मालकिन ने दिया नए साल में चूत का बोनस

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मालकिन ने दिया नए साल में चूत का बोनस,, हेल्लो दोस्तों मेरा नाम श्रेयष्कर है। मेरी उम्र 23 साल की है। पढ़ाई लिखाई करने की उम्र में मेरे को काम करना पड़ रहा था। मेरे को घर की स्थिति देखकर पढ़ाई लिखाई छोड़नी पड़ी थी। मै पास के बाजार में ही नौकरी कर रहा था। मेरी ड्यूटी रात में रहती थी। मैं उनके यहां गार्ड का काम करता था। मै भी अभी जवान हुआ था। हर एक लड़की को देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था। चूत के लिए मैं भी बहोत तड़पा हुआ था। मेरे को अभी तक चूत की एक भी झलक देखने को नहीं मिली थी। मै बहोत ही परेशान था। मै मुठ मार मार का अपने जोश को ठंडा करता था। मै शक्ल सूरत से भी कुछ अच्छा नहीं थी। मै जहां काम करता था। उनकी बेटी मेरे को बहोत ही लाजबाब लगती थी। मै उससे हमेशा ही चिपकने की कोशिश करता लेकिन वो बाहर रूस में पढ़ने वाली लड़की थीं। मेरे जैसे नौकर के कहाँ हाथ आने वाली थी।

मकान मालकिन की उम्र 45 साल के करीब रही होगी। मै उन्हें आंटी कहता था। देखने में अब भी वो जवान ही लग रही थी। आंटी के चुच्चे बहोत बड़े बड़े थे। मेरे मुह में देखते ही पानी आने लगता था। मेरा लंड भी चोदने को तैयार हो जाता था। हम पांच लोग उनके यहां काम करते थे। मेरे चेहरों को छोड़कर सबकुछ मुझमे परफेक्ट था। 5 फ़ीट 10 इंच की मेरी हाइट थी। मेरा लंड भी 7 इंच का था। नए साल पर सब लोग आते थे। उनकी बेटी और हसबैंड दोनों लोग रूस ही रहते थे। वो अकेली ही घर पर रहती थी। उनका सारा काम मेरे को ही करने को मिलता था। .हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम.
मैं उनके रूम तक जाता था। बाकी सारे लोग बाहर ही ग्राउंड और घर का काम करते थे। नया साल आने वाला था। उनकी बेटी और हसबैंड आने वाले थे। लेकिन किसी परेशानी की वजह से न आ सकें। मालकिन बड़ी उदास लग रही थी। मैं न्यू ईयर के दिन उनके घर पर पंहुचा तो देखा मालकिन अभी सो कर नहीं उठा है। दोपहर होने को था। मैने दीवाल घडीं की तरफ देखा तो 11 बजने वाले थे। सब लोग पार्टियां मना रहे थे। मैंने मालकिन को जगाया।
मैं: आंटी…आंटी,…उठो कब की सुबह हो चुकी है
मालकिन: क्या यार श्रेयस्कर मेरे को सोने नहीं देते। क्या करूं उठकर जिसका इतने दिनों स इन्तजार कर रही थी। वो तो आये ही नहीं
मै वही पास के बिस्तर पर बैठकर मालकिन को समझाने लगा।
मैं: आंटी! अंकल नहीं आये तो क्या हुआ हम लोग तो है आप हम लोगो के साथ न्यू ईयर सेलिब्रेट करे

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मालकिन: तुम्हारे अंकल के ना आने की कमी सिर्फ मेरे को पता है। मेरे को उनकी कितनी जरूरत है मेरे को ही पता है
मै: आंटी आपकीं जरूरत को मैं पूरी करने की कोशिश करूंगा
मेरे को क्या पता था कि मेरा भाग्य चमकने वाला है। आज वर्षो की तड़प बुझने वाली है।
आंटी: क्या बताऊँ तुम्हे किसी गैर मर्द से नहीं हो सकता
मै: मेरे कुछ समझ में नहीं आया क्या कह रही हो तुम?
आंटी: ठीक है मैं तुम्हे बाद में आकर समझाती हूँ

