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डेरी फार्म के बिहारी नोकर से चुदवा लिया

दोस्तों मैं एक पंजाबी लड़की  हूँ जो ट्रेडिशनल पंजाबी कल्चर में ही पैदा और बड़ा हुई. पहले पहले मैं छोटा थी तब बहुत ही सीधी सादी थी. लेकिन फिर बढती उम्र के साथ मेरे अंदर की सेक्स की क्युरीओसिटी ने मुझे परेशां कर दिया. मैंने कभी सेक्स किया तो नहीं था लेकिन मैं पोर्न वीडियो की साइट्स डेली देखने लगी थी. मेरी फिगर 34 32 36 हे.

यहाँ इस साईट पर सेक्स की कहानियां पढ़ के मेरे अंदर की हिम्मत और सेक्स की चाह और भी बढ़ने लगी थी. लेकिन सच में कहू तो इतनी हिम्मत नहीं हुई की ट्राय करूँ. फिर एक बार मैं अपने दादा जी के घर पर गई. वो लोग एक गाँव वाले एरिया में रहते हे. और शहर से बाहर उनका एक बड़ा डेरी फ़ार्म हे. मैं वहां कुछ दिन रहने के लिए गई थी. वहां उन्के डेरी फ़ार्म में कुछ बिहारी नोकर थे जो गायो की देखभाल का काम करते थे.

शाम को डेली वो दादा जी के घर के बहार बनी हुई टंकी में नहाने के लिए आता था. मैं अक्सर इन नोकर लोगों को वहां पर नहाते हुए देखने के लिए शाम को वही से निकलती थी. उन्के बड़े बड़े लंड तोवेल के पीछे छिपे होते थे. और मुझे देख के वो कडक होते हुए मैं देख सकती थी. वो लोग तोवेल निचे कर के अपनी पेंट पहनते थे और मैं सामने एक बेंच के ऊपर बैठ के सेक्स की कहानियाँ पढ़ती थी. कभी कभी तो मैं उतनी गरम हो जाती थी की मेरा हाथ अपने आप ही मेरी चूत के ऊपर चला जाता था. मैं सोचती थी की इन बिहारियों में से किसी एक के साथ भी चुदने का मौका मिल जाए तो मजा आ जाए! और फिर मैंने मन ही मन एक प्लान सोच लिया.

दुसरे दिन शाम के करीब साड़े 6 बज रहे थे. वो लोग नहाने के लिए नहीं आये थे, मैं वही उनकी वेट में थी. मेरे दादा दादी आज किसी काम से बहार गए थे और वो लेट आनेवाले थे. मैंने स्कर्ट और शर्ट पहना हुआ था और निचे ब्रा पेंटी कुछ नहीं डाला था. मैं टंकी के इर्द गिर्द ही घूम रही थी. फिर वो बिहारी नोकर लोग आने लगे. वो लोग नाहा रहे थे और मैं वही घूम रही थी. जब लास्ट वाला नहाने के लिए गया तो मैं और करीब हुई. बाकी के अपने अपने कपडे पहन के वहां से निकल लिए थे.

वो लास्ट वाला लड़का ऊँचा और अच्छी बॉडी वाला था. वैसे सभी महनत मजदूरी करनेवाले थे इसलिए बॉडी तो सभी की मस्त थी. और मैंने मन ही मन सोच रही थी की इसका लंड कम से कम 7 इंच का तो होगा ही होगा. मैं उसके पास चली गई और उसे देखा. वो पूरा गिला था और उसका बदन तोवेल में लिपटा हुआ था. मैंने उसे देख के अपने शर्ट के पहले दो बटन खोले उसके सामने ही जिसकी वजह से मेरी आधी चूचियां बहार को दिखने लगी. उसका मुहं खुल गया और मेरे बूब्स को देख के उसके मुहं से लाळ टपकने लगी. मैंने अंदर हाथ डाल के अपनी चूचियां दबाई उसके सामने ही.

