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मजबूर बहन की गांड भी मारी भाई ने

मेरा नाम पूजा हे और मेरी उम्र 23 साल की हे. मैं एक सोफ्टवेर फर्म में काम करती हूँ. ये कहानी कुछ दिन पहले की ही हे. मैं लिव लेकर घर जा रही थी जबलपुर. घर वालो को मैंने नहीं बताया था सरप्राइज देने के लिए. लेकिन जब मैं घर पहुंची तो खुद ही सरप्राइज हो गई. क्यूंकि घर पर कोई नहीं था. शाम को भाई आया तो उस से पूछा की बाकि के लोग कहा हे. तो उसने बताया की सब शादी में भोपाल गए हुए हे.

मेरे भाई का नाम उपेन हे और वो 25 साल का हे. उसकी हाईट पुरे 6 फिट की हे और एकदम हेल्धी हे वो. मैंने अपने बारे में तो आप लोगों को बताया ही नहीं. मेरा फिगर 32 30 32 हे. वैसे एकदम नहीं लेकिन मैं स्लिम तो हूँ

भाई ने कहा छुट्टियां हे इसलिए सब रुकनेवाले हे कुछ दीन भोपाल वाली मौसी के घर पर ही. अगले दिन मैं पापा की स्कूटी ले के निकली और गिर गई. मुझे थोड़ी चोट लगी और मुझे एडमिट किया. मेरे फोन से कॉल कर के नर्स ने भैया को बता के उन्हें बुला लिया. मैंने भाई को बोला की मम्मी पापा को मत बोलना, क्यूंकि वो लोग काफी अरसे के बाद भाभी और बच्चो के साथ बहार गए थे. और मैं नहीं चाहती थी की मेरी वजह से उनका होलीडे मूड खराब हो!

मेरे दोनों हाथ में चोट आई थी और पट्टी बंधी हुई थी. 2 दिन के बाद मुझे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज मिल गया लेकिन हाथ की पट्टी नहीं खुली थी. मैं घर में आकर यही सोच रही थी की हॉस्पिटल में तो नर्स हेल्प कर इति थी पर यहाँ पर तो मम्मी और भाभी भी नहीं थी. भाई से कैसे बोलूंगी की मुझे बाथरूम करवा दे!

मैंने काफी देर तक कंट्रोल किया लेकिन फिर मेरे से रुका नहीं गया तो मैंने भाई को बोला की मुझे बाथरूम जाना हे.

उपेन भाई: तो जा ना.

मैं: कैसे जाऊं भाई, दोनों हाथ में पट्टी हे मेरे.

भाई मुझे बाथरूम में ले गया. मुझे बोलने में भी शर्म आ रही थी. मैंने उसे बोला की मेरी सलवार का नाडा खोल दो. पहले तो उसने रिस्पोंस नहीं दिया. जैसे की अनसुना सा कर दिया मेरी बात को. मैंने फिर से बोला मेरा नाडा खोल दो. वो पास में आया और स्यूट को थोडा ऊपर किया पर निचे नहीं देख रहा था. कम से कम थोड़ी शर्म तो आई उसे. उसने सलवार धीरे से निचे कर दिया बिना देखे ही. और बोला, कर ले अब.

मैंने कहा कैसे करूँ? पेंटी भी हे.

उसने मेरी तरफ अब थोड़े गुस्से से देखा लेकिन कर भी क्या सकता था वो बेचारा. मज़बूरी में स्यूट में निचे हाथ डालकर पेंटी को अंदाजे से टच करते हुए उसने निचे कर दिया. मैंने कहा एक प्रॉब्लम हे स्यूट पकड़ना पड़ेगा नहीं तो वो गिला हो जाएगा.

वो बोला: हो जाने दे गिला कर ले चुपचाप.

मैं: फिर उसको धोना पड़ेगा आप को ही.

थोड़ी देर सोचने के बाद उसने पीछे से मेरा स्यूट पकड़ा और मैं बैठ गई. मेरी चूत से ssssssshhhhhh की आवाज आ रही थी. मुझे काफी शर्म आ रही थी उसके सामने इस तरह बाथरूम करते हुए. फिर उसने सलवार पहना दी और मैं उसके सहारे ही रूम में वापस आ गई.