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वो बॉथ रूम में घुसी और मै भी अपने काम पर लग गया। बाद में जो देखा वो देखता ही रह गया। मालकिन तौलिया लपेटे हुए बाथरूम से नहा कर निकल रही थी। उनका तौलिया सिर्फ चूत के थोड़ा नीचे की तक लटक रहा था। उनकी चिकनी साफ़ टाँगे दिखाई दे रही थी। मन कर रहा था अभी जाकर कुत्ते की तरह चाट लूं। देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। कुछ देर बाद वो मॉडल बन कर आ गयी। उस दिन उन्होंने जीन्स और टी शर्ट पहना हुआ था। आज तो वो अपनी बेटी की उम्र की लग रही थी। टी शर्ट के ऊपर से लाल रंग का जैकेट पहन कर घर से बाहर निकल कर मेरे पास आयी। हम पांचों लोग उन्हें देखकर चकमा खा गए। मालकिन मेरे पास आकर गाडी निकालने को कहने लगी। मैंने गाडी निकाली वो आगे की शीट पर बैठ गयी। दिन के 2 बजे से लेकर रात को 9 बजे तक उन्होंने शॉपिंग की। मेरे को बहोत सारी चीजे गिफ्ट में दी। .हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम. मेरे समझ में नहीं आ रहा था मालकिन आज इतनी मेहरबान कैसे हो गयी। मै चुपचाप सब करता रहा। उन्होंने मेरे साथ होटल में भरपेट खाना खाया। रात के लगभग 9 बजे मै उन्हें लेकर उनके घर पर आ गया। मैंने गाड़ी की चाभी दी और चलने लगा।
मै: गुड नाईट आंटी ! चलता हूँ मैं फिर अब सुबह मुलाक़ात होगी
मालकिन: क्यों जा रहे हो?? आज रात को तुम यही रुकोगे

मै उनका कहना टाल भी नहीं सकता था। आज इतना गिफ्ट दे चुकी थी की मै उन्हे जान तक दे सकता था।
मैं रुक गया। अंदर जाकर मैंने लेटने के लिए अपना स्थान पूछने लगा।
मै: आंटी मै कहाँ लेट जाऊं!
मालकिन: चलो बताती हूँ
मै उनके साथ उनके पीछे पीछे चलने लगा। तभी उनका कमरा सामने आया और वो रुक गयी। दरवाजे को खोलते हुए मेरे को अंदर ले गयी।
मै: आंटी ये आपका कमरा है। मेरे को बिस्तर बता दो मै कहाँ लेट जाऊं

मालकिन: इतना बड़ा बिस्तर आज साल भर से खाली ही रहता है। इस पर सिर्फ अकेले मैं सारी रात एक किनारे पर ही काटती हूँ। तुम यही मेरे पास लेट जाओ
मै समझ गया आंटी आज गर्म है। मेरे को तो आज चूत मिलने ही वाली थी। क्या पता था कि बेटी नहीं हाथ आयी तो आज उसकी मम्मी की चूत चाटने को मिलेगी।
मेरे को आंटी ने बिस्तर की तरफ करते हुए कहने लगी।
मालकिन: श्रेयस्कर तुम मेरे को आज शॉपिंग करवा के अपने अंकल की याद ही नहीं आने दिए।
मै: आंटी ये तो मेरा फर्ज बनता है। मालकिन की हर बात मानना तो हर नौकर का फर्ज है
मालकिन: अब तुम्हे मेरे एक काम और भी करना पड़ेगा। तुम रात में भी अंकल की कमी महसूस नहीं होने दोगे।

