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आंटी भी लंड के लिए प्यासी ही थी

हाई दोस्तों आज की ये कहानी हे वो आप ने पढ़ी हुई कहानियों में सब से सेक्सी होगी शायद! ये कहानी हे एक जवान लड़के की और एक 34 साल की औरत की. और ये कहानी शरू होती हे जब इस लड़के ने इस औरत को अपनी वो आँखों से देखा! और आप को ज्यादा सस्पेंस में ना रखते हुए कह दूँ की वो जवान लड़का मैं ही हूँ!

मैं एडल्ट तो हो गया था लेकिन मुझे जानना था की आखिर ये सेक्स कैसे करते हे. क्सक्सक्स मूवीज और फोटोस में सब दिखाते हे. लेकिन जो रियल फिलिंग हे वो थियरी से नहीं आती हे वो मैं जानता ही था. और फिर मुझे अपनी ये पड़ोसन आंटी अनीता मिली!

उस दिन मैं पढाई कर रहा था तब मुझे आवाज आई बकेट टूटने की. मैं भाग के गया तो देखा की ऊपर छत की तरफ सीढियों के ऊपर अनीता आंटी गिर गई उन्हें उठाने में मेरा लंड उनको टच हो गया. वाऊ क्या अलग फिलिंग हुई थी. आंटी के पुरे कपडे भीगे हुए थे और उसके बूब्स साफ़ नजर आ रहे थे. मेरी नजर वही चिपक गई थी. आंटी ने मुझे बूब्स घूरते हुए देख लिया था. पर वो कुछ नहीं बोली और उसने मुझे अपनी चूचियां देखने दी. फिर वो बोली, चल हट अब मुझे कपडे सुखाने जाना हे.

मैं अपने आप पर कंट्रोल ही नहीं कर सका जब मैंने उसकी गांड में फसी हुई सलवार को देखा. आंटी तो चली गई छत पर लेकिन उसने मेरे लंड को पागल कर दिया था. मैं बाथरूम में गया और अपने लंड को हिला लिया उसके बारे में ही सोच के. मेरे लंड का पानी जल्दी निकल गया उस दिन.

मैंने मुठ मारने के बाद सोचा की छत पर वैसे भी कोई होता नहीं हे. और आंटी तो रोज कपडे धोती हे. फिर मैं आंटी के कपडे धोने के पहले छत के ऊपर चला जाता था. वो कपडे ले के आती थी रोज और मैं उसके सेक्सी बदन को देख लेता था. आंटी हंसती थी मुझे देख के.

एक दिन मैंने अपनी हिम्मत दिखा ही दी आंटी को. मैं किताब के निचे अपने लंड को निकाल के बैठ गया. आंटी के आने से पहले सीढियों से उसकी आवाज आई. तब मैं लंड को हिलाया तो वो एकदम कडक और लम्बा हो गया. आंटी ऊपर आई तो मैंने किताब को हटा दी. आंटी की नजर मेरे लंड के ऊपर पड़ी. वो मुहं छिपा के हंस पड़ी और बार बार वो मेरे लंड को ही देख रही थी. मैं वही खड़ा हुआ और आंटी के सामने लंड को मसलने लगा.

आंटी मुझे मुठ मारते हुए देख रही थी. मैंने आंटी के सामने ही लंड को हिला के छत के ऊपर अपना माल गिरा दिया. वो भी चुदासी तो हुई थी लेकिन कुछ बोली नहीं. वो निचे चली गई और मुझे लगा की शायद वो इंटरेस्टेड नहीं हे. थोडा डर भी था की कही वो आज की ये बात किसी को बोल ना दे.

लेकिन पांच मिनीट के बाद आंटी फिर से छत पर आ गई. वो नाहा के अपने बाल सुखाने के लिए आई थी. उसने मुझे देखा और बोली, अब नहीं हिलाना हे क्या?

