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देवरानी की बगल में देवर से चुद गयी

हेलो मेरा नाम मंजू है मैं मुंबई की रहने वाली हूं, मेरी उमर ४० साल है मेरा फिगर ३६-३४-४० है. मैं गोरे रंग की हूं. मेरे बूब्स के निपल हल्के ब्राउन रंग के हैं और हमेशा तने रहते हैं. मेरे निप्पल लंबे लंबे है और मेरी चूत एकदम फुली हुई है और अंदर से गुलाबी है, मेरी चूत के होंठ एकदम मोटे मोटे हैं, जो हमेशा लंड लेने को बेताब रहते हैं.

चूत के ऊपर हल्के हल्के काले रंग के बाल भी हैं, जो मेरी चूत को और भी अट्रैक्टिव बनाते हैं और मेरी गांड एकदम गोल है और मोटी है, जब मैं चलती हूं तो मेरी गांड के गाल आपस में एक दूसरे को चूमते हैं अब में स्टोरी पर आती हु.

यह एक सच्ची कहानी है, यह बात ६ साल पहले की है, मेरा एक देवर है जिसका नाम गोगी है. उसकी बीवी हे और बच्चे भी हैं, एक बार मैं नहा रही थी, मेरे बच्चे स्कूल गए हुए थे, घर पर मैं और मेरी सास थे, जब मैं नहा रही थी मुझे ऐसा लगा कि कोई जैसे मुझे नहाते हुए देख रहा है दरवाजे के होल से.

लेकिन मैं इग्नोर कर के नहाने लगी. जब मैं बाहर आई तो देखा कि मेरे देवर जि आए हुए हैं, मैं उनको चाय बना कर दी और वह मेरी सास के पास बैठ गया, मैं भी चाय लेकर उसके पास बैठ गयी और चाय पीते पीते मेरे देवर जी ने बोला कि उसको बाथरुम जाना है और वह मेरे रुम के बाथरूम में चला गया.

१५ मिनट बाद आया तो मैंने उसकी पेंट में एक बड़ा सा गिला धब्बा देखा उसके लंड की जगह पर.. मैं एक ब्लू कलर की मैक्सी पहनी हुई थी, वह मेरे दूध को घूर के देख रहा था मुझे उसका देखना थोड़ा अजीब लगा.

लेकिन कहीं ना कहीं मेरे दिल के एक कोने में अजीब सी फीलिंग भी होने लगी और मेंरे निप्पल खड़े हो गए, जो मेरे कपड़े की ब्रा से दिखने लगे और मेंक्सी में भी निप्पल की उभार साफ चमकने लगी, मेरी चूत में भी गीलापन महसूस किया.

थोड़ी देर बाद वह चला गया, मैं भी बाथरुम में अपने कपड़े धोने चली गई, जब लास्ट मैंने अपनी पैंटी उठाई तो मैंने देखा मेरी पैंटी अंदर से गिली थी, चूत वाली जगह से.. मैंने ध्यान से देखा तो उस पर लंड का माल लगा हुआ था.

मैं सोच में पड़ गई और पता चला यह तो देवरजी ने किया है. क्या वह मेरी पैंटी के साथ खेल रहे थे? मेरी पैंटी पर अपने लंड पर रगड रहे थे? यह सब बातें मेरे दिमाग में आ गई और मेरी चूत गीली होने लगी.

मैंने अपनी पैंटी को अपने नाक के पास लेकर सुंघा तो उनके माल की खुशबू से मैं मदहोश हो गई और अपनी पैंटी में लगे अपने देवर के माल को चाटने से रोक नहीं पाई.. उसका स्वाद बहुत अच्छा था थोड़ा सा नमकीन.. मैंने उसे चाट कर साफ कर दिया और फिर उस पेंटी को अपनी चूत में रगड़ने लगी.

मुझे इतना मजा आया कि मैं ५ मिनट में ही झड़ गई, उस के थोड़ी देर बाद मुझे बहुत गिल्टी महसूस हुआ कि मैंने यह क्या कर दिया? ऐसे ही टाइम बीत गया और शाम हो गई, मुझे पति का फोन आया कि वह दिल्ली जा रहे हैं और ३ दिन बाद आएंगे और उन्होंने देवरजी को भी बोल दिया कि आज रात हमारे घर पर रुकना..

उस रात देवरजि अपनी फैमिली को लेकर हमारे घर आ गए. रात को सब ने खाना खाया खाना खाते समय मेने नोटिस किया कि देवरजी मुझे घुर रहे हैं, मुझे शरम आई क्योंकि मेरी देवरानी भी वही बेठी थी..

खाना खाने के बाद मेरी सास, मेरे बच्चे और देवर जी के बच्चे सो गये. में, मेरी देवरानी और मेरे देवर जी हम मूवी देखने लगे. ऐसी ओन था तो ठंडा होने लगा और हमने ब्लैंकेट ओढ़ लिया.

थोड़ी देर बाद मैंने अपने पैरों पर देवर जी का हाथ महसूस किया, वह मेरे पैरों को मसल  रहे थे, बगल में देवरानी भी थी तो मुझे डर भी लग रहा था… इसलिए मैं पैर खींचने लगी लेकिन देवरजी नहीं माने और मेरे पैरों को मसलने लगे और धीरे-धीरे हाथ मेरी जांघ की तरफ लाने लगे, मुझे सेक्स चढने लगा, पहली बार मेरे पति के अलावा कोई मुझे टच कर रहा था. में एकदम गीली हो गई, देवर जि मेरे जांघो को मसलते रहे और मैं भी मजे से मसलवाती रही. वह मेरी जांघ मेरी पिंडली मेररे हिप्स मसलते जा रहे थे मैं मदहोश हो रही थी.