वो अभी कुछ समझता उसके पहले तो मैं उसके पास गई और उसके मजबूत बाहों को अपने हाथ से टच करने लगी. उसके मुहं से अहह निकल गई. शायद किसी लड़की ने उसे छुआ नहीं था पहले. मैंने अपनी एक चूची को बहार निकाली और अपनी कडक निपल से उसके बदन को टच किया. वो एकदम से सन्न रह गया था मेरा ऐसा बर्ताव देख के. मेन गेट बंद था और पुरे कम्पाउंड में एकदम अँधेरा था. मैंने उसे कहा, चूस ले इसको!!!

वो भी शायद आदेश की ही राह में था. उसने मेरे बूब्स को अपने हाथ में पकड़ के मसले और भूखे कुत्ते के जैसे वो मेरी निपल को चूसने लगा. साला ऐसे चूस रहा था जैसे उसमे से दूध निकाल के पी लेगा. वो एकदम उत्तेजित था और बड़े मजे से सक करने लगा था. वो जैसे पूरी चूची को अपने मुहं में भर लेना चाहता था. फिर मैंने अपने दो बटन और खोले उसके लिए. वो पागल हो गया मेरी दोनों बूब्स को देख के और दोनों को साथ में मिला के दबाने और चूसने लगा.  वो बूब्स को इतनी जोत से चूस रहा था की मुझे दर्द सा हुआ. लेकिन मैं उस वक्त दर्द की जरा भी परवाह नहीं की. क्यूंकि जो मजा आ रहा था वो दर्द से काफी ज्यादा था.

मैंने अब अपने एक हाथ को अपनी पुसी के ऊपर और दुसरे को उसके लंड के ऊपर रख दिया. सच कहूँ तो ये सब अपनेआप ही हो रहा था, बिना कुछ सोचे मैं उसके लंड के साथ खेलने लगी थी. और वो मेरे दूध को जोर जोर से मसल के प्यार दे रहा था उन्हें.

फिर मैंने उसे अपनी तरफ खिंचा और उसका लंड सीधे ही मेरी पुसी के ऊपर टच हो गया. वाऊ क्या फिलिंग थी वो! शब्द ही नहीं हे उसे बयान करने के लिए! वो भी मुझे पागलो की तरह कंधे के ऊपर और छाती के ऊपर बूब्स के उपरी हिस्से में चूसने लगा था. उसकी मजबूत बाहों ने मुझे उसके बदन के ऊपर दबाया हुआ था. और उसका लंड सीधा मेरे चूत के दाने को सट सा गया था जैसे. मैं बेहाल थी और उसकी हो के रह गई थी. फिर वो अपने हाथ को निचे ले आया और उसने लंड को पकड़ के मेरी चूत के ऊपर घिसना चालू कर दिया. मेरी स्कर्ट ऊपर थी और मैंने पेंटी नहीं पहनी थी इसलिए मैं निचे नंगी ही थी.

वो घिसता गया और अपनी स्पीड को बढाता गया. मेरी मोअनिंग निकल रही थी और बढ़ने लगी थी. और फिर उसके मुहं से एक आह निकली और उसके लंड का ज्यूस निकल के मेरी चूत के ऊपर और जांघो के ऊपर बह गया. मैंने उसमे से थोडा अपनी ऊँगली के ऊपर ले के उसका सवाद चखा. वो सवाद में खारा था. मैंने उसे कहा, चूत चाटोगे मेरी?

