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दोस्त की माँ को चोदा मजे से

हाई दोस्तों मेरा नाम राजू हैं और मैं इस स्टोरी की वेबसाईट का नियमित पाठक हूँ. और आज मैं आप लोगो के लिए अपनी लाइफ का सेक्स रियल किस्सा शेयर करने के लिए आया हूँ.  मैं ज्यादा टाइम वेस्ट ना करते हुए अपनी स्टोरी के ऊपर आता हूँ. मैं मुंबई में रहता हूँ और जिस कोलेज में पढता हूँ वही मेरे साथ एक फ्रेंड भी पढता हैं जिसका नाम रोहन हैं.

हम दोनों की दोस्ती काफी अच्छी हो गई थी. इसलिए मैं अक्सर उसके साथ उसके घर पर भी जाता था. और हम पढ़ाई भी उसके रूम में ही करते थे. वो अपनी माँ और छोटी बहन के साथ रहता था. और उसकी माँ जिसका नाम कविता था वो भी बहुत ही अच्छी थी. दिखने में भी और नेचर में भी. और आंटी को अच्छे से बन थन के रहने का और सजने संवरने का सौक था. मैं और आंटी बातें करते थे, और कभी कभी तो लम्बी वाली. रोहन के पापा अपनी जॉब के लिए दूसरी सिटी में रहते थे. कविता आंटी की उम्र वैसे तो 46 साल की हैं लेकिन वो 32 35 के करीब ही लगती हैं.

एक दिन एक्साम्स में मैं उसके साथ पढ़ रहा था तभी उसकी माँ कमरे में आई और वो कुछ सामान ढूंढने लगी. जैसे ही वो सामान ढूंढने के लिए झुकी तो मेरी नजर उसकी बड़ी गांड के ऊपर गई. बाप रे मेरा तो लंड पागल हो गया उस बिग एस को देख के!

फिर आंटी जैसे ही उठी तो उनकी चुन्नी निचे गिर गई और उनका क्लीवेज मुझे दिख रहा था. मेरा तो लांद एकदम से पागल हो गया दोस्तों. और ये सब देख के मेरे दिमाग में आंटी के लिए एकदम गंदे गंदे विचार आने लगे थे.

अगले दिन जब मैं पढने आया तो आंटी ने मुझसे पूछा की राजू मैं देख रही हूँ की तुम कुछ दिनों से खोये खोये हुए लग रहे हो. और फिर उसने कहा एक्साम्स हैं उसमे ध्यान दो वरना फेल हो जाओगे. और कोई प्रॉब्लम हो तो मुझसे शेयर करो. तभी रोहन कुछ सामान लेने के लिए मार्केट चला गया. और घर पर अब मेरे और आंटी के सिवा कोई और नहीं था. मैंने सोचा की यही सही मौका हैं आंटी से बात करने का. मैं उनके रूम में गया और मैंने उन्हें कहा की आंटी मेरे को आप के साथ बात करनी हैं. वो बोली हां बोलो ना क्या बात हैं!

मैंने कहा आंटी कुछ दिनों से मैं पढाई पर जरा भी ध्यान नहीं कर पा रहा हूँ जब भी मैं पढाई करने की कोशिश करता हु तो मेरे सामने आप का ही चहरा आ जाता हैं. और आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो. इतना बोलकर मैं उनसे चिपक सा गया. पर उन्होंने मुझे पीछे धकेल दिया. और वो बोली, ये गलत बात हैं तुम अभी जवान हो इसलिए ये सब  बातें तुम्हारे दिमाग में आ रही हैं.

तभी मैं बोला आंटी प्लीज़ आप मेरे को टच कर लेने दो. नहीं तो मैं कसम से जरा भी कंसन्ट्रेट नहीं कर पाऊंगा पढ़ाई के अन्दर और फ़ैल हो जाऊँगा. और ये कह के मैं रोने लग गया. आंटी थोड़ी घबराई हुई सी थी और उसने कहा लेकिन राजू ये सही नहीं हैं, गलत बात हैं. मैंने कहा आंटी प्लीज़. आंटी ना चाहते हुए भी मान ही गई.