मैं: ठीक है आंटी आपकी अगर यही इच्छा है तो मेरे को स्वीकार है
इतना सुनते ही वो मेरे गले को पकड़कर लटक गयी। मैं नीचे झुका ही था की वो मेरे गालो पर किस करने लगी। मेरा लंड तो खड़ा होने लगा। आज मेरे को मुठ मारने की ज़रूरत नहीं थी। वो मेरे को अपनी चूत का बोनस देकर मेरी जरूरतो के साथ अपनी जरूरत भी पूरी करने वाली थी। मै चुपचाप सब कुछ करवा रहा था। मालकिन मेरे को किस करते करते हुए बिस्तर पर धकेल दी। वो तो मेरे से भी ज्यादा तड़पी हुई लग रही थी। मैने भी उनका साथ दिया। उनके होंठो पर अपनी होंठ को सटा कर होंठ चूसने लगा। मेरे को उनकी महकती हुई होंठ चूसने में बहोत ममजा आ रहा था। ऊपर नीचे दोनों होंठो को मैं बारी बारी पी रहा था। मेरा लंड बहोत ही तेजी से वो भी चूसने लगी। पहली बार की होंठ चुसाई से मेरा पेट भर गया। मेरे अंदर बहोत ही जोश भरने लगा।

मैंने मालकिन के मम्मो को खींच खीच कर दबाना शुरू किया। बहोत ही सॉफ्ट मम्मे लग रहे थे। टी शर्ट के ऊपर पहने हुए जैकेट का बटन खुला हुआ था। वो जोर जोर से सिसकने लगी। मैंने उनकी जैकेट को निकाला। तभी मालकिन ने उठकर अपनी ब्रा सहित टी शर्ट को निकाल दी। मैंने देखा तो देखता ही रह गया। उनके दूध में अभी ज़रा सा भी ढीलापन नहीं आया था। उनके दोनों बूब्स आज भी चमकीले और सॉलिड दिख रहे थे। मै भी मजे लेने के उनके दूध पर हाथ फेरने लगा। वो भी गर्म होने लगीं। हाथ को फेरते फेरते मैंने उसे दबाना शुरू किया। उनके भूरे निप्पलों को देखकर मुह में पानी आने लगा। मैंने अपना मुह लगाकर उनके मम्मो को पीने लगा। वो मेरे को अपनी बूब्स में दबाने लगी। .हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम.

मैंने और जोर जोर से पीना शुरू कर दिया। वो “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की सिसकारियां निकालने लगी।
मालकिन: आराम से पी! काट ना डाल साले!
मैने उनके चुच्चे को और भी तेजी से मसलना शुरू।कर दिया। पूरा मजा लेने के बाद मैंने दूध को पीना छोड़ दिया।
मालकिन: ला अपना लंड मेरे को अब मेरी बारी है तेरे लंड को चूसने की

मै अपना पैंट कच्छे सहित निकालते हुए नंगा हो गया। वो मेरे काले लंड को सहलाते हुए चूसने लगी। मेरा लंड टाइट हो गया। उसकी नसे फूलने लगी। वो मेरे लंड को चूसते हुए मेरे को उत्तेजित अवस्था में कर दी। मेरे को लंड चुसवाने में बहोत अजीब लग रहा था। फिर भी कुछ देर चुसवाने के बाद मैंने अपना लंड उनसे छुड़ाया। मालकिन ने अपना पैंट खोलकर बाहर निकाला। वो पैंटी निकाल कर मेरी तरह नंगी हो गयी। चिकनी चूत को देखते ही मेरा लंड ऊपर नीचे होने लगा। मै बहोत ही बेकरार हो गया। मालकिन बिस्तर पर बैठकर अपनी टांगो को फैलाकर मेरे को अपनी चूत का दर्शन करा रही थी। लाल लाल चूत को देखकर मेरे लंड से ज़रा सा पानी निकल आया।

