विधवा चाची को चोद दिया

हेलो दोस्तों मेरा नाम रोकी हे और मैं ओड़िसा के एक बड़े शहर से हु. मेरी उम्र 25 साल हे और मैं एवरेज लुक्स वाला हूँ.  मेरी विधवा चाची को मेरा  लंड भा सा गया था. और उसने उसे ले लिया था. चाची भरी जवानी में ही चाचा जी के देहांत से विधवा हो गई थी. और अक्सर उसके कमरे में से रात को रोने की आवाजे भी आती थी. चाचा के बगेर अब भला उसके सब होते हुए भी कोई नहीं थे!

चाची दिखने में बड़ी सुंदर हे उसकी उम्र 30 साल हे और वो हमेशा से ही साडी पहनती आई इ. वो थोड़ी मोटी और भरे हुए बदन की हे. उनकी बूब्स की साइज़ एकदम बस्टी और फैली हुई हे. गांड तो ऐसी हे की देखते ही लव सा हो जाए. मै चाचा के देहांत के पहले से ही चाची को प्यार करता था. उसके नाम की मुठ मैंने बहुत बार मारी थी. और एक बार छिप के चुदाई भी देखी थी दोनों की.

एक बार मेरी मम्मी पापा और घर के बाकि के सब लोग बहार जा रहे थे. चाची के लड़के पपू की एग्जाम थी इसलिए चाची और वो नहीं जा रहे थे. मैंने भी पढाई का बहाना निकाला और मैं खुद भी रुक गया. शाम को खाना खाने के बाद मैंने हिंदी पोर्न स्टोरीस के ऊपर इन्सेस्ट कहानियाँ पढ़ी. शाम को चाची के बिस्तर में ही मैं, चाची और उसके बेटा पपू सो गए. चाची बिच में सोयी हुई थी, पपू एक साइड में और मैं चाची की दूसरी साइड में.

रात को सोने से पहले ही मैंने चाची की गांड को देखा था और फिर लंड को ये कह के सुला दिया की सही मौका नहीं हे अभी. अचानक रात को नींद में ही मेरा हाथ फिसल के चाची के बुर पर चला गया. मेरी नींद खुल गई और मैंने आंखे खोल के देखा तो चाची का क्लेवेज मेरे सामने थे. मेरे लंड में मस्ती चढ़ गई और मैंने हाथ को चाची के बुर पर घिसा.

ये पहली बार था जब मैं अपने हाथ से किसी औरत की चूत को टच कर रहा था. मुझे चाची की चूत की झांट अपने हाथ पर महसूस हो रही थी. फिर मैंने उकी गांड की तरफ हाथ किया. वहां पर भी झांट तो थी थी. मैं कुछ देर ऐसे ही आंटी की चूत के साथ खेलता रहा. और फिर चाची हिली तो मैंने फट से अपना हाथ उसके बदन के ऊपर से हटा दिया. और फिर मैं लंड को वापस पुचकार के सो गया.

फिर अगले दिन भी मुझे चाची के साथ ही सोना था. आज मैंने एक प्लान बनाया चाची की चूत मारने के लिए. सुबह ही मैं पेट में दर्द होने का बहाना कर मैंने चाची के सोने की वेट करने लगा. चाची दोपहर का खाना निपटा के करीब डेढ़ बजे सोने के लिए चली गई. मैंने आधा घंटा और वेट किया ताकि चाची की नींद लग जाए.

और फिर मैं अपनी चाची की बगल में जा के लेट गया. कुछ देर लेटने के बाद मैंने धीरे से अपना एक हाथ चाची की चुन्चियों पर रख दिया. मैं चाची के बूब्स को ब्लाउज के उपर से ही मसल रहा था. आंटी ने कोई रिस्पोंस नहीं दिया तो मेरी हिम्मर प्रति सेकंड बढ़ने लगी. मैंने कुछ देर बूब्स मसले और फिर हाथ को निचे उनकी चूत पर ले गया.

चाची ने अभी भी साडी पहनी हुई थी. और उसने निचे पेटीकोट नहीं पहना था तो मुझे आसानी से उसकी चूत पर हाथ घुमाने का मौका मिला. थोड़ी देर चूत को रगड़ने के बाद मैंने अपना पेंट खोला और देखा तो मेरा नन्हा शैतान पूरा तन के खड़ा हुआ था.