फिर कविता आंटी ने अपने मुहं को खिड़की की तरफ कर लिया और बोली, आप टच कर लो लेकिन इस से आगे कुछ मत करना. मैं खिड़की से देखती हूँ की रोहन न आ जाए.

मैं खुश हो गया और आंटी को पीछे से पकड लिया और धीरे से उनकी स्यूट के अन्दर हाथ डाला और उनकी ब्रा से बूब्स को दबाने लगा. आंटी भी हलके हलके से मूड में अंडे लगी थी. फिर मैने उनकी ब्रा निकाली और स्यूट ऊपर किया और उनके बड़े काले निपल्स को चूसने लगा. मेरा एक हाथ उनकी गांड पे था. तभी आंटी चीख पड़ी, जल्दी से दूर हटो रोहन आ गया!

मैं वहाँ से भागा और कमरे में जा के पढने बैठ गया. और आंटी अपने काम में लगने का नाटक करने लग गई. फिर मैंने सोचा की अगर मैं रात को यही पर रुक जाऊं तो चांस बन सकता हैं आंटी के साथ सेक्स करने का.

रात हुई और हमने खाना खाया और फिर से पढने लग गए. आंटी तब तक अपने रूम में टीवी देखने लाग गई. थोड़ी देर में रोहन ने कहा मैं तो अब अर्ली मोर्निंग में पढूंगा क्यूंकि मुझे नींद आ रही हैं. मैंने कहा मैं बहार हॉल में पढता हूँ ताकि तुझे अँधेरे में अच्छा नींद आये. वो बोला ठीक हैं. वो लेटा. मैंने बहार जाते वक्त उस कमरे के दरवाजे को बहार से सक्कल लगा दी ताकि रोहन उठे भी तो बाहर ना आ सके. वैसे ही मैंने रोहन के बहन के बेडरूम को भी बहार से बंद कर दिया. और फिर मैं आंटी के कमरे में चला गया.

आंटी ने मुझे देखा तो बोली, राजू तुम यहाँ क्या कर रहे हो? मैंने कहा आंटी प्लीज़ तोह्दी देर आप अपने साथ खेलने दो ना मुझे आंटी ने कहा मगर रोहन आ गया तो. मैंने कहा आंटी वो सो गया हैं और मैंने रूम बहार से बंद कर दिया हैं इसलिए वो नहीं आ सकता. आंटी ने खडे हो के अपने कमरे के दरवाजे को अंदर से बंद किया और बोली ठीक हैं जल्दी से करो लेकिन सिर्फ एक बार ही टच करना ज्यादा नहीं ठीक हैं? मैंने कहा हां आंटी जी!

आंटी ने उस वक्त नाइटी पहनी हुई थी जो मैंने उतार दी. उन्होंने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी सिर्फ ब्ल्यू पेंटी डाली हुई थी. मैं अब आंटी के बड़े बूब्स को चूसने लगा. थोड़ी देर के बाद मुझसे रहा नहीं गया और मैंने झटके से आंटी की पेंटी उतार दी. और आंटी ने घबराहट और शर्म की वजह से हाथ से चूत को ढंक दिया. और वो बोली, राजू ये क्या कर रहे हो तुम? मैंने कहा कुछ नहीं आंटी बस एक बार आप की चूत को देखना हैं! मैंने पहले कभी रियल में किसी औरत की चूत नहीं देखी हैं.

और ऐसा कहते हुए मैंने आंटी की चूत के ऊपर से उसके हाथ को हटा दिया. फिर मैंने देखा उनकी चूत पर थोड़े से बाल थे. मैंने उनकी चूत में ऊँगली डाली और अन्दर बहार करने लगा. आंटी भी मोअन करने लग गई और फिर मैंने निचे बैठ के उनकी चूत को चाटना चालू कर दिया.

