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दूधवाले और सब्जीवाले ने चोदा मुझे

मेरा नाम रश्मि है और मेरी एज 29 साल है. मैं बंगलौर की एक मेरिड वूमन हूँ. मेरे हसबंड का नाम कृष्णामूर्ति है और उनकी उम्र 33 साल है. वो एक मेनेजमेंट फर्म में सीनियर असिस्टेंट की पोस्ट पर जॉब करते है. हम दोनों को दो बच्चे है. बड़े का नाम राम है जो 4 साल का है और छोटा किशन अभी 3 साल का है. और वो दोनों एक ही नर्सरी में पढने के लिए जाते है.

मैं एवरेज बांधे की हूँ. लेकिन दो बच्चे पैदा करने के बाद मैं थोड़ी बस्टी हो गई हूँ और मेरा वेट भी बढ़ गया है. अभी मेरा फिगर 32 29 31.5 है. जब भी मैं घर से बहार निकलती हूँ तो मुझे लगता हैं की लोग मेरे भरे हुए बदन को ही देख रहे है.

अब उस बात के ऊपर आते है, ये बात आज से कुछ महीने पहले हुई. मेरे पति बीमार हुए थे और उन्हें 3 महीने की बेड रेस्ट की सलाह मिली थी. उनकी कम्पनी ने उन्हें छुट्टी तो दे दी लेकिन सेलरी नहीं मिलनी थी उन दिनों की. मैं तो हाउसवाइफ थी इसलिए घर में इनकम स्टॉप हो गई. पहले महीने तो सब ठीक था. लेकिन फिर थोड़ी प्रॉब्लम होने लगी.

एक दिन हमारा दूधवाला हरीश आया. उसने पहले मुझे कहा था की यहाँ पास के एक अनाथआश्रम में वो लोगो को लेडी के दूध की जरूरत होती है. वैसे गाँव और टाउन में ये बात अजीब लगे लेकिन मुम्बई, बंगलौर जैसे कुछ बड़े टाउन में ये ट्रेंड चालु हुआ है. और हरीश ने मुझे कहा की वो मुझे मेरे दूध के 400 रूपये देगा. मुझे बच्चो की स्कुल की फ़ीस देनी थी इसलिए मैं उसके लिए मान गई.

अगले दिन वो आ गया और मैंने उसे एक बोतल भर के दूध दिया जो मैंने खुद ने आधे घंटे पहले अपने बूब्स से निकाला था. वो बोला मैं कैसे ले लूँ और कैसे मानूं की ये दूध आप का है. मैंने बहुत समझाया लेकिन वो माना नहीं. उसने कहा की कल से मैं खुद ही दूध निकालूँगा. मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं था इसलिए मैंने हाँ कर दिया.

अगले दिन वो आया और मैं भी रेडी थी. मेरे पति जिस कमरे से सोये थे वहां से दूर के कमरे में हम चले गए. मैंने तब ग्रीन साड़ी पहनी हुई थी. वो एक बाउल ले के आया था. और फिर उसने मेरे बूब्स को बहार निकाले. और मैंने अपने लेफ्ट बूब्स को दबाया. उसने एक और बाउल लिया और मेरी दूसरी चूंची को दबाने लगा. मैंने एकदम सरप्राइज थी. उसने कहा की उसके पास और भी कस्टमर है और इसलिए वो ज्यादा वेट नहीं कर सकता. उसके हाथ एकदम रफ थे और वो जोर जोर से मेरे बूब्स से दूध निकाल रहा था. और कुछ ही देर में उसने मेरे चुन्ची को खाली कर दिया. उसने जल्दी से मुझे 400 रूपये दिए और चला गया.

और फिर ऐसे ही पुरे महीने तक चला. वो रोज आता था और मेरे बूब्स को दबा के दूध निकाल लेता था. कभी कभी वो किचन में ही मेरे बूब्स से दूध निकाल लेता था. उसके दूध ले जाने से अच्छा लगता था क्यूंकि मेरी चुंचियां हलकी हो जाती थी.

एक सुबह और उसने कहा आज तो मुझे भी दूध ट्राय करना है! मुझे तो लगा की वो बाउल से पी लेगा इसलिए मैंने हाँ कर दिया. लेकिन उसने तो मेरी चूंची पर ही अपना मुहं लगा दिया और उसे चूसने लगा.

मुझे वो एकदम अजीब लगा. मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था. मैं एक पराये मर्द को दूध पिला रही थी ये सोच के ही अजीब लग रहा था. लेकिन सच कहूँ तो मजा भी आने लगा था अब.

