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गांडू भाई के चुदक्कड़ दोस्तों ने मेरा गेंगबेंग किया

मेरा नाम वृंदा है और मैं अपनी लाइफ का एक सच्चा और अनोखा सेक्स अनुभव आप के लिए कहानी के माध्यम से ले के आई हूँ. मेरे डेड एक बिजनेशमेन थे और 6 साल पहले एक एक्सीडेंट में उनकी डेथ हो गई. मेरा भाई एक खुबसुरत लड़का हे. मेरी माँ की उम्र 43 साल थी और वो भी भाई के जैसे ही खुबसुरत औरत थी. 5 साल पहले की बात है. तब मेरी उम्र 21 साल की थी.

और मेरा सुमार कोलेज के अंदर सब से सेक्सी और सुन्दर लड़कियों में होता था. मैं डेली जिम जाती थी इसलिए मेरा बदन एकदम चुस्त और स्फुर्तिला था. तब मुझे फिगर वगेराह का क्रेज तो नहीं था लेकिन मेरा फिगर अपनेआप ही अच्छा था. तब मेरा भाई मेरे से एक साल बड़ा यानी की 22 साल का था.

एक दिन मैं कोलेज जाने के लिए बस स्टॉप पर अपनी बस की वेट कर रही थी. और तब एक लड़के ने मेरी मांसल जांघ और गांड के ऊपर कमेन्ट किया. मैंने उसे कुछ नहीं बोला और वो वहां से चला गया. उस दिन मैं कोलेज गई और शाम को वापस घर आ गई. अगले दिन जब मैं बस में चढ़ी तो आज जगह नहीं मिली मुझे. और मैं बस के सीट्स के बिच की आइल में खड़ी हुई थी. बस सुबह का वक्त होने की वजह से एकदम पेक थी.

मेरे दोनों तरफ मेरे जैसे ही जिनको जगह नहीं मिली थी वैसे लोग खड़े हुए थे. और तभी मुझे पीछे मेरी गांड के ऊपर एकदम गर्म गर्म अहसास हुआ. वो किसी का लंड था जो मेरी गांड को एकदम वो वाली जगह पर टच हो रहा था. और जब मैंने मूड के देखा तो वो कल वाली ही लड़का था जो बस में भीड़ का पूरा फायदा ले रहा था पहले तो मुझे एकदम खराब लगा. लेकिन मैं न ही उसे कुछ कह सकती थी ना ही बस में और जगह थी की मैं आगे या पीछे होती. उसके लंड का टच मुझे कुछ देर में अच्छा सा लगने लगा था अब. और उस लड़के ने अब मेरी कमर के ऊपर हाथ रख दिया और उसे फेरने लगा.

और फिर एकाद मिनिट में ही मेरा कोलेज आ गया. और मैं वहां स्टॉप पर उतर गई. अब मुझे एकदम से बुरा फिल हुआ की मैं ये सब क्या कर रही थी. अब मैं वापस शाम को घर आई और रात भर बस में हुए इस किस्से के बारे में ही सोचती थी. मेरे दिल और दिमाग में युध्ध सा छिड़ा हुआ था. एक पहलु कर रहा था की मैंने बुरा किया. और दूसरा पहलु कह रहा था की सेक्स में बुरा अच्छा कुछ नहीं होता है.

एक हफ्ते के बाद में वो ही लड़का जब हमारे घर आया टी मैं डर सी गई की वो भला यहाँ कैसे आ गया. तभी मैंने देखा की वो मेरे भाई के साथ आया था और वो उसका दोस्त ही है. कुछ ही दिनों के बाद वो फिर से स में चढ़ गया मेरे पीछे पीछे. और आज भी बस ऐसी ही पेक थी. वो फिर से मेरे चूतडो को अपना लंड घिसने लगा. तभी मुझे थोडा गुस्सा आया और मैंने बोला की अपने दोस्त की बहन के साथ ये सब करते हुए तुम्हे शर्म नहीं आती है जरा भी! तो वो बोला तेरा भाई दोस्त नहीं है मेरा वो तो गांडू है एक नम्बर का! और उसने मेरे कान में कहा मैं तो उसकी लेने के लिए आता हूँ तेरे घर पे! भाई के इस रूप के बारे में मुझे अंदाजा भी नहीं था. और उस लड़के के मुहं से ये सब सुन के मैं एकदम परेशान ही थी!

