाथ से मेरे लोडे को बहार कर दिया. मेरे बड़े लोडे को देख के निचे झुकी और मुहं को खोल के उसे अंदर भर लिया. वो बड़े ही सेक्सी ढंग से मेरे लंड को चूसने लगी थी. और उसके ऐसा करने से मेरे लंड में और भी जान आ गई थी. लंड और बड़ा हो चूका था. अब मैंने भाभी को बेड में पूरा लम्बा लिटा दिया. और फिर मैंने उसकी फांको को खोल के चूत को चाटना चालू कर दिया. वो भी एकदम जोश में आ गई थी और उसकी पुसी से बहुत सब पानी निकल रहा था.

दीप्ती भाभी ने अपनी चूत को ऊपर उठा के कहा, जोर से चाटो मेरे राजा और जोर से मजा आ रहा हैं मेरी जान!

मैं भी भाभी के साथ के इस एक एक लम्हे को पूरा एन्जॉय कर रहा था.

और फिर दीप्ती भाभी ने कहा, अब जल्दी से करो रुकना मत, अपने लंड को मेरी बुर में पेल दो मेरे राजा!

मैंने अपने लंड को सीधे भाभी की चूत में डाला और उसे चोदने लगा. वो मेरे से लिपट गई थी और अह्ह्ह अह्ह्ह कर के गांड को उठा उठा के चुदने लगी थी. हम दोनों ने एक दुसरे को जोश से पकडे रखा और पुरे 20 मिनिट तक मस्त सेक्स किया. और फिर हम दोनों शांत हो चुके थे.

संदीप का पुरे एक घंटे के बाद कॉल आया तब भाभी घोड़ी बन के मेरा लंड ले रही थी. संदीप ने कहा की मुझे आने में दो जितना हो जाएगा. दीप्ती भाभी ने फोन रख के कहा, 2 बजे तक टाइम हैं मुझे चोदने का मेरे राजा.

मैंने कहा, गुड!!!!

दोस्तों हम दोनों ने डेढ़ बजे तक जम के सेक्स किया और एक बार मैंने भाभी की गांड भी मार ली. अब दीप्ती भाभी मेरी रांड बन चुकी हैं और जब हमें मौका मिलता हैं मैं उसे चोद लेता हु.

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