मैंने मजा लेने के लिए उनकी चूत पर अपना मुह लगाकर चाटने लगा। उनकी रसीली चूत को चाटने में बहोत ही मजा आ रहा था। मैंने उनकी चूत पर निकले थोड़े से खाल को अपनी होंठो से किस करके खीच कर मजा ले रहा था। मालकिन जोर जोर से “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की सिसकारी भर रही थी। मेरा लंड उनकी चूत में घुसने को बेखरार था। मैंने भी देर न करते हुए उनकी चूत पर अपना लंड रख दिया। उनकी चूत के दरारों पर अपना लंड रगड़ रगड़ कर उनकी चूत की तवे की तरह गर्म कर दिया।

मालकिन: कुत्ते क्यूँ तड़पा रहा है इतना! डाल दे अपना लंड! मेरी चूत को फाड़ दे
मै भी अपना लंड हिलाते हुए उनकी चूत के छेद पर रखकर धक्का मारने लगा। मेरा आधे से अधिक लंड का भाग उनकी चूत में समाहित हो गया। मेरे लंड में उनकी चीखे निकाल दी। वो जोर जोर से “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” की आवाज के साथ चुद गयी। उनकी चूत टाइट हो गयी थी। उनकी चूत बहोत कम चुदी थी। मेरा लंड थोड़ा थोड़ा करके पूरा अंदर घुस गया। लूर लंड से में चुदाई करने लगा। वो अपनी टांगो को उठाये हुए चुदवा रही थी। मेरा लंड जल्दी जल्दी से अंदर बाहर होने लगा। उन्हें भी बहोत मजा आ रहा था। उस रात में मैं उन्हें अंकल से अच्छा खुशी दे रहा था। मै अपने जोश को आज पहली बार किसी छेद में डालकर शान्त र्कर रहा था। उससे पहले मैं हिला हिला कर काम चला रहा था। मेरा लंड टाइट था उनकी चूत से रगड़ खा खा कर और भी ज्यादा गर्म जो गया .हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम. मेरे लंड की गर्माहट से मालकिन की चूत की प्यास बुझ रही थी। मालकिन की जोरदार की चुदाई से उनकी मुह से सिर्फ “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई.. .अई…अई…..”की चीखे निकल रही थीं। वो अपनी चूत को मालिश कर रही थी। मैंने अपनी कमर उठा उठा कर लगभग 20 मिनट तक ऐसे ही चोदा। मैंने उनकी पोजीशन को बदला क्योंकि मैं कमर उठा उठा कर चोद के थक चुका था। मैने उन्हें बिस्तर के सहारे झुकाया। उनकी पेट को पकड़ कर अपना लंड उनकी छेद पर एक बार फिर से अपने लंड सेट करके जोर जोर से चोदने लगा। इस बार मैने उनकी चुदाई को और भी तेजी से करने लगा।

वो मेरे लंड की रगड़ को सहन नहीं कर पा रही थी। मै उनके पेट को पकडे हुए जोर जोर से हचक कर अपना लंड पेल रहा था। वो कुछ देर तक “आऊ…..आऊ ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की आवाज के साथ मेरे लंड की रगड़ को सहती रही। आखिरकार उनकी तड़प ख़त्म ही हो गयी। वो मेरे साथ सम्भोग करके संतुष्ट हो चुकी थी। उन्होंने अपना माल निकाल दिया। मैं भी संतुष्ट हो चुका था। हम दोनों एक साथ ही झड़ गए। मेरा सारा माल मालकिन की चूत में स्खलित हो गया। मैंने अपना लंड निकाला। उनकी चूत से मेरा माल बहने लगा। सारा का सारा माल नीचे फर्श पर बूँद बूँद करके गिर गया। हमने अपने अपने कपडे पहने और लेट गए। हम दोनों की गर्मी शांत होते ही ठंडी लगने लगी। हमने रजाई ओढ़कर रात भर चुदाई की। उस दिन से मै उनकी हर दिन चुदाई करता हूँ। .हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम.

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