एक दिन वो जल्दी आ गया और तब मेरे बच्चे सो रहे थे. उसने कहा की अब अनाथआश्रम में ब्रेस्ट मिल्क की जरूरत नहीं है क्यूंकि वो बच्चे बड़े हो चुके है. मैं सोच रही थी की अब क्या कहूँ. लेकिन मैंने उसे कहा की लेकिन मुझे अभी कुछ दिन और पैसो की जरूरत है. उसने कहा की तुम मुझे अपना दूध दो मैं उसे अपने गाय के दूध के साथ मिला दूंगा.  लेकिन उसने कहा लेकिन मैं सिर्फ 200 रूपये दूंगा. मेरे पास कोई और चोइस नहीं थी इसलिए मैंने कहा ठीक है.

और जैसे जैसे दिन निकलते गए उसकी हिम्मत और भी बढ़ने लगी थी. वो मेरे बड़े बेटे के सामने भी कभी कभी मेरे बूब्स चूस लेता था. मैं मोर्निंग में नाइटी और ब्रा पहन के उसकी ही वेट करती थी. वो आता था, बूब्स चूस के दूध निकाल के चला जाता था.

मेरे लिए उतने पैसे कम थे. मैंने उसको ये बताया. तो अगले दिन वो अपने साथ अपने दोस्त रमेश को ले के आया. रमेश सब्जीवाला था. और उस दिन वो दोनों ने मेरे बूब्स चुसे. मैंने कुछ नहीं कहा. उन दोनों को पता था की मुझे पैसो की बहुत जरूरत थी. इसलिए आज उन दोनों ने अपनी अपनी लुंगी निकाल दी. वो दोनों के लंड 7 इंच से ऊपर के थे. और वो एकदम काले और गंदे लग रहे थे.

हरीश ने मेरे बूब्स दबाये और दूध निकाला. और उसने अपने लंड को उसके अन्दर डूबा के धोया. और उसने रमेश को भी वो दूध लंड धोने के लिए दे दिया. वो दोनों ने अब मुझे किचन के फ्लोर पर लिटा दिया. और फिर मेरी ही चूंची का दूध मेरी चूत पर डाल दिया.

हरीश ने अब अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर घिसना चालू कर दिया. अब उसने धीरे से अपने लंड को अन्दर घुसाया और मैं मोअन करने लगी. और रमेश ने अपने लोडे को मेरे मुहं में दे दिया. हरीश का लंड कुछ ही देर में मेरी चूत में घुस गया.  और फिर उसने अपनी स्पीड को बढ़ा दी. वो जोर जोर से मेरी चूत को अपने लंड से धक्के दे रहा था.

मैने आज से पहले इतना बड़ा लंड कभी नहीं लिया था. मुझे अजीब मजा आ रहा था. मेरी चूत का ज्यूस निकल के मेरी जांघो पर आ गया. मैं तो जैसे आउट ओ कंट्रोल हो रही थी.

मैं तो जैसे भूल ही गई थी की मैं एक माँ और बीवी थी. और मैं चाहती थी की वो दोनों मुझे खूब चोदे. और फिर कुछ देर में हरिश मेरी चूत में ही झड़ गया. और उसके लंड के ज्यूस मैं अपनी चूत में फिल कर रही थी, जो काफी गरम था!

अब वो दोनों ने अपनी अपनी जगह बदल ली. हम तीनो में से किसी ने भी एक शब्द नहीं बोला. रमेश ने भी लंड को चूत में घुसा दिया और जोर जोर से चोदने लगा मेरे को. मेरी चूत में उसके लंड के ज्यूस भी निकल गए. फिर मैंने दोनों के लंड को चूस के साफ़ कर दिए.

मैं नंगी ही किचन के फ्लोर पर पड़ी हुई थी और मेरी चूत से वीर्य की स्मेल आ रही थी. रमेश ने अपनी जेब से पांच सो की दो नोट निकाल के मेरी चूंची के निचे रख दी.

और फिर तो हफ्ते में दो तिन बार वो दोनों भैये मेरे घर पर आते थे. मेरी चूत को ऐसे किचन में ही चोदते थे और पैसे भी देते थे. एक दिन हरीश ने बोला एक्स्ट्रा पैसे चाहिए?

मैं तो जरूरत में ही थी पैसो की. मैंने हा कहा तो वो बोली गांड में लेना पड़ेगा?

और उस दिन दोनों ने तेल लगा के मेरी गांड मारी. उस दिन मुझे 1000 की जगह 1500 रूपये की कमाई हो गई.

मेरे पति के ठीक होने तक मैंने उन दोनों से खूब चुदवाया. फिर इनकम चालु हो गई मेरे पति की सेलरी की. लेकिन अब मैं मोटे लंड की गुलाम बन गई हूँ. वो दोनों अब पति के ऑफिस जाने के बाद घर पर आते है. पैसे मैं आज भी लेती हूँ, लेकिन सच कहूँ तो अब सिर्फ मजे के लिए इस सब्जीवाले और दूधवाले का लंड लेती हूँ!

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