और मैं सोचती रही और वो मेरे बदन के ऊपर लंड घिसने के मजे लेता रहा. तभी मैंने उसे कहा की तुम जूठ बोल रहे हो मेरा भाई ऐसा नहीं है. और उसने कहा की मैं कल तुम्हे सबूत दे दूंगा. फिर उसने मेरे से मोबाइल नम्बर माँगा. मैंने उसे दे दिया. वो मेरी सलवार में ऊँगली कर के मेरी गांड के होल से खेलने लगा.

बस में आज उस दिन के जितनी भीड़ तो नहीं थी लेकिन उसकी हिम्मत की मैं सच में दाद देती हूँ की वो खुल के ये सब कर रहा था. और मैं जैसे कुछ ना जानती होऊं ऐसे उसे देख भी नहीं रही थी. और फिर उसने आइसे इह मेरी चूत को भी टच कर लिया. फिर कोलेज आया तो मैं उतर गई उसने मेरी चूत को पानी पानी कर डाला था.

अगले दिन मैं कही गई हुई थी. शाम को वापस आई तो देखा की भाई के 4 दोस्त घर पर आये हुए थे. और वो सब लोग भाई के कमरे में ही चले गए. और उन चारो में एक लड़का वो बस वाला भी था. उसने मुझे मेसेज किया तेरा भाई लंड का कैसा भूखा है वो देखना है तो खिड़की पर अ जाना पांच मिनिट के बाद.

मैंने पांच मिनिट के बाद जा के खिड़की से अन्दर झाँका तो वो लड़के की बात एकदम सच निकली. वो लडको ने सब ने ही अपने लंड बहार निकाले हुए थे. और एक लड़के के लंड को मेरा भाई चूस रहा था और घोड़ी बन के दुसरे लड़के के लंड को उसने अपनी गांड में डलवाया हुआ था.

अब ये सब कुछ देख के मैं भी गरम हो रही थी. उस बस वाले लड़के का नाम रोहित था. उसने मुझे इशारा किया की देख तेरे भाई का काम. और फिर जो लड़का भाई की गांड मार रहा था उसने अपने स्पर्म छोड़ दिए. औ तभी रोहित ने खिड़की खोल दी और मेरा हाथ पकड़ लिया. उसने मुझे कहा अब कब तक देख के अपनी चूत को सेकोगी आ जाओ अन्दर मेरी जान. और उसने मुझे कमरे के अन्दर ले लिया.

मेरे भाई ने मुझे देखा तो वो शर्म से पानी पानी हो गया और उसकी आँख में भी आंसू आ गए. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. रोहित ने उन लडको को कहा देखो इस गांडू की बहन इसे चुद्वाते हुए देख रही थी. तब मुझे उसने एक किस भी कर लिया. भाई ने कुछ नहीं बोला और फिर दुसरे एक लड़के ने मेरी भाई की गांड की चुदाई करनी चालू कर दी.

अब मेरे को भी मजा आ रहा था. और मैंने भी रिस्पोंस देना चालू कर दिया. रोहित ने मेरे कपडे उतार दिए और अब मैं ब्रा और पेंटी में उसके सामने खड़ी हुई थी. और रोहित ने अब ब्रा भी खोल दी और मेरे को भाई के साथ एक ही बेड में लिटा दिया. और मेरे बूब्स को वो वहसी जानवर के जैसे दबाने लगा.