मैं धीरे से अपनी चाची के उपर आ गया और अपने लंड को उसकी चूत पर घिसने लगा. मुझे पता नहीं था की वो जाग रही हे या सोयी हुई हे. फिर कुछ देर घिसने के बाद वो अपनी दोनों टांगो को खोली. मुझे तो लंड घिसने में ऐसे मजा आ रहा था की बाकी सब चीजों पर मेरा दयां ही नहीं था.

चूत गीली हो गई और उसके अन्दर से चुदाई के रस का झरना फुट गया. मैंने धीरे से अंड को छेद में सेट किया. लोडा थोडा अन्दर घुसा और मैं अपनी कमर को हिला के उसे अन्दर बहार करने लगा.

तभी चाची ने मुझे धक्का दिया, मेरा दिल जोर जोर से धडक गया. मैंने दिमाग से गालियाँ सुनने की तयारी बना ली थी. लेकिन मुझे तभी बहार अपनी मम्मी की आवाज आई. शायद मम्मी के आने की आहट को सुन के ही चाची ने अपनी चूत से मेरा लोडा बहार करवा दिया था.

मम्मी के आने से मेरा सेक्स अधुरा सा रह गया. चाची ने कपडे ठीक किये और वो मम्मी के पास चली गई. मैंने पेंट पहन के लंड को हाथ से हिला लिया. अब मुझे मौके की तलाश थी की कब मैं चाची को चोदुं. मम्मी के आ जाने से मेरा खेल बिगड़ गया था.

लेकिन उस रात को मैं वापस चाची के कमरे में पढाई  करने के बहाने से गया. पपू के सोने के बाद चाची मेरे पास आई और बोली, चलो मैं भी सोने जाती हूँ.

चाची ने जिस अंदाज से चलो शब्द के ऊपर वजन दीया था! साला मैं समझ गया की उसकी चूत भी भठ्ठी की तरह तप चुकी हे और उसे भी शायद मेरा लंड लेना ही हे. पपू के गहरी नींद में सोने के बाद मैं चाची के पास चला गया. आज मैंने बड़ी हिम्मत से अपने कपडे खोले और एकदम नंगा ही चाची के पीछे सो गया उसकी बड़ी गांड मेरे तरफ थी. मैंने अपने लंड को गांड की दरार पर रख दिया.. और उसे घिसते हुए चाची के बूब्स को दबा दिए चाची ने पीछे देखा. मैं नहीं डरा! उसने मुझे नंगा देख के हंस दिया. मैंने उसका हाथ पीछे ले के अपने लंड को उसे थमा दिया.

चाची ने ब्लाउज नहीं पहना था और उसके बूब्स मसलने में बड़ा मज़ा आ रहा था. वो मेरे लंड को मुठ मार रही थी. मैंने धीरे से चाची के कान में कहा, चाची मेरी  चुसो ना!

वो भी कान में ही बोली, पपू जाग जाएगा अभी जो जरुरी हे वही करो.

मैंने कहा, ठीक हे. और फिर मैंने धीरे से चाची के निचे के कपडे खोले. उसकी गांड में सच में बाल थे. मैंने ऊंगली से गांड और चूत के छेद को टटोला. वो भीगी हुई थी. उसका भी लंड लेने का भरपूर मन हुआ था. मैंने अपने लंड पर थूंक लगाया और चाची को कहा तो उसने अपने हाथ से सही छेद पर लगा दिया.

एक झटके के अन्दर मुझे अपने लंड के चारों तरफ चाची के बुर का गरम वातावरण मिल गया. मैंने धक्के दे के उसे चोदने लगा. चाची ने चद्दर को ऊपर खिंच लिया और हम दोनों के नंगे बदन को ढंक लिए.

2-3 मिनिट के भीतर ही मेरे लंड का पानी निकल के चाची के बुर में समा गया.. वो कपडे सही कर के उठी और बाथरूम में चली गई. शायद वो मेरे वीर्य को साफ़ करने गई थी. विधवा हे इसलिए प्रेग्नेंट नहीं हो सकती हे वो!

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