ऑफिस वाली डिवोर्स लेडी की प्यासी चूत

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जो बात आप को मैं आज बताने के लिए आया हूँ वो मेरी लाइफ का सब से हसीन और एक ना भूलने लायक अनुभव रहा हे. आज से कुछ 2 साल पहले की ये सच्ची बात हे. मैं जबलपुर के एक ऑफिस में काम करता था. मेरा काम डाटा एंट्री का था. ऑफिस में सिर्फ 4 लोग काम करते थे. और उसमे से भी 2 लोग तो हमेशा बहार के काम में बीजी रहते थे. मैं दिन में कुछ घंटो तक तो ऑफिस में एकदम अकेला ही होता था.

हमारे ऑफिस के सामने वाले ऑफिस में टेली-कालिंग का काम होता था. वहां पर पूरा स्टाफ लेडिज था. उनके ऑफिस में लांच टाइम दोपहर 2 से 3 का था. सारा स्टाफ लंच टाइम में बहार घूमता रहता. मैं भी लंच कर के अपने ऑफिस के बहार खड़ा रहता था. सामने वाली ऑफिस में अधिकतर मेरिड लेडिज थी. उनमे एक थी मिसिस कविता वो अक्सर मुझे देखा करती थी. सच बताऊँ तो मैं उन्हें देखने के लिए लांच जल्दी कर के बहार खड़े रहता था.

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मिसिस कव्टिया की उम्र करीब 30 साल होगी. उसकी हेल्थ एवरेज थी. रंग सांवल, कद करीब 5 फिट 4 इंच. उनके बाल लम्बे थे और वो हमेशा बिच की मांग डाल कर लम्बी और मोटी चोटी बांधती थी. लाल सिन्दूर, लाल टिकी और लाल कलर की लिपस्टिक उनके लिप्स एकदम रसदार थे. मैं उनकी हेर स्टाइल और लिप्स का दीवाना था. पर एक दिन जो हुआ उसके बाद मेरे होश ही उड़ गए. हुआ यूँ की मैं हर दिन की तरह लंच कर के कविता को देखने के लिए बहार आया. उस दिन वो थोडी लेट बहार आई और अकेले ही टेरेस की तरफ जाने लगी. मैं हिम्त कर के उसके पीछे गया. वो टेरेस मैं सब से कोने में जाकर खड़ी हो गई. मैं छिपकर उसे देख रहा था.

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मैने देखा की कविता ने अपनी पेटीकोट को हटा के अपनी चूत के अन्दर अपनी बड़ी ऊँगली डाल दी. और जैसे ही उसने अपनी साडी का पल्लू निचे किया मैं उसके रसीले बूब्स भी देखे. दोस्तों मेरे पुरे बदन में करंट दौड़ गया. मेरा लंड पूरा शबाब पे था और वो बस कविता की चूत में जाना चाहता था. मैंने अपने आप को कंट्रोल किया और उसे देखता गया.

कविता अपने बूब्स दबा रही थी और अपनी चूत में ऊँगली को अन्दर बहार कर रही थी. और उसके लिप्स से सिस्कारें निकली रही थी. मैं पागल हो रहा था. फिर मैंने देखा की कविता जाने के लिए तैयार हो रही थी. मैंने उसके पहले अपने ऑफिस में आ गया. दोस्तों मैं सच बोल रहा हूँ उस रात मुझे नींद ही नहीं आई. मैं किसी भी हालत में कविता को चोदना चाहता था. अगले दिन जब मैं ऑफिस के लिए निकला तो किस्मत से रस्ते में कविता मिल गई. उसकी गाडी ख़राब हो गई थी. और वो किक लगा रही थी. मैं मन ही मन बहुत खुशह हुआ और हिम्मत कर के उसके पास गया. फिर मैंने उसे कहा की क्या मैं आप को ड्राप कर दूँ ऑफिस पर?

वो मेरे साथ आ गई. बस उस दिन से मैंने कविता से बातचीत करना चालू कर दिया. उस से बात कर के पता चला की उसका डिवोर्स का केस चालु था. और वो अपने पेरेंट्स के घर में रहती थी

एक दिन लंच के बाद मैं कविता मेरे ऑफिस आई. कुछ देर बात कर के कविता बोली, तुम्हारी ऑफिस में इंटरनेट कनेक्शन हे क्या? मैंने कहा हां है ना. उसने कहा हमारे ऑफिस में नहीं हे. पूरा दिन बस कॉल पर कॉल ही करने होते हे.

फिर कविता ने कहा उसे नयी मूवीज और सोंग्स चाहिए. तो मैंने कहा की आभू डाउनलोड कर लेते हे. जैसे ही मैंने सोंग की साइट खोली तो पोर्न फोटो सामने आने लगी. मैं उस फोटो को कलोज़ किया तो पोर्न साइट ही ओपन हो गई. मैंने शर्मा गया. मैं पूरी कोशिश कर रहा था इस साइट को बंद करने की. लेकिन वो शायद कोई वाइरस था जिसने ब्राउजर के साथ साथ कम्प्यूटर को भी हेंग कर रखा था. तभी कविता बोली क्यूँ इतने परेशान हो रहे हो चलने दो ना!

