मेरी नोकरानी अंकिता को बड़े लंड से चोदा

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ये कहानी मेरी और मेरी सुंदर और सेक्सी नोकरानी अंकिता की हे. मैं 20 साल का हूँ और बॉडी बनाने का सौकीन हूँ. मेरा लंड पुरे 7 इंच का हे. मैं एक किराए के कमरे में रहता हूँ. और मेरी लेंडलेडी ने इस नोकरानी का इंतजाम किया था. पहले मैंने कहा की मुझे मेड नहीं चाहिए लेकिन आंटी ने कहा अबे कब तक काम करेगा तू. फिर पढ़ाई भी तो करनी हे तुझे. इसलिए मैंने उनकी बात मान ली.

और ये सब एक दिन सुबह में चालु हो गया. उस दिन अंकिता काम पर बड़ी जल्दी आई थी. अब मुझे नंगा सोने की आदत हे. और अक्सर सुबह सुबह में मेरा लंड भी खड़ा हुआ होता हे. जब अंकिता आई तो उसने मुझे नंगा सोया हुआ देखा और उसने मेरे खड़े हुए लंड को भी देख लिया. उसके बदन में भी मेरे लंड को देख के गुदगुदी सी हो गई.

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फिर उसने जानबूझ के वापस जा के दरवाजे को नोक किया. मैंने भी चौंकने की एक्टिंग की और जल्दी से अपने लंड के ऊपर चद्दर डाल दी. वो अन्दर आ गई और हंस रही थी. उसकी शादी हो चुकी थी लेकिन वो सिर्फ 23 साल की जवान लड़की ही थी. पहले पहले मैं उसको चोदने को उत्सुक नहीं था. लेकिन जैसे जैसे उसके फिगर को ओब्सर्वे किया तो मेरे मन का शैतान भी उसके लिए बेताब सा हो गया था.

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उस दिन के बाद हम लोगो में बातें बढ़ ही गई थी. और अक्सर वो मुझे छु भी लेती थी काम करते हुए और बातें करते हुए. और उसकी एक्टिंग ऐसे होती थी जैसे की वो गलती से हो गया हो. और फिर उसे उसकी आदत सी हो गई थी. कभी अपनी जांघ मेरे से टच कर देती थी तो कभी अपनी गांड को मेरे लंड के ऊपर घिस के चल देती थी.

एक दिन वो फिर से जल्दी आई सुबह में. मैंने उसे खिड़की से आते हुए देख लिया था. लेकिन मैंने जैसे उसे देखा ना हो वैसे मैं नंगा पड़ा रहा. वो जब अन्दर आई तो उसने मेरे न्यूड बदन को देखा. मेरा लंड तो 90% सुबह सुबह खड़ा हु हुआ रहता हे. और खड़े लंड को देख के जैसे उसकी आँखों में एक अलग ही चमक सी आ गई थी. आज मेरा मन उसकी चुदाई कर देने के लिए बेताब सा हुआ था.

मैं उसके सामने ही खड़ा हुआ और उसने मेरे लंड को देखा. मैंने चड्डी पहनी और फिर बाथरूम में घुस गया. मैंने जानबूझ के बाथरूम का दरवाजा खुला रखा. मुतने के बाद मैं शावर के निचे खड़ा हुआ. और शावर की आवाज से अंकिता के कान खड़े हो गए.

मैं जानता था की वो आवाज सुन के जरुर झाँकने के लिए आएगी. और मैं भी बस वही मौके की तलाश में था. और वो सच में दो मिनिट के बाद बाथरूम के दरवाजे के पास आई. मैंने उसे देखा और मैंने अपने लंड के ऊपर साबुन लगा के खूब झाग र दिया. फिर मैंने लंड को मुठ मारने की स्टाइल में हिलाने लगा. अंकिता मुझे देख के हंस रही थी. मैंने जल्दी से दरवाजे को खोला और वो वही खड़ी हुई थी. मैंने उसे अन्दर झांकते हुए पकड लिया था. वो कुछ कहती उसके पहले तो मैंने उसका हाथ पकड के उसे अन्दर खिंच लिया.

शावर का पानी उसकी साडी के ऊपर गिरा तो वो ट्रांसपेरेंट दिखने लगी. अंकिता ने कहा, ये क्या कर रहे हो आप साहब?

मैं: वही जो बहुत पहले कर लेना चाहिए थे मुझे.

अंकिता: कोई आ गया तो?

मैं: यहाँ मेरे सिवा कौन रहता हे जो आ जाएगा.

वो हंस पडी. और फीर बोली: आप का तो बहुत बड़ा हे साहब.

मैं: क्यूँ तेरे मर्द का कितना हे?