बहुत देर तक मैं उनकी चूत चाटता रहा. और फिर आंटी खड़ी हो गई और अपनी नाइटी पहनी और कुण्डी खोल के बोली राजू अब तुम जाओ. मैं जोश में आ गया था. मैंने दरवाजे को वापस बंद किया और आंटी के पास गया. वो बोली अब क्या चाहते हो तुम, टच कहते थे और चाट भी लिया. मैंने झटके से आंटी की नाइटी को ऊपर की और उनको डौगी स्टाइल में घुमा दिया. उन्होंने एक हाथ से अपनी चूत के आगे रख दिया और बोली नहीं राजू ये नहीं प्लीज़ ये गलत हैं.

मैंने भी उनका हाथ हटा दिया झटके से और एक ही बार में अपने लंड को चूत में घुसा दिया. चटवाने की वजह से वो चूत एकदम गीली थी. इसलिए बिना किसी घर्षण के लंड घुस भी गया. आंटी को छटपटाने का कोई मौका ही नहीं मिला. और एक बार उसकी चूत में लंड घुसा तो वो भी जैसे एक अलग ही दुनिया में आ गई थी!

लेकिन अभी भी वो रेसिस्ट करने की कोशिश कर रही थी. और कह रही थी राजू प्लीज निकाल लो अपने पेनिस को मेरे अन्दर. लेकिन उसे मजा भी आ रहा था क्यूंकि वो कह तो लंड को निकालने के लिए रही थी लेकिन चुदवाने के लिए मस्ती से अपनी गांड भी आगे पीछे कर रही थी.

मैंने आंटी के बूब्स को मसले और उसके कूल्हों को भी प्यार से हाथ फेरा. आंटी ने अब मस्त पोज़ लिया टांगो को थोडा और फैला के. मैंने भी झटके तेज कर दिए. आंटी बोली, आराम से करो हमारी आवाज बहार गई तो रोहन और त्रिशा उठ जायेंगे.

मैंने कहा ठीक हैं मेरी डार्लिंग. मेरे मुहं से ये सुन के वो हंस पड़ी और बोली मैं काफी दिनों से देख रही थी की तुम मेरी गांड और क्लीवेज देखते थे. मैंने कहा आप की फिगर ने पागल किया था आंटी. और मैं बातें करते हुए भी उन्हें चोदता ही गया. आंटी की चूत सच में बहुत ही गरम थी. उन्होंने मुझे बताया किआ आज कुछ सालों के बाद किसी ने उन्हें चोदा था. और उन्हें लंड ले के बहुत अच्छा लग रहा था.

और फिर कुछ देर के बाद कविता आंटी बोली राजू अब तुम निचे लेट जाओ और मैं ऊपर आती हूँ. मैं लेट रहा था उतने में आंटी ने अपने ड्रावर से एक कंडोम निकाल के मेरे लंड पर पहना दिया. और फिर वो मेरे ऊपर बैठ के जम्प करने लगी. वो निचे झुक के मुझे बूब्स चूसने दे रही थी. और फिर मुझे किस दे रही थी.

आंटी एकदम मूड में आ गई थी लंड लेने के. वो मेरे निपल्स को चूस रही थी और उन्हें सक करते हुए काट भी रही थी.

और फिर मैंने कविता आंटी को बोला आंटी आप को खड़े खड़े चोदने का मन हैं. वो बोली चल फिर. इतना कह के वो दिवार को हाथ के सहारे पकड के खड़ी हुई. मैंने एक छोटा स्टूल ले के उसके एक पैर को थोडा ऊपर किया और निचे से जगह बना के अपने लंड को चूत में दे दिया. और मैं उसके कंधे के ऊपर किस करते हुए चोदने लगा. इसी पोज में कंडोम के अन्दर मेरा माल निकल गया.

हम दोनों हग कर के लेटे रहे. फिर आंटी ने कहा अगर किसी को नहीं बताओगे ये सब के बारे में तो मैं आगे से तुम्हे कभी भी मना नहीं करुँगी. मैं खुश हो गया ये सुन के. और अपने कपडे पहन के रोहन के पास जा के सो गया!

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