आंटी और मेरी बातचीत होती थी फिर. लेकिन उसके घर में उसकी सास वगेरह होते थे और मेरे घर में मेरी मम्मी पापा. आंटी को चोदने का तो बड़ा मन करता था लेकिन छत पर नहीं चोद सकता था. आंटी भी अब अक्सर मुझे अपनी साडी ऊपर उठा के अपनी पेंटी और कभी कभी तो सीधे सीधे अपनी चूत ही दिखा देती थी. मेरा ध्यान पढाई से एकदम हट गया था और उसका असर नम्बर पर दिखने लगा था. जैसे तैसे कर के मैं एग्जाम लिखी और मुझे यकीन था की पास तो हो जाऊँगा.

आंटी की सास और उसके बच्चे बहार घुमने के लिए गए थे. और आंटी अंकल ही घर पर थे. एक दिन अंकल ऑफिस में थे तो आंटी ने मुझे आवाज दी की मेरा बल्ब बदल दो ना प्लीज़.

मैं घर में गया तो उसने बड़ा स्टूल रखा हुआ था. मैं स्टूल के ऊपर चढ़ा. आंटी ने कहा, स्टूल हिलता हे देखना जरा.

फिर वो बोली

रुको मैं इसे पकडती हूँ.

मैं ऊपर था और वो निचे स्टूल पकड के खड़ी हुई थी. मैंने ऊपर से देखा तो आंटी के बूब्स के बिच की गली दिख रही थी. मेरा लंड खड़ा हो गया. मैंने पेंट के  निचे चड्डी नहीं पहनी थी इसलिए खड़ा हुआ लंड आंटी ने भी देखा. मैं कुछ कहता उसके पहले उसने हाथ को लंड पर रखा और बोली, बहुत हिलाते हो इसे!

मैंने कहा, कोई मिलता नहीं हे इसलिए हिलाना पड़ता हे ना.

वो लंड को सहला रही थी. मैंने बल्ब लगा दिया था फिर भी मैं वही खड़ा रहा. आंटी ने कहा, स्टूल के ऊपर बैठ जाओ.

मैंने स्टूल के ऊपर बैठा और वो मेरे सामने ही खड़ी हुई थी. आंटी ने मेरी ज़िप खोली और लंड को बहार निकाला. वो लंड हिला रही थी और मैं पागल हो रहा था. मैंने आंटी के बूब्स के ऊपर हाथ रखा तो उसकी लम्बी सांस निकल पड़ी. मैंने कहा, आंटी आप के दूध बड़े ही सेक्सी हे.

वो बोली चुसाती हूँ अभी तुझे.

और उसने लंड को अब जोर जोर से हिलाना चालु कर दिया. फिर उसने आगे झुक के सुपाडे के ऊपर एक किस भी दे दी. एक मिनिट में ही उसने लंड का पानी निकाला. आंटी के हाथ मेरे वीर्य से भर गए थे और गंदे हो गए थे. उसने लंड को साफ किया एक कपडे से. और फिर अपने हाथ भी.

फिर वो बोली, चलो अब तुम्हे कुछ देती हूँ.

आंटी मेरा हाथ पकड के मुझे अपने बेडरूम में ले गई. वहां उसका लेपटोप पड़ा हुआ था. आंटी ने एक ब्ल्यू फिल्म लगाईं जिसमे एक लड़का एक मच्योर लेडी की गांड और चूत को चूसता दिखाया गया था. आंटी ने कहा ये देखो, ऐसा कर के दो मुझे.

मैंने कहा आप कपडे तो उतारो पहले.

आंटी ने अपने कपडे उतार दिए. वो एकदम सेक्सी लग रही थी. आंटी ने आज ही अपनी झांट भी साफ़ की हुई थी ऐसा लग रहा था. मैंने क्सक्सक्स मूवी में जैसे लड़के ने आंटी को ओरल दिया था वैसे करना चालू कर दिया. आंटी की चूत से मस्त महक आ रही थी. आंटी ने अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह चालू कर दिया. मैं जोर जोर से उसे चूसने लगा.

फिर आंटी मेरे सामने घोड़ी बन गई. अब की मैंने पीछे से उसकी गांड के छेद को भी चाट दिया. वो बड़ी खुश हुई और बोली, तुम जल्दी सिख लेते हो सब कुछ. मैंने कहा, आप भी मेरा मुहं में ले लो ना.

आंटी ने कहा, लाओ दे दो.