रात को खाना भी भाई ने ही बनाया. मुझे खिलाया भी उसने ही. उस दिन तो ज्यादा प्रॉब्लम नहीं हुई. प्रॉब्लम तो अगले दिन हुई जब मुझे संडास जाना था. मैं काफी देर रोक कर बैठी रही. लेकिन जब जबरदस्त लगी तो मुझे भाई को बोलना ही पड़ा. वो मुझे ले कर गया और उसने मेरी सलवार वगेरह निकाल दी. मैंने संडास कर ली तो उसको कहा, भाई हो गया हे प्लीज़ हेल्प कर दो अब.

जब वो आया तो खुद ही समझ गया की क्यूँ बुलाया था मैंने. मैंने आँख बंद कर लिया था और सोच रही थी की भाई ही तो हे टच कर भी लेगा तो कुछ नहीं जाएगा. वो मेरी गांड धोने लगा. पर अचानक मैं सहर उठी और चोंक कर आँख खोली. उसने एक ऊँगली मेरी गांड में डाल दी थी. मैंने उसके ऊपर चिल्लाया, ये क्या कर रहे हो तुम अकल हे की नहीं?

तो उसने कहा, अरे धोते हुए गलती से अन्दर चली गई, चल अब सलवार पहना दू तुझे.

2 3 दिन तो मैंने बिना नहाए ही निकाल दिए ये सोचकर की भाई के सामने नंगी होने से अच्छा नहाऊ ही नहीं. लेकिन बाद में अजीब लगने लगा था बिना नहाए. तो मैंने भाई से बोला की मुझे नहला दे. उसकी आँख में ये सुन के अलग ही चमक दिख रही थी. मुझे समझने में देर नहीं लगी. वो नहलाने की बात सुनकर बड़ा खुश हुआ था. मैंने भी मन ही मन सोच लिया की भाई ही तो हे देख ले तो देख ले कौन सा कोई बहार का इंसान हे.

बाथरूम पहुँचते ही वो मेरे कपडे एक एक कर के उतारने लगा. आज वो मेरी तरफ ही देख रहा था. मैंने अपनी आँखे ये देख के बंद कर ली थी ताकि उस से नजरें ना मिला सकूँ. पट्टी बंदी होने की वजाह से मेरा स्यूट नहीं उतर रहा था तो उसने पूछा की काटना पड़ेगा इसको. मैंने भी कह दिया जो करना हे कर लो.

फिर वो केंची ले आया और उसने स्यूट को काटकर अलग कर दिया. मेरा ब्रा की स्ट्रिप को भी काट दिया उसने. मेरे गोरे गोरे दूध देखकर उसके मुहं में पानी आ चूका था जो मैं देख सकती थी. पर मैं कुछ भी नहीं बोली. फिर सलवार और पेंटी को एक हाथ से पकड़कर एक ही झटके में नीचे कर दिया भाई ने.

मेरी चूत में बाल थे. हॉस्टल में रहने की वजह से मैं क्लीन नहीं कर पाती थी. उसने मुझे कहा की ये इतनी गंदगी कैसी! साफ नहीं करती हो क्या. मैंने कहा तू अपने काम में काम रख, चुपचाप नहला दे मुझे बस. वो नहलाने के बहाने से मुझे टच कर रहा था.

जानबूझकर साबुन चूत के पास बार बार लगाकर उसने ऊँगली को भी काफी टच किया वहां पर. मैं भी एक लड़की ही हूँ. उसके ऐसा बार बार करने से मैं भी गरम होने लगी थी. पर खुद के ऊपर मैंने बहुत कंट्रोल कर रखा था. मेरी आँखे बार बार बंद हो जाती थी जब उसके हाथ से चूत टच होती थी. मैंने महसूस किया की अब भाई सिर्फ एक ही हाथ से साबुन लगा था था. थोड़ी देर बाद जो हुआ उसे तो इमेजिन भी नहीं किया था मैंने कभी भी!