अंकिता: सच कहूँ तो उसका इस से आधा भी नहीं हे. छोटी चुहियाँ के जैसा हे. शराब पिने की वजह से उसका खड़ा ही नहीं होता हे.

अंकिता के साथ बाते करते हुए मैंने उसके पल्लू को निकाल फेंका और उसके ब्लाउज के बटन को खोल दिए. उसने अन्दर एक सस्ती ब्रा पहनी थी जिसके ऊपर नेट सा कपडा था. उसके अन्दर से उसके डार्क ब्लेक निपल्स और चूची का बड़ा हिस्सा दिख रहा था. मैंने उसके बटन खोले. और मेरी नोकरानी ने मेरे लंड को अपने हाथ में ले के हिलाना चालू कर दिया.

मेरा लंड पूरा कडक था. और वो हिलाते हुए अपने बूब्स मेरे मुहं में दे रही थी बिना ब्रा को खोले ही. मैंने ब्रा के कपडे को मुहं में ले के उसकी चूचियां चुसी. फिर मैंने अपने हाथ से उसकी ब्रा का इ=सिंगल स्ट्रेप खोल दिया. उसकी ब्रा निचे गिर पड़ी. उसने हाथो को बूब्स पर दबाया और बोली, साहब आप ने तो नंगा कर दिया.

मैंने कहा, मेरी जान नंगे किये बिना कुछ थोड़ी ना करना हे.

और मैंने उसके हाथ को निचे कर के उसके दोनों बूब्स को हाथ से खूब मसले. मेरी  नोकरानी को भी मस्ती चढ़ी हुई थी सेक्स की. फिर मैंने उसके बाकी के कपडे खोल के उसे एकदम न्यूड कर दिया. उसके कपडे भी भिगो दिए थे मैंने. फिर मैंने उसे दिवार पकड़ा के खड़ा किया और पानी का पाइप ले के उसकी गांड को और चूत को धो दिया. फिर निचे बैठ के मैं उसकी चूत को चूसने लगा. अंकिता तो जैसे मर रही थी वैसे वो आह निकाल रही थी.

अंकिता: अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह साहब हमारी चूत को आज तक किसी ने नहीं चाटा., अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह वाःह्ह्ह अह्ह्ह्ह!

मैं अब एक ऊँगली उसके बुर के छेद में डाली और हिलाई तो उसकी चूत से चिकना पानी का झरना बह निकला जैसे. फिंगर से एक मिनिट उसे चोदने के बाद मैं खड़ा हुआ और उसे लंड चूसने के लिए कहा. अंकिता ने बिना किसी टेंशन के लंड को आधा मुहं में डाला और चूसने लगी. मेरे लंड में अजीब सी ठंडक आ गई थी उसके चूसने से.

नोकरानी ने अब चूसने के साथ लंड को हिलाना भी चालु किया. मैं जानता था की अब मैं जल्दी ही खाली हो जाऊँगा और मैं उतनी जल्दी वीर्य नहीं निकालना चाहता था. इसलिए मैंने अंकिता के मुहं से लंड निकाला और उसे वही दिवार पकड़ा के खड़ा कर दिया. मैंने अपने लंड के ऊपर साबुन लगाया और अंकिता की चूत के ऊपर भी उसका झाग बना दिया.

उसने अपने हाथ से मेरे लंड को सही जगह पर सेट कर दिया. मैंने उसके कंधे को पकड़ के एक झटका मारा. साबुन की चिकनाहट की वजह से लंड बिना किसी रोकटोक के अन्दर घुस गया. अंकिता ने आह्ह कर दिया और वो भी अपनी सेक्सी गांड को हिलाने लगी. मैंने उसे कमर से पकड़ा हुआ था. और मैं मजे से धक्के दे दे के उसकी चूत को चोदने लगा था. वो भी अपनी कमर को आगे पीछे कर के लंड का पूरा मजा ले रही थी.

पांच मिनट धक्के देने के बाद मेरे लंड का सब पानी अंकिता की चूत में ही निकल पड़ा. वो बहुत खुश थी आज मेरा बड़ा लंड ले के. मैंने अपनी नोकरानी से ही चटवा के लंड साफ़ करवाया. वो बोली, साबुन की वजह से कड़वा लगता हे.

मैंने कहा अभी चाट लो जान फिर मैं तुम्हे शहद लगा के चटवाऊंगा तो मीठा लगेगा.

फिर अंकिता को मैं अपनी बाहों में उठा के कमरे में आ गया. आज का दिन मैंने अपनी इस नोकरानी के नाम कर दिया था. आज सब काम छोड़ के पूरा दिन उसे ही चोदने का मन हो रहा था!

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