जब मैं पूरी तरह से गरम हो गई तभी मेरी पेंटी को भी उसने उतार दिया और अपना लंड मेरी चूत में लगा दिया. मेरे लिए आज ये पहला ही सेक्स अनुभव था. जब उसने थोडा जोर लगाया तो मैं दर्द से छटपटा गई. तभी मैंने पिलो को एकदम जोर से हाथ में दबाया. मेरे भाई ने दुसरे पिलो को हग कर लिया. उसकी गांड को अब वो लड़का एकदम जोर जोर से मार रहा था. और उसलड़के का लंड एकदम मोटा था. और वो चारो हँसते हुए हम दोनों भाई बहन की इज्जत को लुट सेर रहे थे!

रोहित ने अब जोर जोर से धक्के देने चालू कर दिए थे. और मैं दर्द की वजह से तडप रही थी. कुछ देर बाद मुझे भी मजा आने लगा उसका लंड लेने में. फिर एक लड़के ने मेरी गांड के होल पर वेसेलिन लगाया. मैंने उसे कहा अरे पीछे नहीं यार! लेकिन वो कहाँ सुनने वाला था. और उसने अपने नुकीले कडक लंड को मेरी गांड में पेल दिया.

मेरी गांड तो एकदम टाईट थी. उसने मेरे भाई को मेरी गांड पर और वेसेलिन लगाने को कहा. भैया तो जैसे की उनका गुलाम था. वो जो कह रहे थे वो भाई एकदम फोलो कर रहा था. मुझे ये सब थोडा अजीब सा लगा. भाई ने वेसेलिन मेरी गांड के छेद पर घिसा. और फिर उस लड़के ने लंड को मेरी गांड में घुसाया. मुझे पहले पहले तो बहुत दर्द हुआ गांड मरवाने में. लेकिन फिर एक दो मिनिट के बाद अच्छा लगा.

और तभी रोहित मेरी चूत के अन्दर ही झड़ गया. और ये लड़के अब बारी बारी हम दोनों भाई बहन की चुदाई कर रहे थे. अब हम थक चुके थे. अब वो लोगों ने मुझे लंड चूसने के लिए कहा. तो मैंने मन कर दिया. तो एक लड़का जिसका नाम श्याम था वो बोला साली छिनाल तेरा गांडू भाई अच्छे से कर लेता है ये काम!

और मैंने देखा की एक लड़के के लंड को मेरे भाई ने चुसना चालू कर दिया. और फिर मुझे भी लंड मुहं में दे ही दिया गया. और फिर वो लोगों ने और भी गन्दा काम किया मेरे साथ. मेरे गांडू भाई का आधा खड़ा हुआ लंड भी वो लोगों ने मुझे चूसने के लिए कहा. और फिर भाई को उन्होंने कहा की अपनी बहन की चुदाई कर साले गांडू हमें देखना है. और भाई ने भी मेरी चूत और गांड मारी.

पुरे दो घंटे तक यही काम चलता रहा. कभी भाई की गांड तो कभी मेरे दोनों छेद में एक एक लंड. वो लडको ने शायद वाएग्रा खाई हुई थी इसलिए वो इतना सब चोद सकते थे.

वो लोग जब गए तो मेरी चूत और गांड दोनों चुदवा चुदवा के सूज चुके थे और मेरे से चला भी नहीं जा रहा था. दो दिन तक मैं कोलेज भी नहीं जा पाई. और रोहित फिर मुझे बस में मिला तो वो मेरे पास आ गया. उसने मुझे बोला की तेरा भाई ही वाएग्रा ले के आता है और घंटो तक गांड मरवाता है. और अब तुमको भी हमने लंड लेने की मशीन बना दिया है.

12 तारीख को मेरी मासिक की डेट थी लेकिन 20 तक नहीं आई तो मैं बहुत रोने लगी भाई के पास जा के. भाई ने बोला अरे घबरा मत दवाई ले आता हूँ मई. और वो बच्चा ना रहे उसकी गोली ले आये.

अब रोहित के ना जाने कितने ही दोस्त हमारे घर आते है. माँ जॉब पर होती है और भैया अपनी गांड मरवाते है और मेरी तो चूत और गांड दोनों की ठुकाई होती है!

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