इस बार मेरी चूत में कोई गरम रोड जैसी चीज टच हो रही थी. मैं घबरा गई. डर के मारे आँखे खोलने ही जा रही थी की इतने में मेरी चीख निकल गई. क्यूंकि उसने अपने लंड को चूत के मुहं में 1 इंच जितना अन्दर डाल दिया था. मैं बहुत जोत से चिल्लाई उसको, ये क्या किया तूने शर्म नहीं आती हे तुझे. तू भाई हे मेरा ये सब ठीक नहीं हे. पानी डाल दे मेरे ऊपर और कपडे पहना दे फिर.

सच कहूँ मैंने कभी नहीं सोचा था की मेरा भाई ऐसे मौके का फायदा उठाएगा.

मेरा भाई नहीं माना और उसने मुझे दिवार से सटा दिया. फिर जोर से एक और धक्का मारा उसने. उसका आधा लंड चूत को चीरते हुए अन्दर चला गया. दर्द के कारण मैं रोने लगी थी. और ना जाने क्या क्या उसको बोलने लगी थी.

मैं: औकात दिखा दी तूने अपने लड़के होने की. लड़के की जात होती ही कुत्तों की हे.

वो गुस्से में आकर और तेज धक्के मारने लगा और पूरा लंड मेरी चूत में समा गया. मैं दर्द की वजह से कुछ भी नहीं बोल सही. बस मुझे से अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह निकल रही थी. मैं उसको रोक रही थी: मत कर भाई मेरे साथ ऐसा, अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह प्लीज़ आह्ह्ह्ह मान जा प्लीज़ दर्द हो रहा हे मुझे.

लेकिन उसने मेरी एक नहीं सुनी और नहीं माना वो.

10 मिनिट के धक्को के बाद मेरा पेट एंठने लगा. मुझे ना जाने किस तरह का दर्द भी ओने लगा. मैं चिल्लाने लगी: और तेज तेज चोदो भाई, और जोर से मारो धक्के रुकना मत! और अन्दर करो उसको.

और फिर मैं भाई के लंड के ऊपर ही झड़ भी गई. वो भी झड़ने वाला ही था और कहने लगा की मुहं खोल. मैंने मन कर दिया तो कहने लगा के तेरे उपर ही निकाल दूंगा और फिर नह्लाऊंगा भी नहीं अगर तूने मुहं नहीं खोला तो.

मुझे मज़बूरी में मुहं खोलन पड़ा. और उसका 6 इंच का लंड मेरे मुहं में आ गया. वो लंड के धक्के अब मेरे मुहं में दे रहा था. उसने अपना स्पर्म मेरे मुहं में ही भर दिया. बहुत ही खारापन था उसमे, और मुझे मजेदार भी लगा. मैंने उसके सब स्पर्म पी लिए.

नहलाने के बाद उसने मुझे कपडे नहीं पहनाये. मैंने बहुत बोला उसे लेकिन वो नहीं माना. और फिर वो जब भी उसका लंड खड़ा होता था मुझे चोद लेता था. काम से भी उसने छुट्टी ले ली थी. खाना बनाता था, बाथरूम वगेरह करवाता था और मुझे चोदता था दिन भर वो.

एक रात को जब मैं सो रही थी तो उसने अपने लंड को मेरी गांड में भी आल दिया. मैंने पहले कभी गांड नहीं मरवाई थी तो ये दर्द चूत से ज्यादा वाला हुआ था मुझे. मैं दर्द से छटपटा सी रही थी. लेकिन उसने पुरे लंड को गांड में घुसाए बिना चेन की सांस नहीं ली. मैं रोती गिडगिडाती रही और वो गांड मारता रहा मेरी.

उसने मुझे कहा की तेरी गांड बड़ी मस्त हे और मारने का बहुत मजा आया. मम्मी पापा और भाभी के आने तक तो उसने मेरी गांड का छेद भी ढीला कर दिया. सच कहूँ तो भाई के साथ वो दिन मैंने भी खूब एन्जॉय किये थे!

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