अनाड़ी लंड और सेक्सी टीचर

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हाई दोस्तों मेरा नाम शमीना हे और मैं कश्मीर के एक छोटे से गाँव से ही. अभी मेरी एज 23 साल की हे और हाल में मैं दिल्ली के एक किराए के मकान में रहती हूँ. मेरे पति ने मुझे शादी के कुछ हफ्तों के बाद ही छोड़ दिया और मैं त्यक्ता का जीवन गुजार रहीं हूँ. मैंने मास्टर्स किया था आर्ट्स में और मुझे दिल्ली के अन्दर ही जॉब मिल गई. यहाँ मैं जॉब के साथ साथ कोचिंग क्लास चलाती हूँ और नोकरी से ज्यादा पैसे मैं कोचिंग में ही कमा लेती हूँ. इसलिए मैं पिछले कुछ महीनो से जॉब से छुट्टी ले के फुल टाइम कोचिंग ही चला रखी हे.

एक दिन एक आंटी जी अपने 19-20 साल के बेटे को कोचिंग के लिए मेरे पास ले के आइ. वो लौंडे को देख कर मेरे अन्दर की अन्तर्वासना ने जैसे सालों के बाद करवट बदली और जाग उठी.  मैंने उसे शाम को अकेले में पढ़ाना चालू कर दिया. मैं कभी कभी जब वो मेथ्स के सम अच्छे से कर लेता तो शाबाशी देने के बहाने से उसे पकड के कपाल के ऊपर चूम लेती थी. वो एक महंगा ब्रांडेड सेंट लगाता था जिसकी खुसबू मेरे अंदर की चुदास को जैसे हवा देती थी.

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एक दिन मैंने उसके आने से पहले अपनी सलवार को वो हिस्सा थोड़ा फाड़ दिया जहा निचे मेरी चूत थी. और जब मैं अपनी टाँगे फैला के बैठती थी तो इस फटे हुए हिस्से से मेरी चूत आराम से दिखती थी. अब वो आया तो मैं कुर्सी के ऊपर बैठ के उसको पढ़ा रही थी. मैंने देखा की उसकी नजर बार बार मेरी चूत वाले हिस्से के ऊपर ही जा रही थी. मेरा दाव काम कर गया था. वो चोर के जैसे मेरे खुले भोसड़े को बार बार देख रहा था.

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थोड़ी देर मैंने उसे देखने दिया और पूछा, आज तुम्हारा ध्यान कहा हे साहिल, कहा देख रहे हो?

वो चूप ही रहा लेकिन उसके चहरे के ऊपर स्माइल थी.

मैंने कहा अगर नहीं बताया तो मैं पनिश करुँगी!

वो धीरे से बोला, शमीना दीदी आप का कपडा वहां फटा हुआ हे. ऐसे कह के उसने मेरी चूत की तरफ इशारा किया.

मैंने निचे हाथ किया तो मेरा हाथ अपनी चूत की फांको के ऊपर आ गया. मैंने शरमाने की एक्टिंग की और उसको कहा, साहिल किसी को बताना मत ओके?

वो बोला, उसके अन्दर से मस्त खुसबू आ रही हे, मैं एक बार करीब से सूंघ लूँ उसको?

मैंने कहा, चल आजा सूंघ ले, लेकिन किसी को कुछ भी कहना मत.

वो निचे झुक के मेरी चूत के ऊपर अपनी नाक को रख के उसको सूंघने लगा. उसके उच्छ्वास की गरम हवा मेरे बुर पर लगी तो मेरे अन्दर की औरत भड़क उठी. मैंने उसके बाल पकड़ के उसके एक हाथ को अपने बूब्स पर लगा के कहा. साले तूने तो अपनी मेडम की कामुकता जगा दी!

वो भी भूखे भेडिये के जैसे मेरे बूब्स के ऊपर टूट पड़ा और उन्हें दबाने लगा. मैंने उसको और मजे देने के लिए आज ब्रा भी नहीं पहनी थी. और बिना ब्रा के बूब्स मसलने पर बड़े सॉफ्ट लगते हे वो आप को पता ही होगा! वो मेरे बूब्स को दबाते हुए कहने लगा, शमीना दीदी आप के ओरेंज तो बड़े ही सेक्सी हे. और बड़े भी.

मैंने कहा, मीठे भी हे, चखेगा?

वो कुछ नहीं बोला और उसने मेरे कुरते को ऊपर उठा लिया. मैंने कुरता निकालने में उसकी मदद की. फिर वो मेरे बूब्स के उपर आ गया अपनी जबान को ले के. वो दोनों निपल्स को एक एक कर के चूस रहा था. मैंने कहा, अबे साले मेरा सब देख लिया तूने अब अपना भी तो निकाल. और मैंने ऐसे कह के अपने हाथ को उसकी जिप खोल के अन्दर डाल दिया. उसका लंड कडक हो रखा था और लंड की नली के ऊपर प्री-कम भी छुट चूका था. वो पूरा के पूरा उत्तेजित था. वैसे उसका लंड उतना बड़ा और मोटा नहीं था. लेकिन काम चल जाए ऐसा तो था ही. उसके कडक लंड को मैंने दबाया तो उसके मुहं से एक आह निकल पड़ी. मैंने उसके बटन को खोल के पेंट को निचे सरका के उतार दिया. जब उसकी अंडरवेर निकाली तो उसका लंड छत की तरफ देख के कम्पन कर रहा था.

उसके लंड के ऊपर की चमड़ी हट गई थी और सुपाड़ा एकदम लाल हो गया था. मैंने उसको कहा, लंड चुसाया हे कभी किसी को?