रात के ११ बज रहे थे तभी मेरे देवर जी ने बोला मैं बाहर जा रहा हूं सोने आप दोनों यहीं सो जाओ और टीवी बंद कर कर के चले गए. मैं भी दरवाजा बंद करने गई तो देखा देवरजि वही खड़े हुए थे उन्होंने मुझे कहा कि भाभी में रात को आऊंगा, दरवाजा मत बंद करना और पेंटी ब्रा निकाल कर सोना, मैंने अपना सर हां में हीला दिया.

क्योंकि मुझे भी उस टाइम सेक्स का मन हो गया था, देवरजी मेरी निचले भाग को इस तरह मसल जो रहे थे. मैंने थोडा दरवाजा बंद किया और पेंटी ब्रा निकाल कर सो गई उनके इंतजार में. मेरी देवरानी भी सो गई थी.

करीब १ बजे मुझे मेरे चुतड पर कुछ महसूस हुआ, देखा देवरजी मेरे चूतड़ मसल रहे थे अपने हाथों से.. और बगल में मेरी देवरानी भी सो रही थी, मुझे डर भी लग रहा था और एक्साइटमेंट भी हो रहा था.

उन्होंने मेरी मेक्सी कमर तक ऊपर कर दी जिस से में कमर से नीचे नंगी हो गई, पेंटी तो पहले ही निकाल चुकी थी, उन्होंने मेरी चुतड के गालों को सूंघना शुरू कर दिया, मुझे गुदगुदी होने लगी, मुझे बहुत मजा आ रहा था. उनके होंठ मेरे चूतड़ के गालो को चुमने लगे.

उन्होंने दोनों हाथों से मेरी चूतड़ फैलाई और मुझे देवरानी की तरफ मुंह करके लेटा दिया. मैंने अपनी सांसो पर कंट्रोल किया ता की देवरानी ना उठ जाए, उन्होंने मेरी गांड के गालो को फैलाया और मेरी गांड के छेद पर नाक लगाकर सूंघने लगे, मैं मचलने लगी क्योंकि उनकी गर्म सांसे मेरी चूत को और गर्म और गीला कर रही थी.

मैंने उनके सर को पकड़कर अपनी गांड में और घुसा दिया, तभी वह भी अपनी जीभ निकालकर मेरी गांड के छेद को चाटने लगे, मैं सातवें आसमान में थी.. बहुत मजा आ रहा था.. उन्होंने मेरी चूत को चाट के मुझे पागल कर दिया.. मैंने भी उनके लंड को पकड़ा और ब्लेंके के अंदर घुसकर उन का लंड चड्डी से बाहर निकाला, बहुत ही मस्त खुशबू थी उनके लंड की. फिर मैं एकदम से उनका लंड मुंह में भर कर चूसने लगी.

मैं एकदम पागल हो चुकी थी.. उनका लंड बहुत बड़ा और मोटा था.. मैं उसको कुतिया की तरह चूसती रही और देवर जि मेरा सर मसलते रहे. १५ मिनट चूसने के बाद मुझे देवरजी ने ऊपर खींचा और मेरी जांघ को अपनी तरफ सीधा कर मेरी चूत में लंड डाल दिया.

पहली बार पति के अलावा किसी और का लंड मेरी चूत में था और वह मुझे धीरे धीरे चोदने लगे. नजारा कुछ ऐसा था कि मेरी देवरानी मेरे आगे सो रही थी और मैं बीच में और पीछे से मेरे देवर मेरी चूत की प्यास बुझा रहे थे..

साथ मेरे दूध को मसल रहे थे और मेरे निप्पल को भी चूस रहे थे. इतना मजा मुझे कभी नहीं आया. मैंने अपना सर पीछे घुमा कर अपने देवर को किस कर लिया और वह भी मेरे होठों को चूसने लगे.

मैं आह ओह हहह उहू हां ओह हहह कर रही थी लेकिन बहुत धीरे-धीरे.. उन्होंने मेरी एक टांग उठाकर मेरी चूत को तेज रफ्तार से चोदने लगे और मेरे दूध को खींचने लगे. थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरी चूत में ही अपना माल निकाल दीया और लंड को मेरे मुंह तक लाये जिसे मेने चूस कर साफ कर दिया, बहुत ही टेस्टी था और फिर वह चले गए हैं फिर में भी सो गई.

अगली सुबह सब नॉर्मल था जब जबी मौका मिलता देवर ने मुझे मसल कर चले जाते  कभी मेरी गांड कभी मेरे बूब्स और आज भी जब भी मौका मिलता है हम सेक्स करते हैं. और खूब इंजॉय करते हैं.. कभी-कभी वह मुझे नंगा करके अपनी कार में भी घूमाते हैं और मुझे अपना लंड चूसवाते हैं पब्लिक प्लेस में.

देवर जी के साथ रहकर मैं अब बहुत ओपन हो गयी हु और वह मुझे खूब जमकर चोदते हैं, जब भी मैं खाना खाती हूं या कुछ पीती हु तो देवरजि उस में या तो अपना माल डाल देते या उस में सूसू कर देते हैं, जिस से टेस्ट और दुगना हो जाता है.. हम एकदम पति पत्नी की तरह रहते हैं और अकेले में खूब मजे करते हैं..

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