मैं एकदम सरप्राइज हो गया. मैं कविता के पीछे खड़ा हो गया. कविता चेयर के ऊपर बैठी हुई थी. मैंने देखा की वो पोर्न साइट में एकदम खो सी गई थी. अचानक कविता ने अपनी साडी को ऊपर कर दिया और अपनी चूत में ऊँगली करने लगी. उसे ऐसा करते हुए देख के मेरा लंड खड़ा हो गया. मैं चेयर को कस के पकड़ लिया. और मेरा लंड कुर्सी में टच हो रहा था. मेरा लंड बहार आ के कविता की चूत को फाड़ना चाहता था. पर मैंने अपने आप पर कंट्रोल रखा था.

फिर मैंने हिम्मत कर के पीछे से कविता के दोनों बूब्स पर अपने हाथ रख दिए. कविता ने कुछ नहीं किया जिस से मेरी हिम्मत और भी बढ़ गई. मैंने अपने दोनों हाथ से कविता के बूब्स को खूब प्रेस किया. और उसके निपल्स को मसलने लगा. कविता ने साडी पहनी थी उसके अन्दर ब्लाउज. उसके अन्दर उसकी लाल ब्रा दिख रही थी. इतने कपडे होने के बाद भी मैं उसके निपल्स को अच्छे से महसूस कर रहा था. ऐसे ही कुछ टाइम बिताने के बाद मैंने कविता को चेयर से उठाया और एक डीप किस दे दिया. मैंने उसके दोनों लिप्स पर लगी हुई डार्क लिपस्टिक एक ही किस में सक कर ली.

लंच टाइम ख़तम हो रहा था और हम दोनों की सेक्स करने की बहुत इच्छा हो रही थी. कविता ने कहा मुझसे और सहा नहीं जाता हे. और तुम अपने लंड को मेरी चूत में डाल को मैं सेक्स करना चाहती हूँ तुम्हारे साथ में. मैंने उसे कंट्रोल किया और कहा जाकर अपने ऑफिस से हाल्फ डे का ऑफ़ ले लो. जैसे ही कविता अपनी ऑफिस के लिए गई तो मैंने भी अपने सीनियर को कॉल किया हाल्फ डे के लिए.

मुझे भी लिव मिल गई. मैं और कविता साथ में पार्किंग में गए. मैंने कविता से पीछा सेक्स करने के लिए हम कहाँ जायेंगे? तो उसने कहा की तुम अपनी बाइक लेकर मेरे पीछे चलो. कविता आगे आगे अपनी स्कूटी चला रही थी और मैं उसके पीछे चल रहा था. कुछ देर में हम एक बिल्डिंग के सामने रुक गए. कविता ने बताया वो यहाँ अपने हसबंड के साथ रहती थी. फ्लेट कविता के नाम पर था और वहां आजकल कोई आता जाता नहीं था. फ्लेट की चाबी उसके पास ही रहती थी और वो हफ्ते 10 दिन में एकाद बार सफाई के लिए आती थी. मैंने कहा किसी को शक तो नहीं होगा ना? उसने कहा नहीं, और अगर कोई पूछे तो कहना की तुम फ्लेट को रेंट पर लेने के लिए देखने आये हो!

फिर क्या था मेरा टेंशन खत्म हुआ. जैसे ही हम दोनों फ्लेट में घुसे कविता ने डोर बंद कर दिया. और मुझे कहा की तुम बेडरूम में बैठो मैं आती हूँ. मैं बेडरूम में जाकर बेड के ऊपर लेट गया. कुछ देर के बाद मेरी नजर बेडरूम के दरवाजे पर गई. वहां पर कविता पानी का ग्लास लिए खड़ी थी. कविता ने अपनी लम्बी चोटी को खोल दिया था और उसके बाल गिले थे. और उसने अपने होंठो के ऊपर थोड़ी और लिपस्टिक भी लगा ली थी. और उसके बदन से लेडी परफ्यूम की स्मेल भी आ रही थी. उसके रूम में आने से पूरा कमरा खुसबू से महक उठा. मैंने कविता से पानी का ग्लास लिया और एक घूंट में पूरा पानी पी गया.

कविता ने रेड साडी भी पहनी हुई थी उस वक्त. उसकी मांग बड़ी ही सेक्सी लग रही थी. मैंने उसे कस के अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके होंठो को चूसने लगा. वो भी मेरे होंठो को मस्त कस के चूस रही थी. मैं उसके बालों में अपने हाथ घुमा रहा था. उसके माथे, पेट, कान सब जगह को मैंने चूम लिया. फिर मैंने उसकी साडी उतारी और ब्लाउज के ऊपर से ही उसके बूब्स चूसने लगा. उसका ब्लाउज मेरी थूंक से गिला हो गया. कविता को पता चला की जितनी कामुक वो उसकी चूत में ऊँगली करने से होती थी उस से कई जया वो मेरी इस हरकत से हो रही थी.