वो बोला, आप ही स्टार्ट कर दो आज.

मैंने उसके लंड को अपने मुहं में लिया तो वो आह्ह कर गया. मैंने अपने हाथ से उसके लंड के स्ट्रोक किया और उसके लोडे को चूसने लगी. दो मिनट सक कर के मैं खड़ी हुई तो वो बोला, मेडम मुझे आप का चूत दिखाओ ना! मैंने कहा, रुक ना अभी तो देखा था मेरी फटी हुई सलवार से.

वो बोला, पूरा खोल के दिखाओ ना!

मैंने कहा, रुक दिखाती हूँ तुझे अभी.

फिर मैं वापस उसके लंड को अपने मुहं में डाल के सक करने लगी. उसकी बस हो गई और एक मिनट में ही उसने मेरे मुहं के अन्दर ही अपनी पिचकारी छोड़ दी. मैं उसके सब माल को पी गई. वो बोला, ये क्या हुआ शमीना दीदी?

मैंने कहा, कभी हिलाया नहीं हे अपने हाथ से?

वो बोला नहीं?

मैंने कहाइसे बायोलोजी में एजेकयुलेशन कहते हे और हिंदी देसी भाषा में कहूँ तो तेरा मुठ निकल गया. वो हंस पड़ा और बोला, सच में बहुत मजा आ गया मेडम.

मैंने कहा, मेरी चूत को चाटेगा तू अब!

वो बोला मैंने कभी नहीं किया हे वो.

मैंने कहा, आइसक्रीम तो खाई हे ना अपनी जबान से चाट चाट के?

वो बोला, हाँ.

मैंने कहा बस वैसे ही करना हे!

मैं अपनी सलवार को खोल के बेड के ऊपर सीधी लेट गई और अपने घुटनों को ऊपर की तरफ कर के अपनी चूत उसके सामने खोल दी पूरी की पूरी. उसने मेरी चूत के उपर अपने होंठो को लगा दिया और वो चूत की पंखुड़ियों को अपने मुहं में ले के उन्हें चूसने लगा! वो बहुत ही सेक्सी ढंग से मेरी चूत को चाट रहा था, वैसे ही जैसे आइसक्रीम खाई जाती हे! मैं सिसकियाँ लेने लगी थी और मेरी हालत बड़ी खराब हो गई थी. अपने हाथ से ही मैंने अपने बूब्स भी मसल रही थी.

उसने उपर देख के कहा, शमीना दीदी सही कर रहा हूँ ना मैं?

मैंने उसके माथे को वापस अपनी चूत पर लगाते हुए कहा, हां बिलकुल सही कर रहे हो अब जब तक मैं ना कहूँ इसको चूसते रहो ऐसे ही.

वो वापस मेरी पुसी को अपने होंठो से ढेरो प्यार देने लगा. और मैं भी अन्तर्वासना की दुनिया में ऐसे खोई थी की होश भी खो चुके थे. उसका पुसी के ऊपर जीभ को फेरना मुझे बड़ा ही चुदासी कर रहा था! शायद वो भी मेरी चूत को ऐसे चूस चूस के थक गया था.

अब वो भी सही तरह से चूत चाट के मुझे पूरी तरह से गरम कर चूका था. मैंने उसे कहा, अब अपना डंडा मुझे दे दो.

उसने अपने लंड को मेरे हाथ में दे दिया. मैंने उसके लोडे के ऊपर अपनी चूत की फांको को रख दिया और घिसने लगी. उसका लोडा चिकना बना तो मैंने कहा अब धक्का लगाओ. उसने अपनी कमर को एक झटका दिया और अपने लोडे को चूत में घुसा दिया. मैं उस से लिपट गई और वो मुझे एक और धक्के में पुरे लंड की गर्मी का मजा दे गया. उसका लंड मेरी चूत की गहराई में गोते लगा रहा था. चूत की चिकनाहट से उसे भी बड़ा मज़ा आ रहा था. और वो अपनी कमर को आगे पीछे कर के मुझे चोद रहा था. मैं भी उसकी कमर को पकडे हुए थी और उसे सही तरह से चोदने को गाइड कर रही थी.

उसे चोदने का कोई अनुभव नहीं था. एकदम अनाड़ी चुदक्कड था वो. इसलिए उसने अपने वीर्य के आने के वक्त धक्के नहीं स्टॉप किये. उसका वीर्य मेरी चूत में घुसा और मुझे एक अजीब सी शान्ति मिली. मैं जानती थी की वो उसका पहला चूत चोदन था इसलिए मैंने उसे कुछ नहीं कहा.

और मैं ये भी जानती थी की आगे ये मेरे लिए बड़ा सही चोदुं बनेगा एकदम पालतू वाला. इसलिए मैंने उसे अपने गले से लगा के उत्साहित किया की उसको बड़ा सही चोदना आता हे. वो खुश था अपनी मेडम की चूत के अन्दर अपना पानी छुडवा के.

अक्सर साहिल से मेरी चुदाई होती रही. पढ़ाई के बहाने वो मेरे घर आता था. और मैं उसका लोडा अलग अलग पोज़ में लेती थी. माहवारी यानी की एमसी के दिनों में वो मेरी गांड मारता था या फिर मैं उसके लंड को चूस के वीर्य स्खलन करवा देती थी.

फिर उसके पापा का तबादला हुआ और वो चला गया. और मैंने अपने लिए एक और लड़के राजीव को फांस लिया. राजिव के साथ की मेरी सेक्स कहानी भी मैं आप को लिख के भेजूंगी. लेकिन वो आज नहीं, फिर कभी!

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