वो बोला मेडम यहाँ नहीं, शाब मेमसाब आ गए या फिर कोई नहाने आ गया तो प्रॉब्लम होगी. फिर वो मुझे ले गया पीछे की साइड जहाँ पर गायों के लिए सूखी घास रखी गई थी. मैंने निचे घास के ऊपर ही लेट गई अपनी टाँगे खोल के और उसे ऊँगली से इशारा किया चूत की तरफ. उसने मेरी स्कर्ट को पूरी निकाल दी और वो निचे लेट गया मेरी लेग्स को झांघो से पकड़ के. उसने अपने होंठो को मेरे चूत के फांको पर लगा दिया. और ये बिहारी नोकर किसी इंग्लिश गोरे पोर्नस्टार के जैसे मेरी चूत को लिक करने लगा. मैंने टांगो को हवा में उठा दिया और मैं उसकी मस्त पुसी लिकिंग को एन्जॉय करने लगी.

उसने मुझे अपनी तरफ खिंचा और अपनी जबान को चूत के होल में डाला. वो इतनी मस्ती से चूत को चाट रहा था जैसे मख्खन खा रहा हो. फिर उसने मेरी चूत के दाने को मुहं में ले के मुहं को बंद कर दिया. और जैसे अचार को खा रहा हो वैसे मेरी चूत के दाने को चाटने लगा. मेरी तो हालत खराब हो चुकी थी उसकी इस हरकत से. मैं जैसे हवा में उड़ने लगी थी बिना पंख के ही! फिर उसने अपने दांतों के निचे दबा दिया मेरी चूत के दाने को. वो जबान से चाट के दांतों को दाने के ऊपर घिसता था तो मुझे एकदम सेक्सी फिलिंग होती थी. मैं उसके मुहं के ऊपर ही झड़ गई और उसने मुझे छोड़ा ही नहीं और मेरी चूत से निकलती हुई एक एक बूंद को वो चाट गया.

उसने फिर और कुछ देर तक मेरी चूत के दाने को चाटा. फिर उसने मेरी चूत के ऊपर थूंक दिया और बोला, लगता हे मालिक आ गए.

मुझे भी ऐसा लगा क्यूंकि मेन गेट के लोहे की डोर की खुलने की आवाज आई थी. मुझे लगा की शायद मैं इतनी नजदीक आ के भी लंड से दूर ही रह जाउंगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वो बोला, जल्दी से डाल के पानी छुड़ा देता हूँ मेरा.

उसके ये कहने से मुझे बहुत ही अच्छा लगा. उसने अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर रखा और बिना कुछ कहे ही अंदर डाल दिया. मेरी चूत का सिल उसके गरम लंड से खुल गया. मेरे मुहं से चीख निकलने को थी लेकिन उसने मेरे मुहं को कस के दबा दिया अपने हाथ से इसलिए आवाज अंदर ही दब गई.

वो बेदर्दी फकर था और गच गच चोदने लगा मेरी चूत को. उसका लंड पूरा अंदर घुस के बहार आता था और मेरी चूत से खून बहने लगा था. एक मिनिट तक तो मैं खूब रोई उसके लंड के धक्को की वजह से लेकिन फिर मुझे भी अच्छा लगने लगा था. मैं अब उसके लंड को एन्जॉय करने लगी थी.

उसने मुझे खूब चोदा और 3 4 मिनिट में ही उसका सब पानी मेरी चूत में छोड़ दिया उसने. फिर उसने मुझे छोड़ा और अपने कपडे पहनते हुए बोला, पहले मैं जाता हूँ फिर पांच मिनिट के बाद तुम निकलना.

और वो वहां से निकल गया. मैंने खड़े हो के अपना स्कर्ट पहना और शर्ट के बटन बंद किये. मैं खड़ी हुई लेकिन मेरे से चला भी नहीं जा रही थी. दादी ने आवाज दी तो मैंने कहा, आई.

दादी ने कहा कहाँ गई थी. मैंने कहा, पता नहीं अंदर मोबाइल का टावर नहीं आ रहा था तो बहार कम्पाउंड में ही घूम रही थी.

दादी बोली, बहार अकेले नहीं घूमते हे बेटा!

अब भला उन्हें कौन कहे की उनकी पोती घूम नहीं रही थी लेकिन पीछे घास में लेट के चुदवा रही थी!

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