आंटी ने मेरे लंड को पूरा मुहं में ले लिया एक ही झटके में. वो सक करते हुए लंड को मुठ्ठी में बंद कर के हिला भी रही थी. मैं सच में एकदम पागल सा हो रहा था उसके लंड चूसने से. आंटी ने पांच मिनिट लंड चूसा और फिर बोली, चलो अब डाल दो इसे मेरे अंदर.

वो अपनी मोटी जांघो को खोल के निचे लेट गई. मैं उसके ऊपर आ गया. आंटी ने लंड को पकड़ के अपनी चूत के छेद के सेंटर पर सेट किया और बोली, एकदम जोर से मत करना वरना दर्द होगा और तुम्हारा लंड भी छिल सकता हे क्यूंकि बहुत दिनों से इसके अन्दर कुछ गया नहीं हे इसलिए. आराम से करोगे तो दोनों को मजा आएगा.

मैंने आंटी को कहा, ठीक हे मेरी अनीता डार्लिंग!

उसे डार्लिंग कहा तो वो हंस पड़ी.

मैं निचे झुका और मेरे लंड का सुपाड़ा आंटी की पिचपिची सी चूत में घुसा. वो सिहर उठी और उसने मेरी जांघो को पकड लिया ताकि मैं हार्ड फक न कर दूँ. मैंने हौले से एक झटका दिया और मेरा आधा लंड अन्दर घुसा. आंटी के मुहं से जोर की आह निकल गई.

मैं रुक गया और उसे किस करने लगा. आंटी के बूब्स को चूसते हुए मैंने उसके कान के ऊपर हाथ रखे और उसके गले के ऊपर हाथ रख के प्यार से दबाने लगा. आंटी की साँसे तेज हो गई थी. उसने अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर कसा हुआ था. मैंने जैसे ही उसकी ग्रिप ढीली होती महसूस की तो एक और झटका मारा. अब मेरा पूरा लंड आंटी की चूत में था!

वो कमर के निचे के हिस्से को हिला रही थी ताकि चुदाई हो सके. मैं ऊपर को उठा और आंटी को मिशनरी पोस में जोर जोर से चोदने लगा. आंटी की चुदासी आवाजें कमरे के वातावरण को रंगीन बनाए हुए थे. वो हिल हिल के लंड ले रही थी अपनी चूत के अन्दर और मुझे उकसा रही थी अह्ह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह कर के.

कुछ देर इस पोस में आंटी की चूत मारने के बाद फिर मैंने आंटी को खड़ा किया. उसकी चूत से पानी टपक रहा था, क्यूंकि वो झड़ जो गई थी.

आंटी कमरे की दिवार को पकड के खड़ी हुई और मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाला. अब मैं उसे खड़े खड़े चोदने लगा. आंटी भी अपनी गांड को हिला हिला के चुदवा रही थी.

मेरे दोनों हाथ आंटी की गांड पर ही थे जिसे पक्द्द के मैं उसे ठोकने लगा था.

पांच मिनिट में मेरे लंड का पानी भी आंटी की चूत में निकल गया. उसने चूत के मसल टाईट कर लिए ताकि पानी वेस्ट न हो.

धीरे से मेरा लंड सिकुड़ के बहार आया. मैंने लंड को आंटी के कूल्हों पर घिस के साफ़ कर लिया और पेंट पहनने लगा.

आंटी बोली, जल्दी में हो क्या?

मैंने कहा, आंटी एक दिन में ही सब थोड़ी कर लेंगे. मैं अब स्टेमिना बढ़ाऊंगा अपना और चांस मिला तो रेग्युलर आप को लूँगा.

वो बोली, बातें तो समझदार वाली करते हो.

मैं हंस के निकल गया. सच में दोस्तों आंटी लोगो को चोदने की यही स्टाइल रखनी चाहिए. एक दिन में पांच बार चोदने से अच्छा हे की हफ्ते में 3-4 बार चोदो. क्यूंकि आंटी का मन आप से भर गया तो वो लंड बदल लेती हे जल्दी जल्दी से. अनीता आंटी आज भी मेरी रखेल हे. कभी मैं उसे इस पोस में तो कभी उस पोस में पेलता हूँ!

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