मैंने उसे बहुत जोर से पकड़ रखा था. उसका बदन टूटने लगा था. मैंने उसका ब्लाउज खोल दिया और पेटीकोट भी. तभी कविता मेरी शर्ट को खोलने लगी. मेरी बनियान और अंडरवेर को भी उसने उतार दिया. और मेरे लंड को डेक के वो इतनी खुश हुई और बोली, उसका पति कभी उसे उतना कामुक नहीं कर पाया था. उसने बिना देर किये मेरे लंड को अपने मुहं में ले लिया और ब्लोव्जोब देने लगी. मैंने उसकी ब्रा खोल दी और उसके दोनों निपल्स को मसलने लगा. मेरा हाथ जैसे ही उसकी निपल्स को मसलता था वो और कामुक हो जाती और जोर जोर से सिसकियाँ लेती थी.

और अब हम दोनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे. मैंने कविता के सुंदर शरीर को देखा तो मेरा लंड खड़ा होता जा रहा था. लंड काफी मोटा हो गया था और तना हुआ था. मैंने कविता को ऊपर से निचे तक देखा. उसके लम्बे बाल, भरी हुई मांग, उसके बूब्स जो की बहुत ही सुंदर लग रहे थे. उसकी चूत भी कामुक लग रही थी. मैंने उसके शरीर के एक एक हिस्से को किस किया. कविता के मुहं से सिसकियाँ निकल पड़ी.

और फिर मैंने उसको बेड पर डाला और उसकी दोनों टांगो को अपनी कमर के पीछे कर लिया. उसकी गोरी चूत में मैंने अपना मोटा लंड डाल दिया. लंड एक ही बार में उसकी चूत में घुस गया. बहुत दिनों से चुदाई ना होने की वजह से कविता थोडा दर्द महसूस कर रही थी. लेकिन फिर वो कम्फर्टेबल हो गई. मैंने अपने लंड को धीरे धीरे अन्दर बहार किया. मुझे कुछ अजीब सा फील हुआ तो मैंने लंड बहार निकाला. मैंने देखा तो लंड की स्किन फोल्ड हो गई थी. फिर मैंने अपने लंड को कविता के मुहं में डाल दिया. उसने उसे खूब चूसा. मैंने फिर लंड चूत में डाल दिया. अब भी स्मूथ चुदाई नहीं हो रही थी. मैंने फिर कविता से ड्रेसिंग टेबल से आयल का बोतल लाने के लिए काया. और अपने लंड को तेल से पूरा नहला दिया. ऐसे करने से फिर चुदाई स्मूथ होने लगी थी.

कुछ देर जोर जोर के झटके वाली चुदाई के बाद मैंने देखा की कविता की चूत से ब्लड निकल रहा था. तभी मुझे पता चला की उसका पति तो उसका सिल भी सही तरह से खोल नहीं पाया था. फिर क्या था मेरा जोश और भी बढ़ गया और मैं जोर जोर से झटके दे के उसे चोदने लगा. कविता की सिसकियाँ अब चीखों में बदल गई थी. वो तडपने लगी थी. पर मैंने उसे जोर से झटके देना चालू ही रखा. वो चीखने लगी पर मेरा लंड तो उसकी चूत को और भी फाड़ना चाहता था. मैंने कुछ और तेल लगाया लंड के ऊपर और फिर से जोर जोर से उसको चोदा. मैंने कविता को करीब आधे घंटे तक ऐसे ही कस कस के चोदा. फिर मेरा माल निकल गया. मैंने अपने लंड का साइज़ छोटा होने तक उसे कविता की चूत से नहीं निकाला. फिर अपने लंड बहार निकाल के मैंने उसे कविता को मुहं में दे दिया. कविता के लंड को चूसने से वो एक बार फिर से कडक और मोटा हो गया. एक बार फिर से मैंने अपने लौड़े को कविता की चूत में दे दिया और 15 मिनिट तक उसकी चुदाई की.

फिर हम दोनों नहाने के लिए चले गए. वहां बाथरूम के अंदर भी मैंने कविता की चुदाई की. क्या दिन था वो जिसे मैं आजतक नहीं भूल सकता! नाहा कर मैं और कविता फ्रेश हो गए. मैंने उस दिन कविता के साथ ही खाना भी खाया. रात के 8 बहे अपने घर गया तब मैं भी थक चूका था उसे चोद चोद.

कविता के पापा की ट्रान्सफर हुई तो उसने भी जॉब से रिजाइन कर दिया. वो लोग अब दुसरे शहर में हे और कभी कभी वो मुझे कॉल करती हे!

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